उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का युवा और नशामुक्ति पर जोर: हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह
सारांश
Key Takeaways
- नशामुक्ति पर जोर
- युवाओं की भूमिका में सशक्तिकरण
- शिक्षा में नवाचार
- समाज कल्याण के लिए ज्ञान का उपयोग
- हिमाचल प्रदेश की संस्कृति और परंपरा
शिमला, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में अपने विचार साझा किए। इसके बाद उन्होंने कांगड़ा में चामुंडा नंदिकेश्वर मंदिर में पूजा की।
उपराष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश को देवभूमि और वीरभूमि के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि इस राज्य ने राष्ट्र के सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य की समृद्ध आतिथ्य सेवाओं, जीवंत संस्कृति और स्थायी परंपराओं की सराहना की।
राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान और निरंतर बौद्धिक विकास के कारण फले-फूले। इन संस्थानों में गुरु और आचार्य जीवनभर शिक्षार्थी रहते थे जिन्होंने अपने ज्ञान को संवाद और शोध के माध्यम से संवारा। उन्होंने आधुनिक विश्वविद्यालयों से संकाय विकास को प्राथमिकता देने और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान तथा वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को सक्रियता से लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से जुड़े विषयों को शामिल कर रहा है, जिससे शिक्षा में एक नई संस्कृति का विकास हो रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा डोगरी में कई रचनाओं के अनुवाद और हिंदी साहित्य के पंजाबी में अनुवाद की पहल की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, संयुक्त शोध, साझा शिक्षण विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान-प्रदान से एक समग्र शिक्षण समुदाय का विकास हो सकता है, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा।
उन्होंने स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों की बात करते हुए युवा नवप्रवर्तकों के लिए नए अवसरों का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की 'कम्युनिटी लैब' पहल की सराहना की, जिसके तहत छात्र और शिक्षक स्थानीय समुदायों से जुड़कर उनकी जरूरतों को समझते हैं।
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बदलने के लिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में छात्र और युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि विकसित भारत की परिकल्पना का आधार समावेशी विकास होना चाहिए, जिसमें कोई भी राज्य या समाज का वर्ग पीछे न रहे।
उपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय द्वारा नशामुक्त परिसर की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की और कहा कि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने सभी से नशाखोरी के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। राधाकृष्णन ने युवाओं से समाज के उत्थान के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की प्रगति के लिए जीने और हमेशा नशा न करने की अपील की।
इस दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं। उन्होंने बताया कि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 महिलाएं थीं, जो राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के योगदान को दर्शाता है।
दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, कृषि मंत्री चंद्र कुमार, विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।