महाराष्ट्र में एग डोनेशन रैकेट का खुलासा, एनसीडब्ल्यू ने उठाया कदम
सारांश
Key Takeaways
- एनसीडब्ल्यू ने अवैध एग डोनेशन रैकेट पर संज्ञान लिया।
- कम से कम 40 महिलाओं का शोषण हुआ।
- एक महिला से 33 बार एग निकाले गए।
- यह रैकेट अवैध था, जो कानून का उल्लंघन कर रहा था।
- पुलिस ने चार महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया।
मुंबई, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के बदलापुर में एक बड़े अवैध मानव अंडे (एग) निकालने और बेचने के रैकेट का मामला सामने आया है, जिस पर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार और पुलिस को इस मामले की गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं।
21 फरवरी को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष ने महाराष्ट्र के डीजीपी को निर्देश दिए कि पूरे रैकेट का पता लगाकर समय सीमा के भीतर जांच पूरी की जाए। आयोग ने प्रभावित महिलाओं को तुरंत मेडिकल और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त, डीजीपी से पांच दिन के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस बीच, महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की है, जिसमें मामले की गंभीरता पर चर्चा की गई।
यह रैकेट तब उजागर हुआ जब एक महिला ने हेल्थ सेंटर में शिकायत की कि उसे एग डोनेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, लेकिन निर्धारित राशि नहीं दी गई। इस शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिससे पता चला कि कई महिलाओं को आर्थिक तंगी के कारण इस अवैध रैकेट में फंसाया गया था।
पुलिस को संदेह है कि इस रैकेट के तहत कम से कम 40 महिलाओं का शोषण किया गया। एक गंभीर मामले में, एक पीड़ित महिला से 33 बार अंडे निकाले गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बार एग निकालना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकता है, जिससे गंभीर शारीरिक जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा ऑपरेशन असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा था। इस कानून के अनुसार, किसी महिला को जीवन में केवल एक बार एग डोनेशन की अनुमति है और इसके बदले किसी तरह के व्यावसायिक लाभ पर रोक है।
पुलिस के अनुसार, इस रैकेट में शामिल लोग आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 25,000 से 30,000 रुपये देने का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें प्राइवेट घरों में हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे और फिर अंडे निकालने के लिए विभिन्न आईवीएफ सेंटर भेजा जाता था।
अब तक इस मामले में कम से कम चार महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें इस नेटवर्क की संदिग्ध सरगना सुलक्षणा गाडेकर का नाम भी शामिल है। पुलिस अन्य आरोपियों और जुड़े क्लीनिकों की पहचान करने में जुटी हुई है।