पुणे तेजाब हमला: राष्ट्रीय महिला आयोग का स्वतः संज्ञान, महाराष्ट्र डीजीपी से 7 दिन में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने महाराष्ट्र के पुणे में एक महिला पर हुए कथित तेजाब हमले और घरेलू क्रूरता के मामले का 23 मई 2025 को स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर मामले में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है। यह मामला उस समय सामने आया जब मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि पीड़िता के पति ने संदेह के आधार पर उसके साथ अत्यंत जघन्य व्यवहार किया।
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी पति ने अपनी पत्नी पर किसी अन्य पुरुष से संबंध होने का शक करते हुए उसके गुप्तांगों पर फर्श साफ करने वाला तेजाब डाल दिया। इसके बाद पीड़िता को कई दिनों तक घर में कैद रखा गया और उसे कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, यह न केवल शारीरिक प्रताड़ना का मामला है, बल्कि पीड़िता को जानबूझकर इलाज से वंचित रखना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है।
आयोग की अध्यक्ष की कड़ी निंदा
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने महाराष्ट्र के डीजीपी को लिखे पत्र में तत्काल, सख्त और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजाब हमला और घरेलू हिंसा जैसे अपराध अत्यंत जघन्य हैं और इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सबसे कठोर प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
डीजीपी से मांगी गई जानकारी
आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक से निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है — मामले में दर्ज एफआईआर और लगाई गई धाराएँ; जाँच की वर्तमान स्थिति; आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ; पीड़िता का इलाज एवं फॉरेंसिक जाँच; अपराध में इस्तेमाल तेजाब की बरामदगी; तथा पीड़िता और उसके बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदम।
पीड़िता और बच्चों की सुरक्षा पर जोर
आयोग ने महाराष्ट्र पुलिस से पीड़िता और उसके बच्चों को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने और उनके समुचित पुनर्वास की व्यवस्था करने को कहा है। NCW ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मामले में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आई, तो आयोग स्वयं आगे की कानूनी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।
व्यापक संदर्भ: तेजाब हमलों का बढ़ता खतरा
यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिलाओं के खिलाफ तेजाब हमलों के मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न राज्य सरकारें पहले से चिंता जता चुकी हैं। गौरतलब है कि तेजाब की बिक्री पर नियंत्रण के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, फिर भी ऐसी घटनाएँ सामने आती रहती हैं। NCW का यह हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि आयोग ऐसे मामलों में निष्क्रिय नहीं रहेगा। महाराष्ट्र पुलिस की प्रतिक्रिया और आगामी ATR यह तय करेगी कि पीड़िता को न्याय कितनी जल्दी मिलता है।