त्रिपुरा में 193 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं होंगी लागू, CM माणिक साहा ने किया राज्य डेटा केंद्र का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार, 16 मई 2026 को घोषणा की कि राज्य की विभिन्न नदियों में कटाव रोकने के लिए 193 नई बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में बाढ़ प्रबंधन के लिए 42 बांधों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। यह घोषणा उन्होंने अगरतला में राज्य डेटा केंद्र के उद्घाटन समारोह के दौरान की।
राज्य डेटा केंद्र की स्थापना
यह डेटा केंद्र लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा अगरतला के बाहरी इलाके कुंजबन स्थित विश्वेश्वरैया परिसर में स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री साहा ने इसे राज्य के लिए एक मील का पत्थर बताया और कहा कि इस केंद्र से प्राप्त सटीक एवं वास्तविक समय की जानकारी बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारियों में उल्लेखनीय सुधार लाएगी।
यह केंद्र राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसकी शुरुआत 2016-17 में केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल के रूप में हुई थी। पहले चरण में इसके निर्माण पर ₹4.67 करोड़ खर्च किए गए हैं, जबकि दूसरे चरण में इसके आगे विकास के लिए ₹4.50 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए जाएंगे।
बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई में प्रगति
मुख्यमंत्री ने बताया कि डेटा केंद्र से प्राप्त आंकड़े न केवल बाढ़ नियंत्रण में, बल्कि राज्य की कृषि भूमि में सिंचाई व्यवस्था के विस्तार में भी सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक त्रिपुरा में कुल 1,23,754 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाया जा चुका है। गौरतलब है कि किसी राज्य की जीडीपी वृद्धि उसके कृषि उत्पादन से सीधे जुड़ी होती है, और सिंचाई विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रौद्योगिकी और शासन में सुधार
साहा ने कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक कार्यों में गति लाने के लिए त्रिस्तरीय ई-ऑफिस प्रणाली भी शुरू कर रही है। उन्होंने कहा कि शासन और विकास गतिविधियों में उन्नत प्रौद्योगिकी का एकीकरण सतत प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य बाढ़-प्रबंधन के लिए डेटा-संचालित प्रणालियों की ओर बढ़ रहे हैं।
आम जनता और किसानों पर असर
193 नई बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं के लागू होने से राज्य की नदियों के किनारे बसे गाँवों और कृषि भूमि को कटाव से सुरक्षा मिलेगी। सिंचाई के दायरे में 1,23,754 हेक्टेयर भूमि आने से किसानों को बेहतर फसल उत्पादन का अवसर मिलेगा। राज्य डेटा केंद्र की वास्तविक समय निगरानी क्षमता आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।
आगे की राह
दूसरे चरण में डेटा केंद्र के विकास के लिए ₹4.50 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी, जिससे जल संसाधन प्रबंधन प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी। 193 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत कार्ययोजना की घोषणा आने वाले समय में अपेक्षित है।