10 अगस्त 2026
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पुणे में सड़क किनारे प्रसव: राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया, 7 दिन में रिपोर्ट तलब

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पुणे में सड़क किनारे प्रसव: राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया, 7 दिन में रिपोर्ट तलब

सारांश

पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल ने कथित तौर पर एक प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को भर्ती करने से मना कर दिया — और उसे सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे गरिमा और प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए 7 दिन में जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल में कथित तौर पर भर्ती न किए जाने के बाद महिला को सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा।
स्थानीय लोगों और एक गुजरते डॉक्टर की मदद से माँ और नवजात दोनों की जान बची।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 30 अप्रैल 2026 को स्वत: संज्ञान लिया।
आयोग ने पुणे जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र के लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को जाँच के निर्देश दिए।
7 दिन के भीतर विस्तृत Action Taken Report माँगी गई है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 30 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुई उस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया, जिसमें एक महिला को कथित तौर पर शिरूर ग्रामीण अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया गया और उसे सड़क किनारे बच्चे को जन्म देने पर मजबूर होना पड़ा। आयोग ने पुणे जिला प्रशासन और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग से 7 दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है।

क्या है पूरा मामला

आयोग के अनुसार, प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल में कथित तौर पर भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उसे सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म देने की नौबत आई। स्थानीय लोगों और वहाँ से गुजर रहे एक डॉक्टर की समय पर मदद से माँ और नवजात दोनों की जान बच सकी। यह घटना आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर विफलता को उजागर करती है।

आयोग की प्रतिक्रिया और निर्देश

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुणे के जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले की तत्काल जाँच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट कहा कि जाँच में यह सुनिश्चित किया जाए कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, माँ और नवजात के लिए उचित प्रसवोत्तर देखभाल सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

महिला अधिकारों का उल्लंघन

आयोग ने इस घटना को महिला के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। आयोग के अनुसार,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ग्रामीण सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की एक बार फिर उजागर हुई संरचनात्मक विफलता है। जननी सुरक्षा योजना के दशकों बाद भी यदि एक महिला को सड़क पर प्रसव करना पड़ रहा है, तो सवाल सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही का नहीं, बल्कि पूरे जवाबदेही तंत्र की अनुपस्थिति का है। NCW का नोटिस ज़रूरी है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या रिपोर्ट के बाद दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दब जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे सड़क किनारे प्रसव मामला क्या है?
पुणे के शिरूर ग्रामीण अस्पताल में कथित तौर पर भर्ती न किए जाने के बाद एक महिला को सड़क किनारे बच्चे को जन्म देना पड़ा। स्थानीय लोगों और एक गुजरते डॉक्टर की मदद से माँ और नवजात दोनों बच गए।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
NCW ने 30 अप्रैल 2026 को स्वत: संज्ञान लेते हुए पुणे जिला कलेक्टर और महाराष्ट्र सरकार के लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को जाँच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने 7 दिन के भीतर विस्तृत Action Taken Report माँगी है।
इस मामले में किसकी जवाबदेही तय की जाएगी?
आयोग ने निर्देश दिया है कि जाँच में यह पता लगाया जाए कि किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही माँ और नवजात की प्रसवोत्तर देखभाल भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
क्या यह महिला के अधिकारों का उल्लंघन है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे महिला के प्रजनन स्वास्थ्य, निजता और गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया है। आयोग के अनुसार हर महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक संस्थागत प्रसव का अधिकार है।
भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए क्या किया जाएगा?
आयोग ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव संबंधी बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। 7 दिन में रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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