26 जून 2026
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कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान: 89 पेपर लीक, 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित — धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

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कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान: 89 पेपर लीक, 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित — धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

सारांश

कांग्रेस का 'छात्रों की गूंज' अभियान महज़ राजनीतिक विरोध नहीं — यह 89 पेपर लीक और 65 लाख प्रभावित उम्मीदवारों के आंकड़ों पर टिका एक सीधा सवाल है: जब राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता दांव पर हो, तो जवाबदेही कौन तय करेगा?

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 25 जून 2026 को अहमदाबाद से 'छात्रों की गूंज' राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की।
अभियान 40 दिनों तक 28 शहरों में चलेगा; फोकस NTA, पेपर लीक और भर्ती में देरी पर।
पार्टी के आंकड़ों के अनुसार एक दशक में 89 पेपर लीक मामले, कम से कम 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित।
48 परीक्षाएं दोबारा आयोजित करनी पड़ीं; 22 परीक्षाएं शुरू होने से पहले ही रद्द।
विधायक सतेज पाटिल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक की स्वतंत्र जांच की मांग की।
गुजरात के काहन पटेल को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने कथित तौर पर नीट विवाद के बाद आत्महत्या की थी।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 25 जून 2026 को अहमदाबाद से अपना राष्ट्रव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' शुरू किया, जिसमें पार्टी ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही अनियमितताओं के कारण लाखों छात्रों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों का भविष्य गहरे संकट में है। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में पेपर लीक के 89 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनसे कम से कम 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं।

अभियान का स्वरूप और उद्देश्य

यह अभियान 40 दिनों तक चलेगा और देश के 28 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कामकाज को लेकर छात्रों, युवा समूहों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को एक साझा मंच पर एकजुट करना है। गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब नीट-यूजी विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस के आरोप और मांगें

अहमदाबाद में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एवं विधायक सतेज पाटिल ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की और परीक्षा पेपर लीक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों तथा कथित राजनीतिक संबंधों की स्वतंत्र जांच की माँग रखी।

पाटिल ने कहा, 'छात्र कोई एहसान नहीं मांग रहे — वे केवल निष्पक्ष परीक्षा और तय समय सीमा के भीतर भर्ती की मांग कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीट-यूजी विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा बुरी तरह टूट गया है।

आंकड़ों की तस्वीर

अहमदाबाद शहर समन्वयक शेष नारायण ओझा ने पार्टी के आंकड़ों के हवाले से दावा किया कि पिछले एक दशक में 89 पेपर लीक मामलों के चलते कम से कम 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि लगभग 48 परीक्षाओं को दोबारा आयोजित करना पड़ा, जबकि 22 परीक्षाएं आयोजन से पहले ही रद्द कर दी गईं। ओझा ने कहा कि पेपर लीक अब छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक नियमित राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है।

काहन पटेल को श्रद्धांजलि और छात्र आत्महत्याओं का जिक्र

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने गुजरात के काहन पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर नीट परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद निराश होकर आत्महत्या कर ली थी। पार्टी नेताओं ने देश भर में परीक्षा संबंधी तनाव से जुड़ी अन्य छात्र आत्महत्याओं की खबरों का भी उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली की विफलताओं और छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को लेकर देशभर में चिंता बढ़ रही है।

आगे की राह

कांग्रेस के अनुसार, 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत आने वाले हफ्तों में देश के विभिन्न शहरों में छात्र संवाद, धरने और जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का दावा है कि जब तक NTA के कामकाज में पारदर्शिता नहीं आती और पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन NTA की साख को लेकर सवाल सिर्फ विपक्षी नहीं, सर्वोच्च न्यायालय भी उठा चुका है। असली मुद्दा यह है कि परीक्षा सुधार की बात हर घोटाले के बाद होती है, पर ढाँचागत बदलाव नहीं आता। 'छात्रों की गूंज' अभियान राजनीतिक रूप से समयानुकूल है, लेकिन इसकी असली कसौटी यह होगी कि क्या यह ठोस नीतिगत प्रस्ताव सामने लाता है — या केवल चुनावी मौसम तक सीमित रहता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'छात्रों की गूंज' अभियान क्या है?
यह कांग्रेस का 40 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान है, जिसे 25 जून 2026 को अहमदाबाद से शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पेपर लीक, NTA की कार्यप्रणाली और भर्ती में देरी के खिलाफ छात्रों और उम्मीदवारों को एकजुट करना है।
कांग्रेस के अनुसार पेपर लीक से कितने उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं?
पार्टी के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक दशक में 89 से अधिक पेपर लीक मामले सामने आए हैं, जिनसे कम से कम 65 लाख उम्मीदवार प्रभावित हुए। लगभग 48 परीक्षाएं दोबारा आयोजित करनी पड़ीं और 22 परीक्षाएं पहले ही रद्द कर दी गईं।
कांग्रेस ने किसके इस्तीफे की मांग की है?
कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। साथ ही पेपर लीक के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और कथित राजनीतिक संबंधों की स्वतंत्र जांच की माँग भी रखी गई है।
नीट-यूजी विवाद का इस अभियान से क्या संबंध है?
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद इस अभियान का केंद्रीय मुद्दा है। कांग्रेस ने गुजरात के काहन पटेल को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित तौर पर इस विवाद के बाद निराश होकर आत्महत्या की थी। पार्टी का कहना है कि इस विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षाओं पर छात्रों का भरोसा बुरी तरह टूट गया है।
यह अभियान कितने शहरों में और कब तक चलेगा?
अभियान 40 दिनों तक देश के 28 प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा। इसके तहत छात्र संवाद, धरने और जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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