हासन अदालत का फैसला: गर्लफ्रेंड से दुष्कर्म और हत्या के दोषी प्रवीण को उम्रकैद
सारांश
Key Takeaways
कर्नाटक के हासन स्थित तृतीय अतिरिक्त सत्र अदालत ने 30 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसले में आरोपी प्रवीण को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह घटना 22 अप्रैल 2018 को हासन तालुक के कलकेरे गांव के निकट हुई थी, जब पीड़िता प्रवीण का जन्मदिन मनाने उसके पास पहुंची थी।
मुख्य घटनाक्रम
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हदलगरे निवासी प्रवीण ने प्रेम का झांसा देकर पीड़िता को अपने पास बुलाया था। जब वह उसका जन्मदिन मनाने पहुंची, तो प्रवीण ने उसके साथ दुष्कर्म किया और इसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए हासन ग्रामीण पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की और अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
दूसरे आरोपी को भी सजा
लंबी सुनवाई के पश्चात अदालत ने न केवल मुख्य आरोपी प्रवीण को उम्रकैद की सजा सुनाई, बल्कि दूसरे आरोपी थम्मन्ना को सबूत मिटाने के अपराध में दो साल की कठोर कैद की सजा भी दी। यह फैसला पीड़िता के परिजनों के लिए लगभग आठ साल बाद न्याय की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
कर्नाटक में इससे पहले के समान मामले
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक की अदालतें ऐसे संवेदनशील मामलों में कड़े फैसले सुना रही हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में भद्रावती की चौथी अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने 2016 में एक स्कूल शिक्षक की हत्या के मामले में एक महिला समेत दो लोगों को फांसी और एक अन्य को सात साल की सजा सुनाई थी।
उस मामले में दोषियों की पहचान 29 वर्षीया लक्ष्मी, उसके प्रेमी कृष्णमूर्ति उर्फ किट्टी (30) और शिवराजू उर्फ शिवु (32) के रूप में हुई थी — तीनों भद्रावती के जन्नापुरा स्थित एनटीबी रोड के निवासी थे। भद्रावती पुलिस के अनुसार, सरकारी स्कूल शिक्षिका लक्ष्मी ने 2011 में कलबुर्गी में इम्तियाज अहमद से विवाह किया था और 7 जुलाई 2016 को लोहे की रॉड से वार कर अपने पति की हत्या कर दी थी, जिसके बाद कृष्णमूर्ति और शिवराजू ने शव को नहर में फेंकने में उसकी मदद की थी।
आम जनता और न्यायिक प्रक्रिया पर असर
गौरतलब है कि हासन के इस मामले में पुलिस जांच से लेकर अंतिम फैसले तक लगभग आठ वर्ष का समय लगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई पीड़ित परिवारों को समय पर न्याय दिलाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस फैसले से क्षेत्र में महिला सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
आगे की राह
अदालत के इस फैसले के बाद अब देखना होगा कि आरोपी पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करता है या नहीं। पीड़िता के परिजन इस निर्णय को न्याय की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं। कर्नाटक में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर अदालतों का यह कड़ा रुख आने वाले समय में एक निवारक संदेश देता है।