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मणिपुर में लूटे गए 70% हथियार बरामद: डीजीपी मुकेश सिंह की चेतावनी, अवैध रखने वालों पर सख्त कार्रवाई

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मणिपुर में लूटे गए 70% हथियार बरामद: डीजीपी मुकेश सिंह की चेतावनी, अवैध रखने वालों पर सख्त कार्रवाई

सारांश

मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान लूटे गए हथियारों में से 70% बरामद हो चुके हैं — यह डीजीपी मुकेश सिंह का दावा है। शेष हथियारों की तलाश जारी है और अवैध रखने वालों को गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की अपील के बाद अभियान को नई गति मिली है।

मुख्य बातें

मणिपुर डीजीपी मुकेश सिंह ने 14 जून 2026 को बताया कि जातीय हिंसा में लूटे गए 70% हथियार बरामद कर लिए गए हैं।
शेष हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी के लिए अभियान तेज किया गया है।
अवैध हथियार रखने वालों को गिरफ्तारी की चेतावनी; ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमले के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान।
हथियार बरामदगी अभियान 31 मई 2023 से चल रहा है; राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की अपील के बाद इसे और गति मिली।
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के विरुद्ध सक्रिय कार्रवाई कर रहा है।

मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने 14 जून 2026 को इंफाल में पत्रकारों को बताया कि जातीय हिंसा के दौरान लूटे गए हथियारों में से लगभग 70 प्रतिशत अब तक बरामद कर लिए गए हैं। शेष हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी के लिए अभियान और तेज कर दिया गया है, तथा अवैध रूप से हथियार रखने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

डीजीपी मुकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि जो लोग गैर-कानूनी तरीके से हथियार और गोला-बारूद रखे हुए हैं और कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ बिना किसी ढील के कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, 'पुलिस और अन्य सुरक्षा बल उन लोगों से बहुत सख्ती से निपटेंगे जो अभी भी गैर-कानूनी तरीके से हथियार और गोला-बारूद रखे हुए हैं। हम कानून के मुताबिक उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे और उन्हें हर हाल में गिरफ्तार किया जाएगा।'

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जो कोई भी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों या अन्य सुरक्षा बलों पर गोली चलाने या हमला करने का प्रयास करेगा, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

तलाशी अभियान और सुरक्षा इंतजाम

डीजीपी ने बताया कि जब तक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते, तब तक मणिपुर के अलग-अलग जिलों में तलाशी अभियान जारी रहेगा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम बनाए रखे जाएंगे। मणिपुर पुलिस सभी संबंधित लोगों से लगातार अपील कर रही है कि लूटे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक तुरंत पुलिस या नजदीकी सुरक्षा बल के ठिकानों पर सरेंडर कर दिए जाएं।

सोशल मीडिया पर अफवाहों के खिलाफ कार्रवाई

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मुकेश सिंह ने सोशल मीडिया पर फैल रही गलत और भ्रामक सामग्री पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल की ओर से गलत और दुर्भावनापूर्ण जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हम ऐसे मामलों पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और असामाजिक या राष्ट्र-विरोधी साइटों और प्लेटफॉर्म को बंद करवा रहे हैं।' उन्होंने आम जनता से अफवाहें न फैलाने की अपील की।

अभियान की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि लूटे गए हथियारों की बरामदगी का अभियान 31 मई 2023 को शुरू हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सभी संबंधित लोगों से हथियार सरेंडर करने की अपील की थी। इस अभियान को तब और गति मिली जब मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने एक नई अपील जारी कर अवैध रूप से रखे गए हथियारों और गोला-बारूद को स्वेच्छा से सरेंडर करने का आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में जातीय तनाव के बाद सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

डीजीपी ने विभिन्न कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया और जनता की सेवा में निष्पक्षता, तटस्थता तथा व्यावसायिकता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हथियारों की बरामदगी की यह दर संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में एक सकारात्मक संकेत है, हालांकि शेष 30 प्रतिशत हथियारों का पता लगाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि शेष 30 प्रतिशत हथियार कहाँ हैं और किसके पास हैं। तीन वर्षों से अधिक समय बाद भी इतनी बड़ी संख्या में हथियार लापता होना राज्य में स्थायी शांति की राह में एक गंभीर बाधा है। राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री की अपीलों के बावजूद स्वैच्छिक सरेंडर की गति धीमी रही है, जो बताती है कि विश्वास की खाई अभी पाटी नहीं गई। बिना सामुदायिक विश्वास बहाली के केवल तलाशी अभियान से दीर्घकालिक निरस्त्रीकरण संभव नहीं होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में लूटे गए कितने हथियार बरामद हुए हैं?
डीजीपी मुकेश सिंह के अनुसार, जातीय हिंसा के दौरान लूटे गए हथियारों में से लगभग 70 प्रतिशत अब तक बरामद कर लिए गए हैं। शेष 30 प्रतिशत हथियारों की तलाश के लिए अभियान जारी है।
मणिपुर में हथियार बरामदगी अभियान कब शुरू हुआ?
यह अभियान 31 मई 2023 को शुरू हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सभी संबंधित लोगों से हथियार सरेंडर करने की अपील की थी। बाद में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला की अपील के बाद इसे और गति मिली।
अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
डीजीपी मुकेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने वालों को हर हाल में गिरफ्तार किया जाएगा और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।
मणिपुर पुलिस सोशल मीडिया अफवाहों से कैसे निपट रही है?
मणिपुर पुलिस का सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल गलत और दुर्भावनापूर्ण सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सक्रिय रूप से कार्रवाई कर रहा है। असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी साइटों व प्लेटफॉर्म को बंद करवाया जा रहा है।
मणिपुर में हथियार सरेंडर कहाँ किए जा सकते हैं?
मणिपुर पुलिस की अपील है कि लूटे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या सुरक्षा बल के ठिकाने पर सरेंडर कर दिए जाएं। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने भी स्वैच्छिक सरेंडर की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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