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आयुष्मान भारत योजना: येवला के अनिरुद्ध हॉस्पिटल में साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का मुफ़्त इलाज

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आयुष्मान भारत योजना: येवला के अनिरुद्ध हॉस्पिटल में साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का मुफ़्त इलाज

सारांश

नाशिक जिले के येवला में आयुष्मान भारत योजना ने साढ़े चार हज़ार मरीज़ों की ज़िंदगी बदल दी — किडनी स्टोन से पेट की गाँठ तक, वे ऑपरेशन जो बाज़ार में लाखों में होते, यहाँ बिल्कुल मुफ़्त हुए। यह छोटे शहर में बड़ी योजना की असली सफलता की कहानी है।

मुख्य बातें

अनिरुद्ध हॉस्पिटल, येवला (नाशिक) में आयुष्मान भारत के तहत अब तक करीब साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का निःशुल्क इलाज हो चुका है।
पात्र मरीज़ों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का मुफ़्त उपचार मिलता है, जिसमें लगभग ढाई हज़ार प्रकार के ऑपरेशन शामिल हैं।
किडनी स्टोन के एक मरीज़ का बाज़ार में ₹70,000–₹1 लाख का संभावित खर्च योजना के तहत शून्य रहा।
योजना के अंतर्गत इलाज के साथ-साथ मरीज़ को मुफ़्त भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है।
तुषार सालुंखे ने आग्रह किया कि पात्र नागरिक योजना की जानकारी लें और लाभ उठाएँ।

महाराष्ट्र के नाशिक जिले के येवला स्थित अनिरुद्ध हॉस्पिटल में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के अंतर्गत अब तक करीब साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का निःशुल्क उपचार और ऑपरेशन किया जा चुका है। 28 अक्टूबर 2026 तक संकलित इस आँकड़े से स्पष्ट होता है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए यह योजना जीवनरक्षक साबित हो रही है। मरीज़ों के अनुसार, योजना के कारण उन्हें महँगे ऑपरेशन के लिए अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा।

योजना की संरचना और अस्पताल का दायरा

अस्पताल के डॉ. तुषार सालुंखे ने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र मरीज़ों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क इलाज मिलता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस योजना में लगभग ढाई हज़ार प्रकार के ऑपरेशन शामिल हैं, जिनमें कई प्रमुख बीमारियाँ कवर होती हैं। इसके अतिरिक्त, उपचार के दौरान मरीज़ को मुफ़्त भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है।

डॉ. सालुंखे के अनुसार, योजना का सर्वाधिक लाभ उन लोगों को हुआ है जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ थे। उन्होंने अपील की कि पात्र नागरिक योजना की जानकारी लें और इसका लाभ उठाएँ।

मरीज़ों के अनुभव: राहत की असली तस्वीर

नाशिक जिले के तहसीलदार गाँव के निवासी अभिषेक दत्तात्रेय को किडनी स्टोन की समस्या थी। परिचितों से योजना की जानकारी मिलने के बाद वे अनिरुद्ध हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ उनका सफल ऑपरेशन किया गया। अभिषेक के अनुसार, बाज़ार में इसी तरह के ऑपरेशन पर ₹70,000 से ₹1 लाख तक का खर्च आ सकता था, परंतु योजना के माध्यम से उन्हें एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा।

एक महिला मरीज़ ने बताया कि उनके पेट में गाँठ थी और निजी अस्पताल में ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान था। योजना की जानकारी मिलने के बाद वे अनिरुद्ध हॉस्पिटल पहुँचीं, जहाँ उनका ऑपरेशन बिना किसी शुल्क के सम्पन्न हुआ। महिला के अनुसार, इस सरकारी सहायता से उनके परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।

एक अन्य महिला ने बताया कि उनकी बेटी के ऑपरेशन पर लगभग ₹1 लाख का खर्च अनुमानित था। योजना के अंतर्गत अनिरुद्ध हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन निःशुल्क किया गया। महिला ने कहा कि बेटी का इलाज भली-भाँति हुआ और सरकारी योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित रही है। आँकड़ों के अनुसार, येवला जैसे छोटे शहरों में भी योजना की सफल क्रियान्विति यह दर्शाती है कि ज़िला स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य ढाँचा धीरे-धीरे सुदृढ़ हो रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के खर्च के कारण परिवारों के कर्ज़ में डूबने की घटनाएँ पहले आम थीं।

क्या होगा आगे

डॉ. सालुंखे ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में आयुष्मान भारत योजना का दायरा और बढ़ेगा, ताकि अधिक-से-अधिक ज़रूरतमंद लोगों को उपचार मिल सके। अस्पताल में बढ़ती मरीज़ संख्या इस बात का संकेत है कि जागरूकता अभियानों से योजना का लाभ पहले से कहीं अधिक लोगों तक पहुँच रहा है। यदि यही गति जारी रही, तो येवला का यह अनुभव ज़िले के अन्य अस्पतालों के लिए एक मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा तब और अर्थपूर्ण होता जब इसे राज्य-स्तरीय डेटा से तुलना में रखा जाता। असली सवाल यह है कि महाराष्ट्र में कितने पात्र परिवार अभी भी योजना से अनजान हैं या दस्तावेज़ों की कमी के कारण वंचित हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य में 'लाभार्थी संख्या' और 'स्वास्थ्य परिणाम' के बीच का अंतर भरना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। जब तक योजना का लाभ उठाने की प्रक्रिया सरल नहीं होगी, तब तक दूर-दराज़ के गाँवों में बसे सबसे ज़रूरतमंद वर्ग तक इसकी पहुँच अधूरी रहेगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष्मान भारत योजना के तहत येवला में क्या सुविधाएँ मिल रही हैं?
येवला के अनिरुद्ध हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत के तहत अब तक करीब साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का निःशुल्क ऑपरेशन किया जा चुका है। पात्र मरीज़ों को ₹5 लाख तक का सालाना मुफ़्त इलाज और उपचार के दौरान मुफ़्त भोजन भी मिलता है।
आयुष्मान भारत योजना में कितने प्रकार के ऑपरेशन शामिल हैं?
डॉ. तुषार सालुंखे के अनुसार, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में लगभग ढाई हज़ार प्रकार के ऑपरेशन शामिल हैं। इनमें किडनी स्टोन, पेट की गाँठ और अन्य प्रमुख बीमारियाँ कवर होती हैं।
आयुष्मान भारत का लाभ कौन उठा सकता है?
यह योजना आर्थिक रूप से कमज़ोर और ज़रूरतमंद परिवारों के लिए है। पात्र मरीज़ों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क उपचार सरकार द्वारा पैनलबद्ध अस्पतालों में मिलता है।
येवला के मरीज़ों को योजना से कितनी बचत हुई?
मरीज़ों के अनुसार, किडनी स्टोन के ऑपरेशन पर बाज़ार में ₹70,000 से ₹1 लाख और पेट की गाँठ के ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च हो सकते थे। योजना के तहत इन सभी का इलाज बिना किसी शुल्क के किया गया, जिससे परिवारों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
आयुष्मान भारत का दायरा भविष्य में बढ़ेगा?
डॉ. सालुंखे ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में योजना का दायरा और व्यापक होगा, ताकि अधिक ज़रूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके। फ़िलहाल अस्पताल में मरीज़ों की बढ़ती संख्या योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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