12 अगस्त 2026
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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह का अल्टीमेटम: 15 दिन में जमा करें अवैध हथियार, वरना होगी सख्त कार्रवाई

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मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह का अल्टीमेटम: 15 दिन में जमा करें अवैध हथियार, वरना होगी सख्त कार्रवाई

सारांश

मणिपुर में तीन साल से जारी जातीय संकट के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है — अवैध हथियार जमा करो या कानूनी कार्रवाई झेलो। 6,000 से अधिक लूटे गए हथियारों में से 70% बरामद, पर बाकी 30% अब भी बड़ा खतरा हैं।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 12 अगस्त 2026 को 15 दिनों के भीतर अवैध हथियार जमा करने का अल्टीमेटम दिया।
हथियार संबंधित विधायक या जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) के माध्यम से जमा किए जा सकते हैं।
3 मई 2023 की जातीय हिंसा में 6,000 से अधिक हथियार लूटे गए थे; अब तक लगभग 70% बरामद।
5 फरवरी 2026 से अब तक 1,422 हथियार , 7,000+ कारतूस और 1,137 विस्फोटक बरामद; 491 उग्रवादी गिरफ्तार।
गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास सिंह ने राजमार्गों पर उगाही करने वालों के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।
जिरीबाम में हमार, पाइते, मैतेई और मैतेई पंगल समुदायों के बीच शांति संवाद आयोजित।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 12 अगस्त 2026 को राज्य के पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों के निवासियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अवैध हथियार रखने वाले 15 दिनों के भीतर उन्हें संबंधित विधायक या जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) के माध्यम से जमा करें, अन्यथा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घोषणा इंफाल स्थित प्रथम बटालियन मणिपुर राइफल्स परेड ग्राउंड में बरामद हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों के प्रदर्शन कार्यक्रम के दौरान की गई।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 मई 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राज्य के विकास पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि 4 फरवरी 2026 को नई सरकार के गठन के बाद से विभिन्न जिलों में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए कई पहल की गई हैं। राष्ट्रपति शासन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को स्थिर किया गया था।

कार्यक्रम में प्रदर्शित हथियार और गोला-बारूद 5 फरवरी 2026 से अब तक सुरक्षा बलों द्वारा बरामद किए गए हैं। इस अवधि में 1,422 से अधिक हथियार, 7,000 से अधिक कारतूस और 1,137 विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

हथियार लूट का पैमाना और बरामदगी की स्थिति

सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, 3 मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान पुलिस थानों, चौकियों और सुरक्षा बलों के शस्त्रागारों से 6,000 से अधिक अत्याधुनिक हथियार और लाखों कारतूस लूट लिए गए थे। मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने बताया कि लूटे गए हथियारों में से लगभग 70 प्रतिशत अब तक बरामद किए जा चुके हैं।

गौरतलब है कि हथियार वापसी का यह अभियान पहली बार 31 मई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की अपील के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की नई अपील के बाद स्वैच्छिक समर्पण अभियान और तेज हो गया। डीजीपी के अनुसार, संयुक्त अभियान में 491 उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया और चेतावनी

राज्य के गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास सिंह ने कार्यक्रम में चेतावनी दी कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जबरन वसूली, धमकी और परिवहनकर्ताओं को परेशान करने वाले किसी भी संगठन या व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। यह संकेत देता है कि सरकार केवल हथियार समर्पण तक सीमित नहीं, बल्कि राजमार्गों पर उग्रवाद-जनित आर्थिक अपराध पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री ने डीजीपी मुकेश सिंह, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिरीक्षक, असम राइफल्स (दक्षिण) के महानिरीक्षक और CRPF के महानिरीक्षक के नेतृत्व वाली टीमों की सराहना की।

सामुदायिक संवाद और शांति प्रयास

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिरीबाम जिले के दौरे के दौरान उन्होंने हमार, पाइते, मैतेई और मैतेई पंगल समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों ने साथ बैठकर भोजन किया, जिससे आपसी विश्वास बढ़ा और शांति के लिए मिलकर काम करने पर सहमति बनी। सरकार उन इलाकों का भी दौरा कर रही है जहाँ संकट के कारण पहले जाना संभव नहीं था।

कार्यक्रम में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रकाशित 'मणिपुर मार्चेस टू पीस' नामक पुस्तक वितरित की गई और सरकारी प्रयासों पर एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो, कला एवं संस्कृति मंत्री खुरैजम लोकेन सिंह, विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

आगे क्या होगा

15 दिन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद राज्य सरकार उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का इरादा रखती है जो अवैध हथियार नहीं सौंपते। मणिपुर पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान को भी और मजबूत किया है, ताकि युवाओं को मादक पदार्थों के खतरे से बचाया जा सके। यह 15 दिन की अवधि मणिपुर में शांति बहाली की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब मणिपुर सरकार ने ऐसी समय-सीमा तय की हो — मई 2023 में भी ऐसी अपील हुई थी, और राज्यपाल की अपील के बाद भी। तब भी 30% हथियार अब तक नहीं मिले हैं। असली सवाल यह है कि क्या इस बार समर्पण न करने वालों के खिलाफ वास्तव में कार्रवाई होगी, या यह एक और घोषणा बनकर रह जाएगी। NSA का उल्लेख राजनीतिक इच्छाशक्ति का संकेत देता है, लेकिन मणिपुर की जटिल जातीय राजनीति में कानूनी कार्रवाई की सीमाएँ भी उतनी ही वास्तविक हैं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में अवैध हथियार जमा करने की 15 दिन की समय-सीमा क्या है?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 12 अगस्त 2026 को घोषणा की कि पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों के लोग 15 दिनों के भीतर अपने अवैध हथियार संबंधित विधायक या जिला एसपी के माध्यम से जमा करें। समय-सीमा न मानने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान कितने हथियार लूटे गए थे?
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार 3 मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान पुलिस थानों और सुरक्षा बलों के शस्त्रागारों से 6,000 से अधिक अत्याधुनिक हथियार और लाखों कारतूस लूटे गए थे। डीजीपी मुकेश सिंह के अनुसार अब तक लगभग 70% हथियार बरामद किए जा चुके हैं।
फरवरी 2026 से मणिपुर में कितने हथियार बरामद हुए हैं?
5 फरवरी 2026 से अगस्त 2026 के बीच संयुक्त सुरक्षा अभियान में 1,422 से अधिक हथियार, 7,000 से अधिक कारतूस और 1,137 विस्फोटक बरामद किए गए हैं। इसके अलावा विभिन्न संगठनों के 491 उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर उगाही के खिलाफ मणिपुर सरकार क्या कदम उठा रही है?
गृह मंत्री कोंथौजाम गोविंदास सिंह ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जबरन वसूली और परिवहनकर्ताओं को परेशान करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
मणिपुर में शांति बहाली के लिए नई सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
4 फरवरी 2026 को नई सरकार के गठन के बाद से कई शांति पहल शुरू की गई हैं, जिनमें जिरीबाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सामुदायिक संवाद शामिल है। हमार, पाइते, मैतेई और मैतेई पंगल समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की गई हैं और 'मणिपुर मार्चेस टू पीस' पुस्तक भी प्रकाशित की गई है।
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