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छात्रों के लिए उपराष्ट्रपति का प्रेरक संदेश: अनुशासन और नशामुक्ति

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छात्रों के लिए उपराष्ट्रपति का प्रेरक संदेश: अनुशासन और नशामुक्ति

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने त्रिपुरा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में युवा स्नातकों को नशे से दूर रहने और तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने भारत के विकास के प्रति उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

नशे से दूर रहना महत्वपूर्ण है।
तकनीक का जिम्मेदार उपयोग करें।
उद्देश्यपूर्ण विकास का महत्व समझें।
संस्कृति और विरासत को संजोएं।
एकता में विविधता का अनुसरण करें।

अगरतला, ८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को अगरतला में त्रिपुरा विश्वविद्यालय के १४वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने युवा स्नातकों से उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने, नशे से दूर रहने और समाज एवं देश के लाभ के लिए तकनीक का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज का युवा एक ऐतिहासिक क्षण में खड़ा है, जब भारत तेजी से विकसित भारत 2047 के विजन की ओर बढ़ रहा है। तकनीक की परिवर्तनकारी भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने छात्रों से इसे सकारात्मक और जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज और मानवता की प्रगति के लिए उद्देश्य के साथ प्रगति आवश्यक है।

उपराष्ट्रपति ने त्रिपुरा को संस्कृति और विरासत से समृद्ध राज्य बताया। उन्होंने त्रिपुरा सुंदरी मंदिर की यात्रा का जिक्र करते हुए इस क्षेत्र के गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त प्रयासों से किए गए विकास कार्यों की सराहना की। माता बाड़ी पर्यटन सर्किट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आध्यात्मिक और इको-टूरिज्म के वैश्विक मानचित्र पर त्रिपुरा की स्थिति को मजबूत करेगी, रोजगार के अवसर पैदा करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

उपराष्ट्रपति ने नॉर्थ-ईस्ट को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में कनेक्टिविटी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पिछले दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में रेल, सड़क और हवाई कनेक्टिविटी में काफी सुधार हुए हैं। इन विकासों ने इस क्षेत्र के लोगों को एक भारत श्रेष्ठ भारत की सच्ची भावना के साथ देश के अन्य हिस्सों के करीब ला दिया है।

छात्रों को समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित करते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की विविधता में एकता के महत्व पर जोर दिया। प्रसिद्ध तमिल कवि सुब्रमण्यम भारतियार को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक राष्ट्र का संरक्षक है और सामूहिक प्रयास और एकता देश को अधिक उपलब्धियों की ओर ले जाएगी।

त्रिपुरा विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरा है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले शोध प्रकाशनों, वित्त पोषित परियोजनाओं और बौद्धिक संपदा पहलों की बढ़ती संख्या को नोट किया, जो विश्वविद्यालय के बढ़ते शैक्षणिक कद को दर्शाते हैं। उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय के संकाय विकास केंद्र भवन और आवासीय क्वार्टर परिसर का भी डिजिटल रूप से उद्घाटन किया।

दीक्षांत समारोह में त्रिपुरा के राज्यपाल, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के मुख्य रेक्टर इंद्रसेन रेड्डी नल्लू, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, त्रिपुरा के मुख्य सचिव जितेंद्र कुमार सिन्हा, त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति श्यामल दास, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार समीर कुमार सिल, संकाय सदस्यों, गणमान्य अतिथियों, अभिभावकों और स्नातक छात्रों ने भाग लिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कि आज के युवा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनका संदेश न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह देश के विकास में युवा की भूमिका को भी दर्शाता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को किस प्रकार की सलाह दी?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशे से दूर रहने और तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की सलाह दी।
त्रिपुरा विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह कब हुआ?
त्रिपुरा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह ८ मार्च को हुआ।
उपराष्ट्रपति ने किस बात पर जोर दिया?
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने और समाज की भलाई के लिए काम करने पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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