पुणे में सड़क किनारे प्रसव: राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया, 7 दिन में रिपोर्ट तलब
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 30 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुई उस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया, जिसमें एक महिला को कथित तौर पर शिरूर ग्रामीण अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया और उसे सड़क किनारे बच्चे को जन्म देने पर मजबूर होना पड़ा। आयोग ने पुणे जिला प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग से 7 दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है।
क्या है पूरा मामला
आयोग के अनुसार, प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल में कथित तौर पर भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उसे सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म देने की नौबत आई। स्थानीय लोगों और वहाँ से गुजर रहे एक डॉक्टर की समय पर मदद से माँ और नवजात दोनों की जान बच सकी। यह घटना आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर विफलता को उजागर करती है।
आयोग की प्रतिक्रिया और निर्देश
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुणे के जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले की तत्काल जाँच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जाँच में यह सुनिश्चित किया जाए कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, माँ और नवजात के लिए उचित प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
महिला अधिकारों का उल्लंघन
आयोग ने इस घटना को महिला के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। आयोग के अनुसार,