जयशंकर ने म्यांमार राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग से की मुलाकात, 1 जून को PM मोदी से होगी वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार, 30 मई 2026 को नई दिल्ली में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर विचार-विमर्श किया। पाँच दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत पहुँचे ह्लाइंग की यह यात्रा राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद उनका पहला भारत दौरा है।
मुलाकात की मुख्य बातें
बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज नई दिल्ली में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मिलकर खुशी हुई। हमारे लंबे समय से चले आ रहे आपसी सहयोग को और गहरा करने की उनकी सकारात्मक भावना की सराहना करता हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति की आगामी बैठक से शांति, तरक्की और खुशहाली की साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।
दिल्ली आगमन और स्वागत
राष्ट्रपति ह्लाइंग बोधगया से नई दिल्ली पहुँचे, जहाँ हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका औपचारिक स्वागत किया। विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर कहा कि यह दौरा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्यमंत्री सिंह ने भी कहा कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच सभ्यतागत, सांस्कृतिक और जन-संपर्क के ऐतिहासिक बंधनों को रेखांकित करती है।
PM मोदी से मुलाकात और व्यापार मंच
दौरे के दौरान राष्ट्रपति ह्लाइंग 1 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे, जहाँ दोनों देशों के बीच संबंधों को और विस्तार देने पर चर्चा होगी। इसके अलावा वे एक व्यापार मंच में भी भाग लेंगे। उनके साथ आए उच्चस्तरीय शिष्टमंडल में कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रमुख नाम शामिल हैं।
मुंबई में व्यापारिक संवाद
2 जून को राष्ट्रपति ह्लाइंग मुंबई का दौरा करेंगे, जहाँ वे उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे तथा स्थल-भ्रमण भी करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दे रहा है। गौरतलब है कि म्यांमार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से सीधी सीमा साझा करता है, जिससे दोनों देशों के बीच संपर्क और सुरक्षा सहयोग की विशेष अहमियत है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है।