मणिपुर हिंसा: एनआईए ने 7 जिलों में छापे मारकर 10 आरोपी दबोचे, हथियार लूट-बैंक डकैती के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार, 19 जून को मणिपुर में जातीय हिंसा से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह संयुक्त अभियान मणिपुर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के साथ मिलकर चलाया गया। एनआईए के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी राज्य में हुई कई हिंसक घटनाओं में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
एनआईए ने इम्फाल पूर्व, इम्फाल पश्चिम, बिष्णुपुर, चुराचांदपुर, उखरूल, चंदेल और फेरजावल — कुल 7 जिलों में एक साथ कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर इन गिरफ्तारियों को अंजाम दिया गया।
एजेंसी के अनुसार, आरोपियों पर सुरक्षा बलों पर हमले, हथियारों और गोला-बारूद की लूट तथा बैंक डकैती जैसी गंभीर वारदातों में संलिप्तता के आरोप हैं। यह अभियान विस्तृत खुफिया सूचना, तकनीकी विश्लेषण और जमीनी जांच के संयोजन पर आधारित बताया गया है।
एनआईए की जांच का दायरा
जांच एजेंसी का मानना है कि इन गिरफ्तारियों से हिंसा की योजना, उसके क्रियान्वयन और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं। एनआईए विभिन्न हिंसक घटनाओं, आरोपियों और उग्रवादी संगठनों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी एक समुदाय को लक्षित नहीं है — जांच का दायरा उन सभी पर लागू होगा जो आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाए जाएंगे, चाहे वे किसी भी पृष्ठभूमि से हों।
हथियार बरामदगी पर डीजीपी का बयान
इस बीच, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने बताया कि जातीय हिंसा के दौरान लूटे गए हथियारों में से लगभग 70 प्रतिशत अब तक बरामद कर लिए गए हैं। शेष हथियारों और गोला-बारूद की तलाश के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
डीजीपी ने चेतावनी दी कि जो लोग अभी भी गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखे हुए हैं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें हर हाल में गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों या सुरक्षा बलों पर हमले की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
एनआईए ने पुष्टि की है कि मणिपुर हिंसा से जुड़े विभिन्न मामलों में जांच अभी जारी है और आगे भी आवश्यकतानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं — यह अभियान उसी सिलसिले में चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है।