4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक के 28 से अधिक जिले सूखे की चपेट में, भाजपा ने माँगा ₹10,000 करोड़ का राहत पैकेज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक के 28 से अधिक जिले सूखे की चपेट में, भाजपा ने माँगा ₹10,000 करोड़ का राहत पैकेज

सारांश

कर्नाटक के 28 से अधिक जिले गंभीर सूखे की चपेट में हैं — फसलें बर्बाद, जलाशय खाली, बिजली अनियमित। भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र ने तुमकुरु दौरे के बाद कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए ₹10,000 करोड़ के तत्काल राहत पैकेज की माँग की।

मुख्य बातें

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने 4 अगस्त को तुमकुरु के सूखाग्रस्त गाँवों का दौरा किया।
राज्य के 28 से अधिक जिले कम बारिश के कारण गंभीर सूखे की चपेट में हैं।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार से ₹10,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज तत्काल जारी करने की माँग की।
तुमकुरु के प्रत्येक तालुक को फसल बीमा प्रीमियम के लिए ₹50 लाख और पेयजल के लिए ₹2 करोड़ अतिरिक्त देने की माँग।
किसानों को प्रतिदिन लगातार 7 घंटे थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील।
भाजपा ने सूखे की ज़मीनी स्थिति जाँचने के लिए 7 अध्ययन दल गठित किए।

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार, 4 अगस्त को तुमकुरु जिले के सूखाग्रस्त गाँवों का दौरा करने के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार से माँग की कि वह किसानों को तत्काल राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ का विशेष पैकेज जारी करे। उन्होंने कहा कि 28 से अधिक जिले गंभीर सूखे की चपेट में हैं और केंद्र से वित्तीय सहायता का इंतज़ार करना किसानों के साथ अन्याय होगा।

मुख्य घटनाक्रम

विजयेंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कम बारिश के कारण नारियल, रागी, फल और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में बुवाई शुरू नहीं हो पाई है, जबकि पहले बोई गई फसलें अंकुरित नहीं हो सकीं। उन्होंने सरकार से तुमकुरु जिले के सभी 10 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की अपील की।

भाजपा नेता ने यह भी माँग की कि राज्य सरकार फसल बीमा प्रीमियम का किसानों का हिस्सा स्वयं वहन करे और तुमकुरु के प्रत्येक तालुक को बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए कम से कम ₹50 लाख आवंटित किए जाएँ।

पानी और बिजली की गंभीर स्थिति

विजयेंद्र ने हेमावती समेत बड़े जलाशयों में पानी के स्तर में भारी गिरावट पर चिंता जताई। उनके अनुसार झीलें और तालाब सूख रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोगों और मवेशियों दोनों के लिए पेयजल संकट गहरा गया है। उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पहले से घोषित ₹1 करोड़ की राशि को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक तालुक को अतिरिक्त ₹2 करोड़ देने की माँग रखी।

बोरवेल पर निर्भर किसानों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बिजली की अनियमित आपूर्ति उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है। उन्होंने माँग की कि सरकार नारियल, सुपारी और अन्य बागवानी फसलों को बचाने के लिए किसानों को प्रतिदिन लगातार 7 घंटे थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे।

भाजपा की ज़मीनी पड़ताल

विजयेंद्र ने बताया कि भाजपा ने पूरे कर्नाटक में सूखे की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए सात अध्ययन दल गठित किए हैं। ये दल अलग-अलग जिलों का दौरा कर किसानों से सीधी बात कर रहे हैं और फसलों की दशा का आकलन कर रहे हैं, ताकि सूखे की गंभीरता को सरकार के सामने प्रमाणिक रूप से रखा जा सके।

कांग्रेस पर आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार राजनीतिक उठापटक में उलझी हुई है और किसानों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा, 'किसानों की जिंदगी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। राजनीति को किनारे रखकर उनकी सुरक्षा के लिए तुरंत राहत उपाय किए जाने चाहिए।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र से सहायता माँगने की प्रक्रिया समानांतर चल सकती है, लेकिन राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने संसाधनों से किसानों को तत्काल राहत दे।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मानसून की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और कृषि संकट गहराता जा रहा है। गौरतलब है कि सूखा और बाढ़ राज्य के लिए बार-बार आने वाली चुनौतियाँ हैं। भाजपा की अध्ययन दलों की रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष का दबाव और बढ़ने की संभावना है, और राज्य सरकार को राहत पैकेज पर जल्द निर्णय लेना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की माँग राजनीतिक रूप से तीखी है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कर्नाटक सरकार के पास राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) से इतनी बड़ी राशि तत्काल जारी करने की वित्तीय क्षमता है। गौरतलब है कि केंद्र-राज्य के बीच NDRF हस्तांतरण में अक्सर महीनों की देरी होती है, और इस बीच किसान कर्ज़ के बोझ तले दबते जाते हैं। भाजपा के सात अध्ययन दल ज़मीनी डेटा जुटा रहे हैं — यह विपक्ष की जवाबदेही की दृष्टि से सराहनीय कदम है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि पिछले सूखे में भाजपा सरकार का राहत वितरण कितना प्रभावी था। दोनों दलों के लिए किसान संकट एक राजनीतिक अवसर बन गया है — पीड़ित किसान इस खींचतान में फँसा है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सूखे की मौजूदा स्थिति कितनी गंभीर है?
कर्नाटक के 28 से अधिक जिले कम बारिश के कारण गंभीर सूखे की चपेट में हैं। नारियल, रागी, फल और सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, कई इलाकों में बुवाई तक नहीं हो पाई है और हेमावती समेत बड़े जलाशयों का जलस्तर काफी नीचे आ गया है।
भाजपा ने ₹10,000 करोड़ के राहत पैकेज की माँग क्यों की?
भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र का कहना है कि केंद्र से वित्तीय सहायता मिलने में देरी हो सकती है, इसलिए राज्य सरकार को अपने संसाधनों से तत्काल ₹10,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करना चाहिए। उनके अनुसार किसानों की सुरक्षा राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
तुमकुरु जिले के किसानों के लिए भाजपा ने क्या विशेष माँगें रखी हैं?
विजयेंद्र ने माँग की है कि तुमकुरु के सभी 10 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए, प्रत्येक तालुक को फसल बीमा प्रीमियम के लिए ₹50 लाख और पेयजल व्यवस्था के लिए ₹2 करोड़ अतिरिक्त दिए जाएँ। साथ ही किसानों को प्रतिदिन लगातार 7 घंटे थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
भाजपा ने सूखे की स्थिति जाँचने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
भाजपा ने पूरे कर्नाटक में ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के लिए सात अध्ययन दल गठित किए हैं। ये दल अलग-अलग जिलों का दौरा कर किसानों से सीधी बात कर रहे हैं और फसलों की दशा का आकलन कर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
कर्नाटक में पेयजल संकट की स्थिति क्या है?
हेमावती समेत बड़े जलाशयों में पानी का स्तर काफी कम हो गया है और झीलें-तालाब सूख रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों और मवेशियों दोनों के लिए पेयजल की गंभीर कमी है। भाजपा ने प्रत्येक तालुक को पेयजल व्यवस्था के लिए ₹2 करोड़ अतिरिक्त देने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले