कर्नाटक के 28 से अधिक जिले सूखे की चपेट में, भाजपा ने माँगा ₹10,000 करोड़ का राहत पैकेज
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार, 4 अगस्त को तुमकुरु जिले के सूखाग्रस्त गाँवों का दौरा करने के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार से माँग की कि वह किसानों को तत्काल राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ का विशेष पैकेज जारी करे। उन्होंने कहा कि 28 से अधिक जिले गंभीर सूखे की चपेट में हैं और केंद्र से वित्तीय सहायता का इंतज़ार करना किसानों के साथ अन्याय होगा।
मुख्य घटनाक्रम
विजयेंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कम बारिश के कारण नारियल, रागी, फल और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में बुवाई शुरू नहीं हो पाई है, जबकि पहले बोई गई फसलें अंकुरित नहीं हो सकीं। उन्होंने सरकार से तुमकुरु जिले के सभी 10 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने की अपील की।
भाजपा नेता ने यह भी माँग की कि राज्य सरकार फसल बीमा प्रीमियम का किसानों का हिस्सा स्वयं वहन करे और तुमकुरु के प्रत्येक तालुक को बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए कम से कम ₹50 लाख आवंटित किए जाएँ।
पानी और बिजली की गंभीर स्थिति
विजयेंद्र ने हेमावती समेत बड़े जलाशयों में पानी के स्तर में भारी गिरावट पर चिंता जताई। उनके अनुसार झीलें और तालाब सूख रहे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोगों और मवेशियों दोनों के लिए पेयजल संकट गहरा गया है। उन्होंने हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पहले से घोषित ₹1 करोड़ की राशि को अपर्याप्त बताते हुए प्रत्येक तालुक को अतिरिक्त ₹2 करोड़ देने की माँग रखी।
बोरवेल पर निर्भर किसानों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बिजली की अनियमित आपूर्ति उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है। उन्होंने माँग की कि सरकार नारियल, सुपारी और अन्य बागवानी फसलों को बचाने के लिए किसानों को प्रतिदिन लगातार 7 घंटे थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे।
भाजपा की ज़मीनी पड़ताल
विजयेंद्र ने बताया कि भाजपा ने पूरे कर्नाटक में सूखे की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए सात अध्ययन दल गठित किए हैं। ये दल अलग-अलग जिलों का दौरा कर किसानों से सीधी बात कर रहे हैं और फसलों की दशा का आकलन कर रहे हैं, ताकि सूखे की गंभीरता को सरकार के सामने प्रमाणिक रूप से रखा जा सके।
कांग्रेस पर आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार राजनीतिक उठापटक में उलझी हुई है और किसानों की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रही है। उन्होंने कहा, 'किसानों की जिंदगी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। राजनीति को किनारे रखकर उनकी सुरक्षा के लिए तुरंत राहत उपाय किए जाने चाहिए।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र से सहायता माँगने की प्रक्रिया समानांतर चल सकती है, लेकिन राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने संसाधनों से किसानों को तत्काल राहत दे।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मानसून की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और कृषि संकट गहराता जा रहा है। गौरतलब है कि सूखा और बाढ़ राज्य के लिए बार-बार आने वाली चुनौतियाँ हैं। भाजपा की अध्ययन दलों की रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष का दबाव और बढ़ने की संभावना है, और राज्य सरकार को राहत पैकेज पर जल्द निर्णय लेना होगा।