आयुष्मान भारत योजना: येवला के अनिरुद्ध हॉस्पिटल में साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का मुफ़्त इलाज
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के नाशिक जिले के येवला स्थित अनिरुद्ध हॉस्पिटल में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के अंतर्गत अब तक करीब साढ़े चार हज़ार मरीज़ों का निःशुल्क उपचार और ऑपरेशन किया जा चुका है। 28 अक्टूबर 2026 तक संकलित इस आँकड़े से स्पष्ट होता है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए यह योजना जीवनरक्षक साबित हो रही है। मरीज़ों के अनुसार, योजना के कारण उन्हें महँगे ऑपरेशन के लिए अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा।
योजना की संरचना और अस्पताल का दायरा
अस्पताल के डॉ. तुषार सालुंखे ने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र मरीज़ों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क इलाज मिलता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस योजना में लगभग ढाई हज़ार प्रकार के ऑपरेशन शामिल हैं, जिनमें कई प्रमुख बीमारियाँ कवर होती हैं। इसके अतिरिक्त, उपचार के दौरान मरीज़ को मुफ़्त भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है।
डॉ. सालुंखे के अनुसार, योजना का सर्वाधिक लाभ उन लोगों को हुआ है जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ थे। उन्होंने अपील की कि पात्र नागरिक योजना की जानकारी लें और इसका लाभ उठाएँ।
मरीज़ों के अनुभव: राहत की असली तस्वीर
नाशिक जिले के तहसीलदार गाँव के निवासी अभिषेक दत्तात्रेय को किडनी स्टोन की समस्या थी। परिचितों से योजना की जानकारी मिलने के बाद वे अनिरुद्ध हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ उनका सफल ऑपरेशन किया गया। अभिषेक के अनुसार, बाज़ार में इसी तरह के ऑपरेशन पर ₹70,000 से ₹1 लाख तक का खर्च आ सकता था, परंतु योजना के माध्यम से उन्हें एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा।
एक महिला मरीज़ ने बताया कि उनके पेट में गाँठ थी और निजी अस्पताल में ऑपरेशन पर लाखों रुपये खर्च होने का अनुमान था। योजना की जानकारी मिलने के बाद वे अनिरुद्ध हॉस्पिटल पहुँचीं, जहाँ उनका ऑपरेशन बिना किसी शुल्क के सम्पन्न हुआ। महिला के अनुसार, इस सरकारी सहायता से उनके परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।
एक अन्य महिला ने बताया कि उनकी बेटी के ऑपरेशन पर लगभग ₹1 लाख का खर्च अनुमानित था। योजना के अंतर्गत अनिरुद्ध हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन निःशुल्क किया गया। महिला ने कहा कि बेटी का इलाज भली-भाँति हुआ और सरकारी योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सीमित रही है। आँकड़ों के अनुसार, येवला जैसे छोटे शहरों में भी योजना की सफल क्रियान्विति यह दर्शाती है कि ज़िला स्तर पर सरकारी स्वास्थ्य ढाँचा धीरे-धीरे सुदृढ़ हो रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज के खर्च के कारण परिवारों के कर्ज़ में डूबने की घटनाएँ पहले आम थीं।
क्या होगा आगे
डॉ. सालुंखे ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में आयुष्मान भारत योजना का दायरा और बढ़ेगा, ताकि अधिक-से-अधिक ज़रूरतमंद लोगों को उपचार मिल सके। अस्पताल में बढ़ती मरीज़ संख्या इस बात का संकेत है कि जागरूकता अभियानों से योजना का लाभ पहले से कहीं अधिक लोगों तक पहुँच रहा है। यदि यही गति जारी रही, तो येवला का यह अनुभव ज़िले के अन्य अस्पतालों के लिए एक मॉडल बन सकता है।