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नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने मेलुरी दौरे पर म्यांमार से सड़क संपर्क मजबूत करने पर दिया जोर

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नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने मेलुरी दौरे पर म्यांमार से सड़क संपर्क मजबूत करने पर दिया जोर

सारांश

नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने मेलुरी दौरे पर म्यांमार से बेहतर सड़क संपर्क की पुरजोर वकालत की। एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत अवाखुंग व्यापार केंद्र और अंतर्देशीय जलमार्गों की क्षमता को भुनाने पर ज़ोर दिया गया, ताकि सीमावर्ती जिले को विकास के नक्शे पर स्थापित किया जा सके।

मुख्य बातें

राज्यपाल नंद किशोर यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को मेलुरी जिले का दौरा किया और म्यांमार से बेहतर सड़क संपर्क की आवश्यकता पर बल दिया।
अवाखुंग स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र को एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत सीमा पार व्यापार का केंद्र बनाने की क्षमता रेखांकित की गई।
अंतर्देशीय जलमार्ग और बिजली व्यापार को मेलुरी के विकास के प्रमुख अवसरों के रूप में पहचाना गया।
1958 में बेंच कोर्ट की स्थापना से पूर्ण जिला बनने तक की यात्रा को प्रशासनिक विकास का मील का पत्थर बताया गया।
राज्यपाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास का आह्वान किया।

नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को मेलुरी जिले के दौरे के दौरान म्यांमार से बेहतर सड़क संपर्क की अनिवार्यता पर बल दिया। उनका कहना था कि उन्नत बुनियादी ढाँचा न केवल बाज़ारों और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुलभ करेगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के नए द्वार भी खोलेगा। यह दौरा एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत पूर्वोत्तर भारत में सीमा-पार आर्थिक एकीकरण को गति देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मेलुरी का रणनीतिक महत्व

राज्यपाल यादव ने मेलुरी को समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों, मनोरम दृश्यों और म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने अंतर्देशीय जलमार्गों और बिजली व्यापार में जिले की अप्रयुक्त क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि भौगोलिक स्थिति को विकास की धुरी बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि 1958 में बेंच कोर्ट की स्थापना से लेकर पूर्ण विकसित जिला बनने तक की यात्रा इस क्षेत्र के प्रशासनिक विकास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी और अवाखुंग व्यापार केंद्र

राज्यपाल ने भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के संदर्भ में अवाखुंग स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र की क्षमता को रेखांकित किया। उनके अनुसार यह केंद्र सीमा पार व्यापार को बढ़ावा देने और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ संपर्क को सुदृढ़ करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से सीमा पार आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय विकास दोनों को एक साथ गति मिलने की संभावना है।

विकास की संभावनाएँ और प्राकृतिक संसाधन

नागालैंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अंतर्देशीय जलमार्ग के सलाहकार ने राज्यपाल को मेलुरी के रणनीतिक महत्व और विकास की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी। सलाहकार ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ कर और कनेक्टिविटी बेहतर कर आर्थिक विकास के नए रास्ते खोले जा सकते हैं, जिससे न केवल मेलुरी बल्कि पूरे नागालैंड के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में योगदान मिलेगा। राज्यपाल ने खनिज संसाधनों, पर्यटन क्षमता और कृषि एवं बागवानी क्षेत्रों के जिम्मेदाराना दोहन की आवश्यकता पर भी बल दिया।

आवश्यक सेवाएँ और समावेशी विकास

राज्यपाल यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल आपूर्ति, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी को जनजीवन के उत्थान के लिए अपरिहार्य बताया। उन्होंने स्थानीय समुदायों के हितों और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि रखते हुए सतत विकास का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के सीमावर्ती जिलों में विकास की गति तेज करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रयास कर रही हैं।

समन्वित प्रयासों का आग्रह

राज्यपाल ने सरकारी विभागों से तत्परता और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ जिले की विकासात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने मेलुरी के नागरिकों को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। आगामी समय में जिले की क्षमता को साकार करने के लिए प्रशासनिक समन्वय और समुदाय की भागीदारी दोनों की अहम भूमिका होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी कनेक्टिविटी अभी भी अधूरी है। म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच सीमा पार व्यापार की सम्भावनाओं को लेकर उत्साह व्यावहारिक जोखिमों को नज़रअंदाज़ करता दिखता है, जिन पर नीति-स्तर पर सार्वजनिक चर्चा कम ही होती है। अवाखुंग व्यापार केंद्र और जलमार्ग परियोजनाएँ वर्षों से प्रस्तावित हैं — असली पैमाना यह है कि इस दौरे के बाद कितने समय में ठोस बजटीय आवंटन और निर्माण समयसीमाएँ घोषित होती हैं।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड के राज्यपाल ने म्यांमार से सड़क संपर्क पर जोर क्यों दिया?
राज्यपाल नंद किशोर यादव के अनुसार बेहतर सड़क संपर्क बाज़ारों और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुलभ करेगा और व्यापार, पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा करेगा। यह एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
मेलुरी जिला नागालैंड के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
मेलुरी म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और इसके पास खनिज संसाधन, पर्यटन क्षमता, अंतर्देशीय जलमार्ग और बिजली व्यापार के अवसर हैं। राज्यपाल ने इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और विकास की असीमित संभावनाओं वाला जिला बताया।
अवाखुंग अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र क्या है?
अवाखुंग मेलुरी जिले में स्थित एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र है, जिसे भारत सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत सीमा पार व्यापार और दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क का माध्यम बनाने की योजना है। राज्यपाल ने इसकी क्षमता को और विकसित करने पर जोर दिया।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और नागालैंड के सीमावर्ती जिलों का क्या संबंध है?
एक्ट ईस्ट पॉलिसी भारत की वह रणनीतिक पहल है जो पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया से व्यापार, संस्कृति और कनेक्टिविटी के जरिए जोड़ना चाहती है। नागालैंड के सीमावर्ती जिले जैसे मेलुरी इस नीति के तहत महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकते हैं।
मेलुरी जिले का ऐतिहासिक विकास क्रम क्या रहा है?
मेलुरी का प्रशासनिक सफर 1958 में बेंच कोर्ट की स्थापना से शुरू होकर पूर्ण विकसित जिले के रूप में स्थापित होने तक पहुँचा है। राज्यपाल यादव ने इसे क्षेत्र के प्रशासनिक विकास और प्रगति का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
राष्ट्र प्रेस
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