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भाजपा का राहुल गांधी पर पलटवार: 'छात्रों पर नहीं, छात्रों के लिए राजनीति करें'

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भाजपा का राहुल गांधी पर पलटवार: 'छात्रों पर नहीं, छात्रों के लिए राजनीति करें'

सारांश

भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के इंदौर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को 'तैयार नैरेटिव' करार दिया। GER में 23.7% से 30% की वृद्धि और 2024 के परीक्षा-विरोधी कानून का हवाला देते हुए पूछा — 'छात्रों पर राजनीति करना और छात्रों के लिए राजनीति करना — इनमें फर्क समझें।'

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान ने 19 सितंबर 2026 को राहुल गांधी के इंदौर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को राजनीतिक नैरेटिव बताते हुए आलोचना की।
सरकार के अनुसार उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 में 23.7% से बढ़कर 2023-24 में 30% हुआ।
पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत पात्र छात्रों को बिना गारंटी शिक्षा ऋण और ब्याज सहायता मिल रही है।
मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षा गड़बड़ी के विरुद्ध विशेष कानून बनाया, जिसे अब फास्ट-ट्रैक अदालतों और सख्त सजा के साथ और मजबूत किया गया है।
प्रधान ने राहुल गांधी से सीधे पूछा कि क्या वह छात्रों की चिंताओं को समाधान में बदलेंगे या राजनीतिक हथियार बनाते रहेंगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 19 सितंबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। प्रधान ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इंदौर के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों की वास्तविक समस्याओं को हल करने की बजाय 'सिस्टम बनाम छात्र' का पूर्वनिर्मित राजनीतिक नैरेटिव लेकर पहुँचे। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीतिक ड्रामे के नहीं, बल्कि ठोस जवाबों के हकदार हैं।

इंदौर कार्यक्रम पर BJP का आरोप

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इंदौर में एक माइक और तैयार नैरेटिव लेकर आए, जहाँ उन्होंने छात्रों की हर चुनौती को 'कब्जे में लिए गए सिस्टम' के प्रमाण के रूप में पेश किया। प्रधान ने कहा कि शिक्षा के जटिल इकोसिस्टम को महज राजनीतिक नारों तक सीमित करना न तो छात्रों के हित में है और न ही देश के। उनके अनुसार, 'छात्रों पर राजनीति करने और छात्रों के लिए राजनीति करने में यही बुनियादी फर्क है।'

सरकारी उपलब्धियों का हवाला

प्रधान ने कहा कि जहाँ विपक्ष के नेता अपना एजेंडा फैलाने में व्यस्त हैं, वहीं भारत में उच्च शिक्षा तक पहुँच लगातार बढ़ी है। उनके अनुसार, 2014-15 में सकल नामांकन अनुपात (GER) 23.7 प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा, पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत पात्र छात्रों को बिना गारंटी (कोलेटरल-फ्री) शिक्षा ऋण और ब्याज सहायता दी जा रही है, जबकि पीएम-यूएसएचए राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में बुनियादी ढाँचे और गुणवत्ता को मजबूत कर रही है।

प्रधान ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारतीय संस्थानों की QS वर्ल्ड रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और संस्थागत क्षमता भी बढ़ी है।

परीक्षा सुधार और भ्रष्टाचार विरोधी कानून

परीक्षा सुधारों के मोर्चे पर भाजपा नेता ने कहा कि सरकार कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं की ओर बढ़ रही है, ताकि पेपर-लीक जैसी खामियों को दूर किया जा सके। मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षा गड़बड़ी के विरुद्ध एक विशेष कानून बनाया, जिसे अब कड़ी सजा के प्रावधानों और फास्ट-ट्रैक अदालतों के साथ और मजबूत किया गया है। प्रधान ने कहा कि जो लोग छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, उन्हें कड़ी सजा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

राहुल गांधी पर सीधा सवाल

प्रधान ने विपक्ष के नेता से सीधे सवाल किया कि क्या राहुल गांधी अवसर, किफायती शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और पारदर्शिता बढ़ाने के समाधानों पर बात करेंगे, या हर छात्र की चिंता को राजनीतिक हथियार बनाते रहेंगे? उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों को यह बताने के लिए किसी नेता की जरूरत नहीं कि उन्हें गुस्सा होना चाहिए — उन्हें ऐसे संस्थान, अवसर और सरकार चाहिए जो उनके साथ खड़ी हो।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल लगातार राष्ट्रीय परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं में बेरोजगारी को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। गौरतलब है कि NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के बाद छात्रों का गुस्सा एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। BJP और कांग्रेस, दोनों दलों के बीच शिक्षा नीति और परीक्षा सुधारों पर नैरेटिव की जंग जारी है, और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राहुल गांधी का 'सिस्टम बनाम छात्र' नैरेटिव भावनात्मक रूप से प्रभावशाली जरूर है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह पूछना भूल जाती है कि कांग्रेस-शासित राज्यों में उच्च शिक्षा और परीक्षा पारदर्शिता का रिकॉर्ड क्या रहा है। छात्र राजनीति का यह नैरेटिव संग्राम तब तक बेनतीजा रहेगा जब तक दोनों पक्ष जवाबदेही को नारों से ऊपर नहीं रखते।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इंदौर के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में छात्रों की समस्याओं को हल करने की बजाय 'सिस्टम बनाम छात्र' का पूर्वनिर्मित राजनीतिक नैरेटिव लेकर पहुँचे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जटिल इकोसिस्टम को राजनीतिक नारों तक सीमित करना छात्रों के हित में नहीं है।
राहुल गांधी का इंदौर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम क्या था?
'छात्रों की गूंज' कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम था, जिसमें उन्होंने छात्रों की शैक्षणिक चुनौतियों और परीक्षा प्रणाली की खामियों पर चर्चा की। BJP के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाना था।
मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा में क्या सुधार किए हैं?
सरकार के अनुसार, सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 में 23.7% से बढ़कर 2023-24 में 30% हो गया है। पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत बिना गारंटी शिक्षा ऋण और ब्याज सहायता दी जा रही है, जबकि पीएम-यूएसएचए राज्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार कर रही है।
परीक्षा गड़बड़ी के विरुद्ध क्या कानून बना है?
मोदी सरकार ने 2024 में परीक्षा गड़बड़ी के विरुद्ध एक विशेष कानून बनाया। इसे अब कड़ी सजा के प्रावधानों और फास्ट-ट्रैक अदालतों के साथ और मजबूत किया गया है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को त्वरित और सख्त दंड मिल सके।
भाजपा और कांग्रेस के बीच शिक्षा पर यह विवाद क्यों मायने रखता है?
NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद छात्रों का गुस्सा एक संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। दोनों दल युवा मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए शिक्षा-सुधार के नैरेटिव पर नियंत्रण पाने की कोशिश में हैं, जिससे यह विवाद आने वाले चुनावी माहौल में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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