मध्यप्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग पहल: CM मोहन यादव ने 27 हजार श्रमिक परिवारों को ₹600 करोड़ अंतरित किए

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मध्यप्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग पहल: CM मोहन यादव ने 27 हजार श्रमिक परिवारों को ₹600 करोड़ अंतरित किए

सारांश

मध्यप्रदेश में 30 अप्रैल को CM मोहन यादव ने संबल योजना के तहत ₹600 करोड़ सीधे श्रमिक परिवारों के खातों में भेजे और श्रम स्टार रेटिंग पहल को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। 3,529 गिग वर्कर्स को पहली बार इस योजना से जोड़ना राज्य की बदलती श्रम नीति की दिशा दिखाता है।

Key Takeaways

CM मोहन यादव ने 30 अप्रैल 2025 को ₹600 करोड़ की अनुग्रह सहायता 27 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों को सिंगल क्लिक से अंतरित की। प्रदेश में 3,529 गिग वर्कर्स को पहली बार संबल योजना का लाभ दिया गया। 554 कारखानों ने स्वेच्छा से श्रम स्टार रेटिंग व्यवस्था अपनाई। संबल योजना से अब तक 1 करोड़ 83 लाख श्रमिक जुड़े; ₹7,720 करोड़+ की सहायता वितरित। केंद्र की 4 नई श्रम संहिताओं के अनुरूप राज्य सरकार नियम तैयार करेगी। बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर, खरगौन को संबल योजना में श्रेष्ठ जिले घोषित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 30 अप्रैल 2025 को भोपाल स्थित मंत्रालयीन बैठक कक्ष से सिंगल क्लिक के माध्यम से मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना के तहत 27 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों को ₹600 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि अंतरित की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में शुरू की गई श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी पहल को और अधिक प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

संबल योजना का विस्तार और गिग वर्कर्स को लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अब संबल योजना का लाभ मिल रहा है। इसमें विभिन्न उपभोक्ता सामग्री पहुँचाने वाले गिग वर्कर्स और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश में 3,529 गिग वर्कर्स को पहली बार योजना का लाभ प्रदान करने के लिए श्रम विभाग की सराहना की।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गिग इकॉनमी तेज़ी से बढ़ रही है और इन कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की माँग लंबे समय से उठ रही है। गौरतलब है कि संबल योजना वर्ष 2018 में प्रारंभ हुई थी और अब तक 1 करोड़ 83 लाख श्रमिक इससे जुड़ चुके हैं।

श्रम स्टार रेटिंग: क्या है यह पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी व्यवस्था शुरू की गई है, जिसके तहत औद्योगिक संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का मूल्यांकन किया जाएगा। श्रेष्ठ कार्य करने वाले प्रतिष्ठानों को इस रेटिंग के माध्यम से आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे श्रम कानूनों का बेहतर पालन करने वाले औद्योगिक संस्थानों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। अब तक 554 कारखानों ने स्वेच्छा से इस व्यवस्था को अपनाया है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों और श्रम संगठनों से भी अपील की कि जिस प्रतिष्ठान से वे खरीदारी करें, वहाँ श्रम स्टार रेटिंग लागू करने को प्रोत्साहित करें।

केंद्र की 4 नई श्रम संहिताएँ और राज्य की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने 4 नई श्रम संहिताओं का प्रावधान किया है। राज्य सरकार इन संहिताओं के अनुरूप नियम तैयार कर उन्हें लागू करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिक हित में लागू योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों तक पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

संबल योजना की उपलब्धियाँ और श्रेष्ठ जिले

श्रम एवं पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि संबल योजना के तहत अब तक 8 लाख 27 हजार से अधिक प्रकरणों में ₹7,720 करोड़ से अधिक की सहायता हितग्राहियों को दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने संबल योजना में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगौन जिलों की तर्ज पर अन्य जिलों से भी सक्रिय प्रदर्शन की अपेक्षा जताई।

इस अवसर पर सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय आलोक सिंह, श्रम विभाग के सचिव एम. रघुराज तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारी, श्रमिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग के अपर सचिव संजय कुमार को उनके सेवानिवृत्ति दिवस पर मंगलकामनाएँ भी दीं। आने वाले समय में श्रम स्टार रेटिंग को और अधिक उद्योगों तक विस्तारित करने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयास जारी रहेंगे।

Point of View

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह रेटिंग स्वैच्छिक से अनिवार्य की ओर बढ़ेगी। अभी केवल 554 कारखानों ने इसे अपनाया है, जबकि प्रदेश में हजारों औद्योगिक इकाइयाँ हैं। गिग वर्कर्स को संबल से जोड़ना सराहनीय है, परंतु 3,529 की संख्या उस विशाल असंगठित कार्यबल के मुकाबले बेहद छोटी है जो अभी भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर है। सरकार की नीयत पर सवाल नहीं, लेकिन क्रियान्वयन की गति और पारदर्शी निगरानी तंत्र के बिना ये घोषणाएँ आँकड़ों की कवायद बनकर रह जाती हैं।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना क्या है?
संबल योजना मध्यप्रदेश सरकार की वर्ष 2018 में शुरू की गई असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसके तहत अनुग्रह सहायता, स्वास्थ्य सुविधा और अन्य कल्याणकारी लाभ दिए जाते हैं और अब तक 1 करोड़ 83 लाख श्रमिक इससे जुड़ चुके हैं।
श्रम स्टार रेटिंग योजना कैसे काम करती है?
इस व्यवस्था में औद्योगिक प्रतिष्ठानों को श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन के आधार पर रेटिंग दी जाती है। श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और अब तक 554 कारखानों ने स्वेच्छा से इसे अपनाया है।
गिग वर्कर्स को संबल योजना में कब से शामिल किया गया?
30 अप्रैल 2025 को CM मोहन यादव ने घोषणा की कि गिग वर्कर्स और प्लेटफार्म वर्कर्स को संबल योजना में शामिल किया गया है। इस अवसर पर प्रदेश के 3,529 गिग वर्कर्स को पहली बार योजना का लाभ प्रदान किया गया।
संबल योजना में अब तक कितनी सहायता दी जा चुकी है?
श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के अनुसार, योजना शुरू होने से अब तक 8 लाख 27 हजार से अधिक प्रकरणों में ₹7,720 करोड़ से अधिक की सहायता हितग्राहियों को दी जा चुकी है।
केंद्र की 4 नई श्रम संहिताएँ मध्यप्रदेश में कब लागू होंगी?
CM मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र की 4 नई श्रम संहिताओं के अनुरूप नियम तैयार कर उन्हें लागू करेगी, हालाँकि अभी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।
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