31 अगस्त 2026
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गुजरात में गुटखा-पान मसाला प्रतिबंध 2027 तक बढ़ा, 13 सितंबर से होगा लागू

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गुजरात में गुटखा-पान मसाला प्रतिबंध 2027 तक बढ़ा, 13 सितंबर से होगा लागू

सारांश

गुजरात ने 2012 से चले आ रहे गुटखा-पान मसाला प्रतिबंध को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। 13 सितंबर 2026 से 12 सितंबर 2027 तक लागू यह आदेश टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के कैंसर शोध और GATS के आँकड़ों पर आधारित है, और अलग-अलग बिकने वाले घटकों पर भी लागू होगा।

मुख्य बातें

गुजरात के खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने 31 अगस्त 2026 को गुटखा-पान मसाला प्रतिबंध नवीनीकरण की अधिसूचना जारी की।
प्रतिबंध 13 सितंबर 2026 से 12 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहेगा।
गुजरात में यह प्रतिबंध 2012 से लागू है — एक दशक से अधिक की निरंतरता।
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और GATS के शोध के अनुसार भारत में 35% वयस्क तंबाकू सेवन करते हैं; गुटखा से मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
प्रतिबंध अलग-अलग बेचे जाने वाले उन घटकों पर भी लागू होगा जो मिलाकर प्रतिबंधित उत्पाद बनाते हैं।
उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

गुजरात सरकार ने तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर लगे प्रतिबंध को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा 31 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नया प्रतिबंध 13 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा और 12 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा। जन स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के अभ्यावेदनों को इस निर्णय का आधार बताया गया है।

प्रतिबंध का दायरा और इतिहास

गुजरात में यह प्रतिबंध 2012 से लागू है — यानी एक दशक से अधिक समय से राज्य इन उत्पादों पर रोक बनाए हुए है। अधिसूचना स्पष्ट करती है कि प्रतिबंध उन उत्पादों पर भी लागू होगा जो किसी भी नाम से बेचे जा रहे हों। गौरतलब है कि यह आदेश उन घटकों पर भी लागू होता है जो अलग-अलग बेचे जाते हैं, लेकिन जिनका उपयोग तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा या पान मसाला बनाने के लिए किया जा सकता है — ताकि प्रतिबंध की 'लूपहोल' का फायदा न उठाया जा सके।

वैज्ञानिक आधार: शोध क्या कहता है

अधिसूचना में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और संस्था 'हैमर' द्वारा किए गए शोध का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार गुटखा और पान मसाला का सेवन कैंसरकारी है और इससे मुंह के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS) के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार भारत में 35 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि 21 प्रतिशत लोग धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं।

प्रवर्तन और कानूनी कार्रवाई

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन एजेंसियों को अधिसूचना के दायरे में आने वाले उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री के विरुद्ध कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धुआं रहित तंबाकू उत्पादों पर नियामकीय कसावट बढ़ रही है।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार ने कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा की आवश्यकता और गैर-सरकारी संगठनों के अभ्यावेदनों के मद्देनजर प्रतिबंध को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। यह नवीनीकृत आदेश गुजरात में 2012 से चली आ रही उस नीति की निरंतरता है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। आगे भी इस प्रकार की समीक्षा और नवीनीकरण की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल प्रतिबंध की घोषणा पर्याप्त है या ज़मीनी प्रवर्तन भी उतना ही मज़बूत है। एक दशक से अधिक समय बाद भी यदि प्रतिबंध को हर साल नवीनीकृत करना पड़ रहा है, तो यह स्थायी विधायी समाधान की अनुपस्थिति को रेखांकित करता है। GATS के अनुसार भारत में 21% वयस्क अभी भी धुआं रहित तंबाकू का उपयोग करते हैं — यह आँकड़ा बताता है कि केवल प्रतिबंध से माँग नहीं घटती, जागरूकता और वैकल्पिक आजीविका नीतियाँ भी ज़रूरी हैं।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध कब से कब तक लागू है?
नवीनीकृत प्रतिबंध 13 सितंबर 2026 से 12 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा। गुजरात में यह प्रतिबंध मूल रूप से 2012 से चला आ रहा है और हर वर्ष नवीनीकृत किया जाता है।
गुजरात में गुटखा प्रतिबंध का आधार क्या है?
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और 'हैमर' के शोध के अनुसार गुटखा-पान मसाला कैंसरकारी है और मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ाता है। इसके अलावा GATS के आँकड़े भी अधिसूचना में उद्धृत किए गए हैं।
क्या अलग-अलग बेचे जाने वाले तंबाकू घटकों पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा?
हाँ, अधिसूचना स्पष्ट करती है कि वे सामग्रियाँ जो अलग से बेची जाती हैं लेकिन जिनका उपयोग तंबाकू या निकोटीन युक्त गुटखा या पान मसाला बनाने के लिए होता है, वे भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगी।
प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन एजेंसियों को निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री — सभी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
भारत में धुआं रहित तंबाकू की स्थिति क्या है?
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS) के अनुसार भारत में 35% वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें से 21% धुआं रहित तंबाकू उपयोग करते हैं। यह आँकड़ा गुजरात जैसे राज्यों द्वारा प्रतिबंध जारी रखने की नीति का प्रमुख आधार है।
राष्ट्र प्रेस
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