म्यांमार राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का 5 दिवसीय भारत दौरा 30 मई से, बोधगया से होगी शुरुआत
सारांश
मुख्य बातें
म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर 30 मई से 3 जून 2025 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद पहली भारत यात्रा है। दौरे की शुरुआत बोधगया से होगी, जो बौद्ध आस्था का एक प्रमुख केंद्र है।
दौरे का कार्यक्रम
विदेश मंत्रालय द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ह्लाइंग 1 जून को प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर केंद्रित चर्चा होगी। इसके अलावा वे एक बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे। 2 जून को राष्ट्रपति मुंबई का दौरा करेंगे, जहाँ व्यापार-उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात और साइट विजिट निर्धारित है।
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल
राष्ट्रपति ह्लाइंग के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारिक नेता शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल भारत-म्यांमार व्यापार संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत की नीतिगत प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'म्यांमार भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर नीति के संगम पर है। राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के इस आधिकारिक दौरे से दोनों देशों के बीच कई तरह के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।' गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम ने भी अपनी भारत यात्रा बोधगया से आरंभ की थी और महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की थी — यह बोधगया को कूटनीतिक यात्राओं के एक सांकेतिक प्रारंभिक पड़ाव के रूप में स्थापित करने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि: संबंधों की नई शुरुआत
यू मिन आंग ह्लाइंग ने अप्रैल 2025 में म्यांमार के राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उस अवसर पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने म्यांमार गए थे। 10 अप्रैल को सिंह ने ह्लाइंग से मुलाकात की और प्रधानमंत्री मोदी का बधाई पत्र सौंपा। उस मुलाकात में भारत ने 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के तहत म्यांमार के विकास में सहयोग जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया था।
आगे क्या
यह दौरा भारत-म्यांमार संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। द्विपक्षीय वार्ता के नतीजे, विशेषकर व्यापार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में, आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होंगे।