कर्नाटक गुटखा बैन वापसी: CM शिवकुमार ने दिए आदेश, सुपारी किसानों की चिंता बनी वजह
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए गुटखा प्रतिबंध को वापस लिए जाने की संभावना प्रबल हो गई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 14 अगस्त 2026 को अधिकारियों को यह प्रतिबंध-आदेश निरस्त करने का निर्देश दिया है। सर्वदलीय विधायकों के तीखे विरोध और राज्य के सात से आठ जिलों में सुपारी की खेती पर निर्भर किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभाव को इस फैसले की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
कैबिनेट बैठक में उठा विवाद
रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह मुद्दा तब सामने आया जब मुख्यमंत्री शिवकुमार को पता चला कि उनकी जानकारी के बिना यह अहम आदेश जारी कर दिया गया था। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सचिव से कड़ी नाराजगी जताई और सवाल किया कि इतने संवेदनशील मामले में आदेश जारी करने से पहले उनसे परामर्श क्यों नहीं लिया गया। यह घटनाक्रम राज्य प्रशासन में समन्वय की कमी को उजागर करता है।
किसानों की आजीविका पर संकट
शिवकुमार ने स्वयं स्वीकार किया कि कर्नाटक के सात से आठ जिलों के किसान सुपारी की खेती पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों दलों के विधायक मुख्यमंत्री से मिले और चेताया कि गुटखा बैन का सीधा असर सुपारी उत्पादकों की आय पर पड़ेगा। गौरतलब है कि सुपारी की फसल तैयार होने में पाँच वर्ष तक का समय लगता है, जिसमें किसान लगातार निवेश करते रहते हैं।
विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री और BJP सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा कि सरकार को जन-स्वास्थ्य और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाना होगा। उन्होंने कहा, 'स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए, लेकिन सुपारी उगाने वालों के हितों की भी रक्षा होनी चाहिए।' बोम्मई ने आगाह किया कि एकतरफा निर्णय से उन किसानों पर गंभीर असर पड़ सकता है जिन्होंने इस फसल में भारी पूँजी लगाई है और माँग की कि यदि प्रतिबंध लागू होता है, तो सरकार किसानों को उचित मुआवजा दे।
जनता दल (सेक्युलर) — JD(S) के विधायक ए. मंजू ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मलनाड क्षेत्र में अनगिनत परिवार सुपारी की खेती पर निर्भर हैं और किसी भी प्रतिकूल फैसले का कड़ा विरोध होगा। उन्होंने घोषणा की कि विधायक किसानों के किसी भी आंदोलन में उनके साथ खड़े रहेंगे।
उपभोक्ताओं में भ्रम, बाज़ार में भगदड़
प्रतिबंध की घोषणा होते ही उपभोक्ताओं में अफरातफरी मच गई। गुटखा के आदी लोग बड़ी मात्रा में इसे खरीदते और जमा करते देखे गए; कुछ लोग तो बोरियों में गुटखा ले जाते और दुकानों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखे। यह स्थिति दर्शाती है कि अचानक और बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किए गए प्रतिबंध किस तरह बाज़ार में अव्यवस्था पैदा कर सकते हैं।
आगे क्या होगा
सूत्रों के अनुसार, सरकार एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय लेगी। इस विवाद ने राज्य में तंबाकू और गुटखा उत्पादों के प्रति सरकार की नीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित और कृषि-अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बीच कर्नाटक सरकार किस राह को चुनती है।