धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर साधा निशाना, अविश्वास प्रस्ताव को बताया संसद की मर्यादा का उल्लंघन
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस की राजनीति विकास में बाधा उत्पन्न कर रही है।
- लोकसभा अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव लाना संसद की गरिमा को प्रभावित करता है।
- कांग्रेस का व्यवहार लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कांग्रेस और उसके सहयोगियों की राजनीति केवल भारत की विकास यात्रा में रुकावट उत्पन्न करने और जनादेश का अपमान करने तक सीमित रह गई है।
विपक्ष द्वारा लोकसभा स्पीकर के खिलाफ उठाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकसभा अध्यक्ष का पद पूरे सदन की गरिमा और निष्पक्षता का प्रतीक होता है, लेकिन प्रमुखतः राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस इस संवैधानिक पद को निशाना बना रही है।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना और लगातार टिप्पणी करना असल में संसद की मर्यादा को चुनौती देने का प्रयास है। जो लोग लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं कर सकते, वे लोकतंत्र की रक्षा का दावा किस आधार पर कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सच्चाई यह है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा करना और उनके प्रति अविश्वास का माहौल तैयार करना कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक प्रवृत्ति रही है। संसद में पहले शोर मचाकर चर्चा की मांग करना और जब सरकार जवाब देती है तो हंगामा करना, यह दर्शाता है कि गंभीर विषयों पर तथ्य सुनने का साहस नहीं है।
भारत की प्रगति पर इन लोगों के पास कहने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए उन्होंने संसद को अपने राजनीतिक एजेंडे का अखाड़ा बना दिया है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों की राजनीति केवल भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने और जनादेश का अपमान करने तक सीमित रह गई है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जबसे राहुल गांधी विपक्ष के नेता बने हैं, उनके मन में शायद संसद चलाने की इच्छा ही नहीं है। वह एक असफल विपक्ष के नेता हैं। न उन्हें संविधान की समझ है, न चरित्र की और न ही संसदीय कार्यवाही की। उनके कार्य करने के तरीके से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पूरी तरह से दिशाहीन और विफल विपक्षी पार्टी बन चुकी है।