28 अक्टूबर 2026
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मस्जिद विवाद पर AAP विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने मदनी का बचाव किया, सरकार पर धर्म की राजनीति का आरोप

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मस्जिद विवाद पर AAP विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने मदनी का बचाव किया, सरकार पर धर्म की राजनीति का आरोप

सारांश

AAP विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने मौलाना मदनी के मस्जिद बयान को सही ठहराया और सरकार पर रोज़गार-महँगाई छोड़कर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा — 300 साल पुरानी मस्जिदें निशाने पर हैं, देश को आगे बढ़ना है।

मुख्य बातें

AAP विधायक आले मोहम्मद इकबाल ( मटिया महल ) ने 28 अक्टूबर 2026 को मौलाना अरशद मदनी के मस्जिद बयान का बचाव किया।
इकबाल ने कहा कि 50-100 साल और आज़ादी से पहले की पुरानी मस्जिदें निशाने पर हैं; रेस कोर्स मस्जिद लगभग 300 साल पुरानी है।
उन्होंने सरकार पर रोज़गार और महँगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया।
इकबाल ने सरकार से अपील की कि मस्जिद की राजनीति बंद हो और देश के विकास पर ध्यान दिया जाए।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद अध्यक्ष मदनी के बयान पर देशभर में कई राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ जारी हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) के मटिया महल विधानसभा क्षेत्र से विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने 28 अक्टूबर 2026 को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के उस बयान का खुलकर बचाव किया, जिसमें मदनी ने कहा था कि तोड़ी गई मस्जिदों में दोबारा अज़ान शुरू होगी। इकबाल ने साथ ही केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोज़गार और महँगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धर्म की राजनीति कर रही है।

मदनी के बयान पर इकबाल का रुख

विधायक इकबाल ने कहा, 'मदनी ने कुछ गलत नहीं कहा है। उन्होंने कहा कि ये कोई नई बनी मस्जिदें नहीं हैं, जो आज बनाई गई हों — आज की हुकूमत 50 साल, 100 साल और आज़ादी से भी पहले की पुरानी मस्जिदों को निशाना बना रही है।' उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रेस कोर्स स्थित मस्जिद लगभग 300 साल पुरानी है और उस पर भी निशाना साधा जा रहा है।

रोज़गार और महँगाई की ओर ध्यान दिलाया

इकबाल ने तर्क दिया कि देश को आगे बढ़ना है, लेकिन उसे मस्जिद-मंदिर की राजनीति में उलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हज़ारों युवा आज नौकरियों की बात कर रहे हैं, लेकिन सरकार देश को मस्जिदों की राजनीति में उलझा रही है।' उनके अनुसार, 'देश को अमेरिका के बराबर खड़ा होना है, चीन से आगे निकलना है, लेकिन हमें धर्म की राजनीति में घेर दिया गया है।'

आस्था से खिलवाड़ पर कड़ी आपत्ति

विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जो मस्जिद है, वह हमेशा मस्जिद रहेगी, लेकिन जो नेता हैं, वह कल नहीं रहेंगे।' उन्होंने कहा कि किसी की आस्था से खेलकर धर्म और मज़हब की राजनीति करना गलत है और देश का हर नागरिक इससे ऊपर उठ चुका है। इकबाल के अनुसार, 'मस्जिद को सिर्फ सियासी शिकार बनाया जा रहा है।'

सरकार से विकास पर ध्यान देने की अपील

इकबाल ने सरकार से अपील की कि मस्जिद को लेकर जारी राजनीति तत्काल बंद होनी चाहिए और देश के विकास — शिक्षा, रोज़गार और महँगाई नियंत्रण — पर ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि 'देश के दुश्मनों से लड़ना है, न कि आपस के लोगों से।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि मौलाना मदनी के बयान के बाद कई राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। नई दिल्ली की राजनीति में यह बयान ऐसे समय में आया है जब मस्जिदों के ध्वंस और धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद राष्ट्रीय सुर्खियों में बने हुए हैं। AAP का यह रुख उसकी बदलती राजनीतिक स्थिति और अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ संवाद की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या कोई राजनीतिक दल मस्जिद-मंदिर विमर्श से बाहर निकलकर शासन की जवाबदेही की बात करने में सक्षम है — या यह चक्र चुनावी फायदे के लिए जानबूझकर जारी रखा जाता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों को लेकर क्या बयान दिया था?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कथित तौर पर कहा था कि तोड़ी गई मस्जिदों में दोबारा अज़ान शुरू होगी। इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
AAP विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने मदनी के बयान का बचाव क्यों किया?
विधायक इकबाल ने कहा कि मदनी ने कुछ गलत नहीं कहा क्योंकि निशाना आज़ादी से पहले की सदियों पुरानी मस्जिदों पर साधा जा रहा है। उन्होंने इसे धर्म की राजनीति बताते हुए सरकार से रोज़गार और महँगाई पर ध्यान देने की अपील की।
रेस कोर्स मस्जिद का विवाद क्या है?
विधायक इकबाल के अनुसार दिल्ली की रेस कोर्स स्थित मस्जिद लगभग 300 साल पुरानी है और उसे भी विवाद में घसीटा जा रहा है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक धरोहर पर हमला बताया।
AAP का मस्जिद विवाद पर क्या रुख है?
AAP के विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी धर्म की राजनीति के विरुद्ध है और सरकार को इस विमर्श से बाहर निकलकर विकास पर ध्यान देना चाहिए। हालाँकि पार्टी का आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है।
मस्जिद तोड़ने का मुद्दा किन क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है?
यह मुद्दा मुख्य रूप से दिल्ली और अन्य राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित कर रहा है जहाँ ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद चल रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह बहस रोज़गार, शिक्षा और महँगाई जैसे असल मुद्दों से ध्यान हटा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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