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म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का मुंबई दौरा, भारत-म्यांमार आर्थिक सहयोग पर जोर

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म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का मुंबई दौरा, भारत-म्यांमार आर्थिक सहयोग पर जोर

सारांश

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने मुंबई में भारत-म्यांमार आर्थिक सहयोग को नई गति देने का संकल्प जताया। 1,600 किलोमीटर की साझा सीमा, 'ऑपरेशन ब्रह्मा' की मदद और कोविड सहयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने मुर्मु और मोदी से मुलाकात की, जेएनपीटी का दौरा किया और 'एक्ट ईस्ट' की धुरी पर रिश्तों को मजबूती दी।

मुख्य बातें

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने 3 जून को मुंबई के लोक भवन में स्वागत समारोह को संबोधित किया।
भारत और म्यांमार के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा व्यापार के अवसर बनाती है।
यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने द्रौपदी मुर्मु , PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट का दौरा किया।
म्यांमार भूकंप के दौरान भारत के 'ऑपरेशन ब्रह्मा' के लिए आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने म्यांमार को 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति का महत्वपूर्ण द्वार बताया।

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने 3 जून को मुंबई में कहा कि उनकी भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को नई ऊँचाई देना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और म्यांमार के ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंधों को इस यात्रा के माध्यम से और अधिक गति दी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग मंगलवार को मुंबई के लोक भवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा और व्यापक समुद्री सीमा है, जो व्यापार और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएँ प्रस्तुत करती है।

शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त उन्होंने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट का दौरा किया और एक व्यापार सम्मेलन में भी भाग लिया, जिसे दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया गया।

'ऑपरेशन ब्रह्मा' के लिए आभार

मिन आंग ह्लाइंग ने पिछले वर्ष म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत द्वारा दी गई सहायता के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने 'ऑपरेशन ब्रह्मा' का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने राहत और बचाव कार्यों के लिए चिकित्सा दल, अस्थायी फील्ड अस्पताल, आवश्यक राहत सामग्री और मानवीय सहायता भेजी थी। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भी म्यांमार को वैक्सीन, ऑक्सीजन सिलेंडर और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार और भारतीय जनता का धन्यवाद किया।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कड़ी

राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध भारत और म्यांमार को जोड़ने वाली एक मजबूत आध्यात्मिक कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि जब भारत में विपश्यना ध्यान की परंपरा लगभग समाप्त होने की स्थिति में थी, तब म्यांमार ने इसे संरक्षित रखा और आज पूरी दुनिया इसका लाभ ले रही है। राज्यपाल के अनुसार भारत का बौद्ध सर्किट, जो भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों को जोड़ता है, दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' में अहम स्थान

राज्यपाल ने कहा कि म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति में विशेष स्थान रखता है, और दक्षिण-पूर्व एशिया तथा आसियान देशों तक भारत की पहुँच का महत्वपूर्ण द्वार है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करेगी तथा व्यापार, निवेश एवं पर्यटन के नए रास्ते खोलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 किलोमीटर की सीमा और 'एक्ट ईस्ट' की महत्वाकांक्षा, दूसरी ओर म्यांमार की आंतरिक अस्थिरता और सैन्य शासन पर वैश्विक सवाल। मुंबई में आर्थिक सहयोग की भाषा गर्मजोशी भरी जरूर है, लेकिन असली परीक्षा कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांज़िट प्रोजेक्ट और सीमावर्ती व्यापार की रफ्तार में दिखेगी। 'ऑपरेशन ब्रह्मा' और कोविड सहायता का स्मरण भारत की 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' छवि को मजबूत करता है, पर निवेश के ठोस आँकड़े अभी सामने आने बाकी हैं। आसियान तक भारत की पहुँच का यह द्वार तभी कारगर है जब द्विपक्षीय कनेक्टिविटी जमीनी प्रगति में बदले।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रपति के अनुसार उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और म्यांमार के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार और निवेश को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे इन संबंधों को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
मुंबई दौरे में राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने किन कार्यक्रमों में भाग लिया?
मिन आंग ह्लाइंग ने मुंबई के लोक भवन में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट का दौरा किया और एक व्यापार सम्मेलन में भाग लिया।
'ऑपरेशन ब्रह्मा' क्या है और इसका जिक्र क्यों किया गया?
'ऑपरेशन ब्रह्मा' म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारत द्वारा चलाया गया राहत अभियान था, जिसके तहत चिकित्सा दल, अस्थायी फील्ड अस्पताल और राहत सामग्री भेजी गई थी। राष्ट्रपति ने इस सहायता के लिए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति में म्यांमार की क्या भूमिका है?
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के अनुसार म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति में विशेष स्थान रखता है। यह दक्षिण-पूर्व एशिया और आसियान देशों तक भारत की पहुँच का महत्वपूर्ण द्वार माना जाता है।
भारत और म्यांमार के बीच साझा सीमा कितनी है?
राष्ट्रपति के बयान के अनुसार भारत और म्यांमार के बीच लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा है, साथ ही एक व्यापक समुद्री सीमा भी है। इसी कारण दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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