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तलोजा जेल में कैदी अजय सावंत की संदिग्ध मौत: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने जेल अधीक्षक को थमाया नोटिस

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तलोजा जेल में कैदी अजय सावंत की संदिग्ध मौत: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने जेल अधीक्षक को थमाया नोटिस

सारांश

तलोजा जेल में 50 वर्षीय कैदी अजय सावंत की 1 सितंबर को हुई संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. बादर ने सख्त रुख अपनाते हुए जेल अधीक्षक को नोटिस थमाया है।

मुख्य बातें

तलोजा मध्यवर्ती कारागृह में 50 वर्षीय कैदी अजय अशोक सावंत की 1 सितंबर 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।
महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम.
बादर ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर 23 फरवरी 2027 तक विस्तृत रिपोर्ट माँगी।
शिकायत में कथित तौर पर आरोप है कि जेल प्रशासन ने जिम्मेदारी से बचने के लिए सावंत को अस्पताल भर्ती से पहले ही मृत घोषित करने का प्रयास किया — आरोप अभी सत्यापित नहीं।
शव को पोस्टमार्टम के लिए मुंबई के जे.जे.
अस्पताल भेजा गया; पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही मौत के कारण स्पष्ट करेगी।
मनसे सहकार सेना ने 2024 से अब तक तलोजा जेल में हुई सभी कैदियों की मौतों की गहन जाँच की माँग की है।
जेल अधीक्षक सुप्रीम टंडन ने मीडिया के संपर्क प्रयासों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने नवी मुंबई स्थित तलोजा मध्यवर्ती कारागृह में 50 वर्षीय कैदी अजय अशोक सावंत की संदिग्ध मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जेल अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने अधीक्षक को 23 फरवरी 2027 को सुबह 11 बजे आयोग के समक्ष उपस्थित होकर दो प्रतियों में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह घटना 1 सितंबर 2026 को सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में घटित हुई बताई जाती है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

शिकायत के अनुसार, अजय अशोक सावंत पिछले तीन वर्षों से तलोजा जेल में सजा काट रहे थे। 1 सितंबर 2026 की सुबह उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई। इसके बाद उनका शव वाशी महानगरपालिका अस्पताल ले जाया गया।

परिजनों और महाराष्ट्र नवनिर्माण सहकार सेना (मनसे सहकार सेना) के पदाधिकारियों ने अस्पताल में शव पहुँचाए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए वाशी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद दंडाधिकारी की उपस्थिति में पंचनामा किया गया और शव को पोस्टमार्टम के लिए मुंबई के जे.जे. अस्पताल भेजा गया।

जेल प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

महाराष्ट्र नवनिर्माण सहकार सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष बालासाहेब शिंदे ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कथित तौर पर आरोप लगाया गया है कि जेल प्रशासन ने मौत की जिम्मेदारी से बचने के लिए सावंत को अस्पताल में भर्ती करने से पूर्व ही मृत घोषित करने अथवा उपचार के दौरान मौत दिखाने का प्रयास किया।

गौरतलब है कि ये आरोप अभी तक आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का निर्धारण संभव होगा। तलोजा मध्यवर्ती कारागृह के अधीक्षक सुप्रीम टंडन से इस संदर्भ में संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई।

मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई

शिकायतकर्ता संगठन ने 2 सितंबर 2026 को राज्य मानवाधिकार आयोग के साथ-साथ मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री, ठाणे जिलाधिकारी, कारागार महानिरीक्षक और नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को भी पत्र लिखकर उच्चस्तरीय दंडाधिकारी जाँच की माँग की थी।

इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. बादर ने जेल अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता और कैदियों की सुरक्षा पर सवाल

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में जेल सुधार और बंदियों के मानवाधिकार को लेकर बहस तेज है। मनसे सहकार सेना ने माँग की है कि केवल इस एक मामले तक सीमित न रहते हुए वर्ष 2024 से अब तक तलोजा जेल में हुई समस्त कैदियों की मौतों की गहन जाँच करायी जाए।

प्रदेश उपाध्यक्ष बालासाहेब शिंदे ने कहा कि यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि ये मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं या जेल प्रशासन की लापरवाही का परिणाम हैं, ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और न्याय सुनिश्चित हो।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें जे.जे. अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 23 फरवरी 2027 को मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली जेल अधीक्षक की रिपोर्ट पर टिकी हैं। इस मामले का परिणाम महाराष्ट्र की जेल प्रशासन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संकेत देती है कि यह एक पृथक घटना नहीं बल्कि संभावित प्रणालीगत खामी है। मानवाधिकार आयोग का नोटिस स्वागत-योग्य कदम है, किंतु असली परीक्षा यह है कि जेल प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कार्रवाई होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आयोग की सुनवाई के परिणाम पर बहुत कुछ निर्भर करेगा — यदि यह भी रिपोर्टिंग और चुप्पी के पुराने चक्र में सिमट गया, तो कैदियों की सुरक्षा का सवाल अनुत्तरित ही रहेगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तलोजा जेल में अजय सावंत की मौत कब और कैसे हुई?
1 सितंबर 2026 को सुबह नवी मुंबई के तलोजा मध्यवर्ती कारागृह में 50 वर्षीय कैदी अजय अशोक सावंत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। वे पिछले तीन वर्षों से जेल में सजा काट रहे थे।
महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने क्या कार्रवाई की है?
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए.एम. बादर ने तलोजा जेल अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। अधीक्षक को 23 फरवरी 2027 को सुबह 11 बजे आयोग के समक्ष उपस्थित होकर दो प्रतियों में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
जेल प्रशासन पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
शिकायत में कथित तौर पर आरोप है कि जेल प्रशासन ने जिम्मेदारी से बचने के लिए सावंत को अस्पताल भर्ती करने से पूर्व ही मृत घोषित करने या उपचार के दौरान मौत दिखाने का प्रयास किया। ये आरोप अभी आधिकारिक जाँच से सत्यापित नहीं हुए हैं।
इस मामले में शिकायत किसने और कहाँ दर्ज कराई?
महाराष्ट्र नवनिर्माण सहकार सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष बालासाहेब शिंदे ने यह शिकायत दर्ज कराई। 2 सितंबर 2026 को उन्होंने मानवाधिकार आयोग के साथ-साथ मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, ठाणे जिलाधिकारी, कारागार महानिरीक्षक और नवी मुंबई पुलिस आयुक्त को भी पत्र लिखकर उच्चस्तरीय दंडाधिकारी जाँच की माँग की थी।
मनसे सहकार सेना की आगे क्या माँगें हैं?
संगठन ने माँग की है कि केवल अजय सावंत की मौत तक सीमित न रहते हुए वर्ष 2024 से अब तक तलोजा जेल में हुई सभी कैदियों की मौतों की गहन जाँच की जाए। संगठन का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि ये मौतें प्राकृतिक थीं या जेल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा।
राष्ट्र प्रेस
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