बलूचिस्तान: BLF का दावा — ग्वादर हमलों में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए
सारांश
मुख्य बातें
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया है कि उसने 22 अक्टूबर 2026 से पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले में 'ऑपरेशन अलमास' के तहत चलाए गए हमलों में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मार गिराया। इन हमलों में फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के एक शिविर सहित कई सैन्य और पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
हमले का विवरण
BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच के अनुसार, अभियान की शुरुआत FWO शिविर के प्रवेश द्वार पर विस्फोटकों से भरे वाहन से किए गए आत्मघाती हमले से हुई। कथित तौर पर इस विस्फोट में मुख्य द्वार और निकटवर्ती संरचनाएँ ध्वस्त हो गईं, जिसके बाद संगठन के लड़ाके परिसर में घुसने में सफल रहे।
प्रवक्ता के दावे के मुताबिक, परिसर में दाखिल होने के बाद लड़ाकों ने इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के एक कार्यालय पर हमला किया, जिसमें एक अधिकारी और पाँच अन्य कर्मी मारे गए। एक अलग मुठभेड़ में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के छह कर्मी, जिनमें एक कैप्टन भी शामिल था, मारे गए बताए जाते हैं। इसके बाद लड़ाकों ने बहुमंजिला आवासीय बैरक को निशाना बनाया, जहाँ ग्वाहराम बलूच के अनुसार 21 और कर्मी मारे गए।
रात भर की मुठभेड़ और अतिरिक्त दावे
BLF प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी बलों ने परिसर पर पुनः नियंत्रण के लिए रातभर नौ और मुठभेड़ें कीं, जिनमें मोर्टार और तोपों का प्रयोग भी हुआ। अगली सुबह बख्तरबंद वाहनों के साथ शुरू किए गए सैन्य अभियान को भी नाकाम करने का दावा किया गया, जिसमें कथित तौर पर 13 और कर्मी मारे गए और दो बख्तरबंद वाहन नष्ट हुए।
संगठन ने यह भी दावा किया कि अभियान के दौरान उसके लड़ाकों ने चार क्वाडकॉप्टर और दो निगरानी ड्रोन मार गिराए। इसके अलावा, स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के जवानों सहित दर्जनों कर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने का भी दावा किया गया। संगठन की स्नाइपर टीम ने अभियान के दौरान छह और कर्मियों को मारने का दावा किया।
BLF का राजनीतिक रुख
ग्वाहराम बलूच ने दावा किया कि FWO और इसी तरह की संस्थाएँ पाकिस्तानी सेना के वाणिज्यिक और सैन्य विस्तार हैं, जिनका उपयोग बलूचिस्तान के संसाधनों के दोहन, जनसांख्यिकी परिवर्तन और विदेशी कंपनियों की सुरक्षा के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन का विरोध किसी विदेशी ताकत से नहीं, बल्कि बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के नियंत्रण और क्षेत्र के तटीय व प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन से है।
CPEC और विदेशी परियोजनाओं पर चेतावनी
BLF प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि संगठन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC), रेको डिक, सैंदक और बलूचिस्तान में चल रही अन्य परियोजनाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि बलूच जनता की सहमति के बिना शुरू की जाने वाली किसी भी परियोजना पर हमले का जोखिम बना रहेगा और ऐसी स्थिति में नुकसान की जिम्मेदारी संबंधित विदेशी संस्थानों की होगी।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में वर्षों से सशस्त्र विद्रोह जारी है और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले की यह घटनाएँ क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता की ओर इशारा करती हैं। पाकिस्तानी सरकार की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और 80 से अधिक कर्मियों के मारे जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।