भोजशाला हाईकोर्ट फैसला: केशव प्रसाद मौर्य ने किया स्वागत, मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा

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भोजशाला हाईकोर्ट फैसला: केशव प्रसाद मौर्य ने किया स्वागत, मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार दिया — UP के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे ऐतिहासिक बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने फैसले को एकतरफा कहते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की। यह दशकों पुराना विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुँचने की कगार पर है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 16 मई को भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे संघर्ष का फल बताया।
इंदौर हाईकोर्ट के वकील विनय जोशी ने बताया कि हिंदू पक्ष ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है।
शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी और कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी ने फैसले को चुनौती देने की बात कही।
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने फैसले को 'बिना सोचे-समझे' दिया गया बताया और असहमति जताई।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले का खुलकर स्वागत किया है, जिसमें भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया गया है। मौर्य ने कहा कि यह निर्णय उन सभी लोगों की लंबी लड़ाई का परिणाम है जो वर्षों से इस मुद्दे पर संघर्षरत थे। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को एकतरफा बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है।

मुख्य घटनाक्रम

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 16 मई को भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया। इंदौर उच्च न्यायालय के वकील विनय जोशी ने बताया कि हिंदू पक्ष ने पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में एक कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि यदि मुस्लिम पक्ष अपील करे तो उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिले।

सरकार और हिंदू पक्ष की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस फैसले से हिंदुओं में खुशी की लहर है और जो लोग इस लड़ाई को लड़ते रहे, वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं, वे इस फैसले से निराश हैं। वकील विनय जोशी ने स्पष्ट किया कि हिंदू पक्ष हर कानूनी मोर्चे पर तैयार है।

मुस्लिम पक्ष की आपत्तियाँ

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि उच्च न्यायालय के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। उनके अनुसार, ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मौजूद हैं जो यह दर्शाते हैं कि राजा ने मस्जिद के लिए जमीन दान की थी। कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने फैसले को 'पूरी तरह एकतरफा' बताया और कहा कि हिंदू पक्ष का पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँचना यह संकेत देता है कि उन्हें भी फैसले पर पूरा भरोसा नहीं है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस फैसले से विनम्रतापूर्वक असहमति जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला बिना पर्याप्त विचार के सुनाया गया है और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया है।

आगे क्या होगा

मुस्लिम पक्ष के सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा के बाद यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में जाने की ओर अग्रसर है। हिंदू पक्ष ने कैविएट दाखिल कर अपनी तैयारी पहले ही सुनिश्चित कर ली है। गौरतलब है कि भोजशाला विवाद दशकों पुराना है और यह फैसला इस संवेदनशील मामले में एक नया अध्याय जोड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला क्या है?
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 16 मई को भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करते हुए हिंदू पक्ष के हक में फैसला सुनाया। यह फैसला दशकों पुराने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में आया है।
केशव प्रसाद मौर्य ने फैसले पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वे तहे दिल से इस फैसले का स्वागत करते हैं और जिन्होंने यह लड़ाई लड़ी, वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हिंदुओं में खुशी की लहर है।
मुस्लिम पक्ष इस फैसले को कहाँ चुनौती देगा?
मुस्लिम पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती देने की घोषणा की है। शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी और कमाल मौला वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अब्दुल समद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।
हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट क्यों दाखिल की?
इंदौर हाईकोर्ट के वकील विनय जोशी के अनुसार, कैविएट इसलिए दाखिल की गई ताकि यदि मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील करे, तो हिंदू पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिले। यह एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया है जो पूर्व-सूचना सुनिश्चित करती है।
भोजशाला विवाद क्या है?
भोजशाला धार-मध्य प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है जिसे हिंदू पक्ष देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में जानता है। यह विवाद दशकों से न्यायालयों और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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