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बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट का दावा: पाक सुरक्षाबलों पर कई हमले, 11 सैन्यकर्मी मारे गए

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बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट का दावा: पाक सुरक्षाबलों पर कई हमले, 11 सैन्यकर्मी मारे गए

सारांश

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने 22 अगस्त को अवारान जिले सहित कई इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है — 11 सैन्यकर्मी और 2 कथित ऑपरेटिव मारे जाने का दावा। पाकिस्तान की चुप्पी और स्वतंत्र सत्यापन की अनुपस्थिति इन दावों को विवादास्पद बनाती है।

मुख्य बातें

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर एकाधिक हमलों की जिम्मेदारी ली।
संगठन के दावे के अनुसार 22 अगस्त को अवारान जिले के कोलवाह-गिशकोर क्षेत्र में हमले में 5 सैन्यकर्मी मारे गए , 3 घायल हुए।
शिरीन-ओ-फरहाद इलाके में एक पुलिस चौकी पर कब्जे और 2 पुलिस वाहन जलाने का दावा; बाद में पुलिसकर्मियों को रिहा किया गया।
बेला-झाओ रोड पर 2 कथित 'राज्य समर्थित ऑपरेटिव' — मोहम्मद और उनके बेटे जफर — को मारने का दावा।
कुल मिलाकर 11 सैन्यकर्मी और 2 ऑपरेटिव मारे जाने का दावा; पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
सभी दावे BLF के एकपक्षीय बयान पर आधारित हैं; स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं ।

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने 27 अगस्त 2026 को दावा किया कि उसके लड़ाकों ने बलूचिस्तान के कई इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और कथित तौर पर राज्य समर्थित तत्वों पर एकाधिक हमले किए, जिनमें संगठन के अनुसार 11 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी और 2 कथित राज्य समर्थित ऑपरेटिव मारे गए। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अवारान जिले में सड़क सुरक्षा इकाई पर हमला

BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि 22 अगस्त को संगठन के लड़ाकों ने अवारान जिले के कोलवाह-गिशकोर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना की सड़क सुरक्षा इकाई को निशाना बनाया। प्रवक्ता के अनुसार, इस हमले में 5 सैन्यकर्मी मारे गए और 3 अन्य घायल हो गए।

BLF ने यह भी दावा किया कि सड़क निर्माण कार्य में लगे वाहनों को निशाना बनाया गया। संगठन के बयान के मुताबिक, घटनास्थल पर पहुँचे एक सैन्य हेलीकॉप्टर पर भी उसके लड़ाकों ने गोलीबारी की।

पुलिस चौकी पर कब्जा और वाहनों को आग

प्रवक्ता के बयान के अनुसार, उसी दिन BLF के लड़ाकों ने शिरीन-ओ-फरहाद इलाके में एक पुलिस चौकी पर कब्जा कर लिया। चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया, एक कलाश्निकोव राइफल और अन्य उपकरण जब्त किए गए तथा चौकी, दो पुलिस वाहन और एक मोटरसाइकिल को आग लगा दी गई।

संगठन ने दावा किया कि बाद में हिरासत में लिए गए पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बेला-झाओ रोड पर दो लोगों की हत्या का दावा

BLF ने यह भी दावा किया कि बेला-झाओ रोड पर नाकाबंदी के दौरान वाहन जाँच के समय उसने दो लोगों को मार गिराया, जिन्हें संगठन ने 'राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड' का सदस्य बताया। बयान के अनुसार, दोनों की पहचान वाजा बाग, झाओ के निवासी मोहम्मद और उनके बेटे जफर के रूप में हुई।

BLF ने जफर पर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और पाकिस्तानी सैन्य बलों के साथ सहयोग करने का आरोप लगाया। दोनों से हथियार जब्त करने और उनकी मोटरसाइकिल जलाने का भी दावा किया गया। ये आरोप BLF के एकपक्षीय बयान पर आधारित हैं।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और सत्यापन की स्थिति

पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से BLF के इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हताहतों की संख्या और घटनाओं का विवरण स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापित नहीं हो सका है। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में सशस्त्र संगठनों और सुरक्षाबलों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है।

गौरतलब है कि BLF पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन है और उसके दावों को पाकिस्तान सरकार आमतौर पर खारिज करती रही है। बलूचिस्तान में मीडिया की पहुँच सीमित होने के कारण जमीनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सशस्त्र संगठन और पाकिस्तानी सुरक्षाबल दोनों ही अपने-अपने आँकड़े पेश करते रहे हैं और सच्चाई अक्सर मीडिया की सीमित पहुँच में दब जाती है। पाकिस्तान की चुप्पी — न खंडन, न पुष्टि — खुद एक पैटर्न है जो इस क्षेत्र में सूचना के अभाव को और गहरा करता है। 'राज्य समर्थित डेथ स्क्वॉड' जैसी BLF की शब्दावली आरोप है, तथ्य नहीं — और इसे वैसे ही पढ़ा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि जब तक स्वतंत्र पत्रकारिता की पहुँच बलूचिस्तान के दूरदराज इलाकों तक नहीं होती, तब तक इन दावों और खंडनों का कोई भी मूल्यांकन अधूरा रहेगा।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने किन हमलों की जिम्मेदारी ली है?
BLF ने 22 अगस्त 2026 को बलूचिस्तान के अवारान जिले, शिरीन-ओ-फरहाद और बेला-झाओ रोड पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन का दावा है कि इनमें 11 सैन्यकर्मी और 2 कथित राज्य समर्थित ऑपरेटिव मारे गए।
क्या BLF के इन दावों की पुष्टि हुई है?
नहीं, BLF के किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बलूचिस्तान में मीडिया की सीमित पहुँच के कारण जमीनी सत्यापन कठिन बना हुआ है।
अवारान जिले में क्या हुआ?
BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच के अनुसार, 22 अगस्त को कोलवाह-गिशकोर क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना की सड़क सुरक्षा इकाई पर हमला किया गया जिसमें 5 सैन्यकर्मी मारे गए और 3 घायल हुए। संगठन ने घटनास्थल पर पहुँचे सैन्य हेलीकॉप्टर पर भी गोलीबारी का दावा किया।
BLF पाकिस्तान में किस दर्जे का संगठन है?
बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन है। पाकिस्तान सरकार इसे आतंकवादी संगठन मानती है, जबकि संगठन खुद को बलूच अधिकारों के लिए लड़ने वाला बताता है।
बलूचिस्तान में यह संघर्ष कितने समय से चल रहा है?
बलूचिस्तान में सशस्त्र संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के बीच संघर्ष दशकों पुराना है। यह क्षेत्र राजनीतिक, आर्थिक और जातीय विवादों का केंद्र रहा है, और यहाँ मीडिया की पहुँच लंबे समय से प्रतिबंधित रही है जिससे सूचना का सत्यापन कठिन होता है।
राष्ट्र प्रेस
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