कर्नाटक में कांग्रेस राज में 2,800 किसानों की आत्महत्या: भाजपा नेता आर. अशोक का गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार, 22 जुलाई को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के बाद से 2,800 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है। उन्होंने राज्य सरकार पर लगातार बिगड़ती सूखे की स्थिति से निपटने में पर्याप्त कदम न उठाने का सीधा आरोप लगाया।
मुख्य आरोप और माँगें
अशोक ने माँग की कि राज्य सरकार तत्काल प्रभाव से पूरे कर्नाटक में सूखा घोषित करे और प्रत्येक प्रभावित किसान को प्रति एकड़ ₹50,000 का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य अपने सबसे गंभीर कृषि संकटों में से एक से गुज़र रहा है और सरकार की निष्क्रियता इसे और विकट बना रही है।
सूखे की स्थिति और पलायन का संकट
विपक्ष के नेता ने बताया कि कल्याण कर्नाटक के कई ज़िलों में सूखे की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग पलायन करने पर मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भीषण संकट के बावजूद कांग्रेस के नेता, मंत्री और विधायक किसानों की मदद करने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों के लिए दिल्ली चले गए हैं। अशोक ने कहा, 'यह कर्नाटक का सूखा नहीं है — यह तो जनता और किसानों के माथे पर लिखी बदकिस्मती है।'
पूर्व भाजपा सरकार से तुलना
अशोक ने पिछली BJP सरकार के कार्यकाल से तुलना करते हुए दावा किया कि उस प्रशासन ने सूखे और बाढ़ दोनों के दौरान सक्रिय रूप से राहत उपाय लागू किए थे और प्रभावित किसानों को अधिक मुआवजा दिया था। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस सत्ता में आती है, वह किसानों के लिए 'अभिशाप' साबित होती है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार पर निशाना
BJP नेता ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री किसानों को फसल न उगाने की सलाह दे रहे हैं। अशोक ने तीखे लहजे में पूछा, 'अगर किसानों को फसल उगाने की अनुमति नहीं है, तो वे क्या करेंगे? किसानों के लिए सार्वभौमिक अवकाश क्यों नहीं घोषित कर दिया जाता?' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक में कावेरी का पानी किसानों को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जबकि वह तमिलनाडु में निर्बाध रूप से बह रहा है।
विकसित भारत योजना पर विवाद
अशोक ने कांग्रेस सरकार पर विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (VB-G Ram Ji) योजना के कार्यान्वयन को लेकर 'नाटक' करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने पहले इस केंद्रीय पहल का विरोध किया था और अब उस पर अपना अधिकार जताने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि कर्नाटक में किसान आत्महत्याओं का मुद्दा पिछले कई वर्षों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है और विपक्ष समय-समय पर इसे उठाता रहा है।