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सिंहस्थ महाकुंभ 2027: 31 अक्टूबर को दोपहर 12:02 बजे नासिक-त्र्यंबकेश्वर में एकसाथ ध्वजारोहण

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सिंहस्थ महाकुंभ 2027: 31 अक्टूबर को दोपहर 12:02 बजे नासिक-त्र्यंबकेश्वर में एकसाथ ध्वजारोहण

सारांश

31 अक्टूबर को दोपहर 12:02 बजे नासिक के रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड पर एकसाथ ध्वज फहराया जाएगा — यही सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ की घड़ी होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संभावित उपस्थिति इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व देती है।

मुख्य बातें

सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर निर्धारित।
नासिक के रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड पर एकसाथ ध्वजारोहण होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एक स्थान पर और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दूसरे स्थान पर उपस्थित रहेंगे।
बैठक की अध्यक्षता कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की; साधु-संत और अखाड़ों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग और आपातकालीन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

नासिक में 19 सितंबर 2026 को आयोजित एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक में यह तय किया गया कि सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक ध्वजारोहण कार्यक्रम 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एकसाथ संपन्न होगा। कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में साधु-संत, महंत, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हुए।

ध्वजारोहण के दो पवित्र स्थल

कुंभ मेला प्रशासन ने ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान निर्धारित किए हैं। नासिक में रामकुंड घाट पर और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड तथा त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से जुड़े क्षेत्र में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोनों स्थलों पर ठीक एक ही समय पर ध्वज फहराया जाएगा, जो सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा और एकता का प्रतीक होगा।

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की उपस्थिति की योजना

मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि एक स्थान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न होगा। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।

सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं की तैयारी

बैठक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, पार्किंग और आपातकालीन सेवाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। महाजन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएँ समयबद्ध रूप से पूरी की जाएँ और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखा जाए।

धार्मिक परंपराओं का पालन सुनिश्चित

कुंभ मेला मंत्री ने साधु-संतों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने तथा कार्यक्रम को धार्मिक परंपराओं के सर्वथा अनुरूप आयोजित करने पर विशेष बल दिया। गौरतलब है कि सिंहस्थ महाकुंभ में देशभर से लाखों तीर्थयात्री नासिक और त्र्यंबकेश्वर पहुँचते हैं, और यह आयोजन प्रतिष्ठित गोदावरी नदी के तट पर संपन्न होता है।

आगे की राह

बैठक में यह सर्वसम्मति से माना गया कि 31 अक्टूबर का ध्वजारोहण सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों में एक निर्णायक पड़ाव साबित होगा। दोनों स्थानों पर एकसाथ होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के साथ कुंभ की औपचारिक तैयारियों को गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े और यह पर्व पूरी भव्यता के साथ संपन्न हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस बार की तैयारी बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर जोर दिया जाना सकारात्मक संकेत है — लेकिन निर्देशों से ज़्यादा अहम होगा उनका ज़मीनी क्रियान्वयन।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंहस्थ महाकुंभ 2027 का ध्वजारोहण कब और कहाँ होगा?
सिंहस्थ महाकुंभ का ध्वजारोहण 31 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक के रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड पर एकसाथ आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक माना जाएगा।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में कौन-कौन से प्रमुख अतिथि उपस्थित रहेंगे?
योजना के अनुसार एक स्थान पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होगा, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उपस्थित रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे।
19 सितंबर को नासिक में आयोजित बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग और आपातकालीन व्यवस्था समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सिंहस्थ महाकुंभ नासिक और त्र्यंबकेश्वर में क्यों होता है?
सिंहस्थ महाकुंभ गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होने वाला विशाल हिंदू धार्मिक पर्व है। नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड पवित्र स्नान स्थलों के रूप में मान्य हैं, और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर इसे विशेष धार्मिक महत्व देता है।
श्रद्धालुओं के लिए ध्वजारोहण कार्यक्रम में क्या सुविधाएँ उपलब्ध होंगी?
प्रशासन ने दोनों स्थलों पर स्वच्छता, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। साधु-संतों और अखाड़ों के प्रतिनिधियों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने पर भी विशेष ज़ोर दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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