नवी मुंबई पुलिस लॉकअप में संजय यादव की मौत, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
नवी मुंबई के एन.आर.आई. सागरी पुलिस थाने के लॉकअप में बंद एक आरोपी की 8 अक्टूबर 2026 की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई और अधिकारियों ने तत्काल मजिस्ट्रेट जांच एवं पोस्टमार्टम के आदेश दे दिए। मृतक की पहचान संजय कंटू यादव (38 वर्ष), निवासी अनंता टॉवर, उलवे, नवी मुंबई — मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले — के रूप में हुई है।
गिरफ्तारी और रिमांड का क्रम
पुलिस के अनुसार, संजय यादव को नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय विमानतल पुलिस थाने में दर्ज क्राइम रजिस्टर नंबर 18/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) और 3(5) के अंतर्गत 4 अक्टूबर 2026 को सुबह 3 बजकर 33 मिनट पर गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से पूर्व नियमानुसार पनवेल ग्रामीण रुग्णालय में उनकी मेडिकल जांच कराई गई, जिसमें कथित तौर पर कोई पूर्व बीमारी या शिकायत सामने नहीं आई।
अदालत ने पहले 4 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक और फिर 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की। पुलिस का दावा है कि रिमांड के दौरान अदालत में पेश होने पर आरोपी ने किसी प्रकार की प्रताड़ना या मारपीट की कोई शिकायत नहीं की थी।
मुख्य घटनाक्रम: लॉकअप से अस्पताल तक
पुलिस के मुताबिक, लॉकअप में तैनात गार्ड ने देखा कि संजय यादव अचानक हाथों की मुट्ठियाँ भींचने लगे और हाथ-पैर असामान्य रूप से टेढ़े करने लगे। हालत बिगड़ते देख थाने के कर्मियों ने तत्काल उन्हें मीनाताई ठाकरे रुग्णालय, नेरुल पहुँचाया। उन्हें 8 अक्टूबर की रात 12 बजकर 50 मिनट पर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उपचार के दौरान रात 1 बजकर 36 मिनट पर चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामदास आंबुर्डे ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस तरह गिरफ्तारी के महज चार दिन के भीतर उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस की प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया
मौत के बाद पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु (AKD) का मामला दर्ज कर लिया है। नियमानुसार मजिस्ट्रेट जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि हिरासत में होने वाली मौतों की न्यायिक जांच भारतीय कानून के तहत अनिवार्य है — यह प्रक्रिया पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल जांच के दौरान आरोपी ने किसी पुरानी बीमारी का ज़िक्र नहीं किया था और रिमांड के वक्त अदालत में भी उन्होंने कोई आरोप नहीं लगाया था। हालाँकि, मृत्यु के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
आम जनता और परिवार पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हिरासत में मौतों को लेकर देशभर में बहस जारी है। संजय यादव के परिजन वाराणसी से ताल्लुक रखते हैं और उनके परिवार की स्थिति तथा उनकी प्रतिक्रिया के बारे में अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मजिस्ट्रेट जांच में गवाहों के बयान, लॉकअप का निरीक्षण और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा शामिल होगी।
आगे क्या होगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि मामले में आगे कोई कार्रवाई होती है या नहीं। यदि जांच में लापरवाही या ज़्यादती के संकेत मिले, तो संबंधित पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई संभव है। नवी मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय की ओर से अब तक कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।