बिदादी किसान भूमि विवाद: BJP-JD(S) संयुक्त मोर्चा, विजयेंद्र बोले — कोई समझौता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार, 10 अगस्त को बेंगलुरु में स्पष्ट किया कि बिदादी के किसानों की भूमि की सुरक्षा के मुद्दे पर पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि BJP बिदादी पदयात्रा को सांकेतिक समर्थन देगी और विधानसभा में भी किसानों के हक की आवाज़ बुलंद रखेगी।
मुख्य घटनाक्रम
पत्रकारों से बात करते हुए विजयेंद्र ने कहा, 'जब कभी भी जमीनों की सुरक्षा और बिदादी के किसानों के हितों की बात आएगी, तो हमारी पार्टी में किसी भी प्रकार की दुविधा नहीं होगी।' उन्होंने जोड़ा कि BJP और जनता दल (सेक्युलर) — JD(S) दोनों मिलकर किसानों के हितों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
विजयेंद्र ने बताया कि पिछले सप्ताह उनकी पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें BJP-JD(S) की संभावित संयुक्त पदयात्रा पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, कुमारस्वामी ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।
BJP का रुख और पदयात्रा पर स्थिति
विजयेंद्र ने 'बिदादी पदयात्रा' को लेकर BJP की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जब से JD(S) ने पदयात्रा की तारीखों का ऐलान किया, तब से पार्टी ने इसे प्रतीकात्मक समर्थन देने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पदयात्रा में उनकी व्यक्तिगत अनुपस्थिति का कोई राजनीतिक कारण नहीं है।
उनके अनुसार, चिक्कबल्लापुर और कोलार विधान परिषद चुनाव से जुड़े कार्यक्रम कई बार स्थगित हो चुके थे और स्थानीय नेताओं के आग्रह पर रविवार को उन्हें वहाँ उपस्थित रहना आवश्यक था। इसी कारण वे पदयात्रा में शामिल नहीं हो सके।
नेताओं की भागीदारी
विजयेंद्र ने बताया कि विपक्ष के नेता आर. अशोक सहित BJP के कई वरिष्ठ नेताओं ने बिदादी पदयात्रा में हिस्सा लिया और पार्टी का प्रतीकात्मक समर्थन व्यक्त किया। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर विपक्ष भूमि अधिग्रहण नीतियों को लेकर लगातार दबाव बना रहा है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि बिदादी किसान भूमि विवाद अब BJP और JD(S) के लिए एक साझा राजनीतिक मंच बनता जा रहा है। विजयेंद्र ने संकेत दिया कि किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा सत्र में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि दोनों दलों की यह एकजुटता आने वाले चुनावों में किस रूप में आकार लेती है।