गुटखा प्रतिबंध से सुपारी किसानों को खतरा: कर्नाटक BJP अध्यक्ष विजयेंद्र का कांग्रेस सरकार पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने 14 अगस्त को बेंगलुरु में आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार गुटखा पर प्रतिबंध लगाकर सुपारी उत्पादकों और किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार कर रही है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पूरे कर्नाटक में किसानों के बीच भय और अनिश्चितता का वातावरण बन गया है।
सुपारी खेती का राष्ट्रीय महत्व
विधानसौधा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विजयेंद्र ने बताया कि देश में कुल 9.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है, जिसमें से 6.76 लाख हेक्टेयर अकेले कर्नाटक में है — यानी देश की कुल सुपारी खेती का करीब 76 प्रतिशत हिस्सा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के तटीय और मलनाड क्षेत्रों में हजारों किसान परिवार इसी फसल पर निर्भर हैं।
विजयेंद्र ने कहा, 'इतनी जानकारी होने के बावजूद सरकार गुटखा प्रतिबंध की घोषणा कर भ्रम फैला रही है। इससे सुपारी उत्पादकों में डर का माहौल बन रहा है। सुपारी उत्पादकों को आशंका है कि कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री उनके हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।'
किसान संगठनों की मुख्यमंत्री से मुलाकात की तैयारी
विजयेंद्र ने बताया कि सेंट्रल अरेका नट एंड कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग को-ऑपरेटिव लिमिटेड और अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिलने का कार्यक्रम बना रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने सोमवार या मंगलवार को बैठक तय करने का अनुरोध किया है। हम मुख्यमंत्री से मिलकर आग्रह करेंगे कि सुपारी उत्पादकों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई निर्णय न लिया जाए।'
भाजपा विधायक का आंकड़ों से वार
पूर्व गृह मंत्री और भाजपा विधायक अरगा ज्ञानेंद्र ने कहा कि राज्य के करीब 145 तालुकों में सुपारी की खेती होती है और 10 लाख से अधिक किसान परिवार इस फसल पर निर्भर हैं। उन्होंने बताया कि गुटखा और पान मसाला पर प्रस्तावित प्रतिबंध की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही सुपारी की कीमतों में गिरावट आने लगी है। ज्ञानेंद्र ने कहा, 'सुपारी उत्पादकों की रक्षा करना कर्नाटक सरकार की जिम्मेदारी है।'
सरकार के भीतर भी उठे सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार स्वयं गुटखा प्रतिबंध के आदेश को लागू होने के कुछ ही दिनों बाद वापस लेने पर विचार कर रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों ने इसका विरोध किया है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को यह आदेश वापस लेने के निर्देश दे दिए हैं।
गौरतलब है कि गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि इतना महत्वपूर्ण आदेश उनकी जानकारी के बिना कैसे जारी कर दिया गया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सचिव से इस फैसले पर जवाब मांगा और पूछा कि आदेश जारी करने से पहले उनसे चर्चा क्यों नहीं की गई।
आगे क्या होगा
सुपारी उत्पादकों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल सोमवार या मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार से मिलने की तैयारी में है। यदि सरकार प्रतिबंध वापस लेती है, तो यह कर्नाटक में कृषि हितों के आगे नीतिगत फैसलों के पलटने का एक और उदाहरण होगा।