रौशन यादव की जेल में मौत: प्रशांत किशोर ने मधुबनी SSP को दिया 10 दिन का अल्टीमेटम
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार, 15 अगस्त को मधुबनी के बिलाट गांव के 19 वर्षीय रौशन यादव की जेल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में पीड़ित परिवार के साथ मधुबनी एसएसपी कार्यालय पहुँचकर निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर न्याय नहीं मिला, तो वे फिर मधुबनी लौटेंगे और मामले को पुलिस महानिदेशक (DGP) तथा मुख्य सचिव तक ले जाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
परिवार के अनुसार, रौशन यादव को 27 मई को रहीका थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन परिवार को इसकी लिखित सूचना नहीं दी गई। परिवार को करीब तीन दिन बाद पता चला कि रौशन रहीका थाने में है। थाने में मुलाकात के दौरान रौशन ने परिजनों को कथित तौर पर मारपीट और करंट लगाने सहित प्रताड़ना की बात बताई थी।
परिवार के मुताबिक, 31 मई को पुलिस ने रौशन को छोड़ा, किंतु लगभग आधे घंटे बाद उसे आर्म्स एक्ट के एक अलग मामले में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का पक्ष है कि गोली चलने की एक घटना के संबंध में उसे आर्म्स एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था। इसके बाद रौशन को जेल भेजा गया, जहाँ करीब दो महीने बाद उसकी मौत हो गई।
मौत की परिस्थितियाँ और जांच की स्थिति
पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से मौत को आत्महत्या बताया जा रहा है, जबकि परिवार का आरोप है कि मारपीट और प्रताड़ना के कारण रौशन की जान गई। प्रशांत किशोर ने बताया कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। इसके अतिरिक्त जिलाधिकारी स्तर से भी जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आने की उम्मीद जताई गई है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुलिस हिरासत और जेल में होने वाली मौतों को लेकर मानवाधिकार संगठन पहले से सवाल उठाते रहे हैं।
SSP का आश्वासन और प्रशांत किशोर की माँगें
एसएसपी ने आश्वासन दिया कि जांच में यह देखा जाएगा कि रौशन को किस आधार पर गिरफ्तार किया गया, परिवार को लिखित सूचना क्यों नहीं दी गई, क्या उसे बिना अदालत में पेश किए थाने में रखा गया, और मारपीट तथा प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है। प्रशांत किशोर ने कहा, 'एसएसपी ने 10 दिन के अंदर जांच कर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अगर 10 दिनों में न्याय नहीं मिला तो मैं फिर मधुबनी एसएसपी कार्यालय आऊंगा।'
पीड़ित परिवार की स्थिति
प्रशांत किशोर ने बताया कि रौशन का परिवार बेहद गरीब है और उसकी मौत ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने जोर दिया कि इस मामले में राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवता के आधार पर न्याय होना चाहिए।
आगे क्या होगा
यदि 10 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो प्रशांत किशोर ने DGP और मुख्य सचिव से मुलाकात का ऐलान किया है। इस मामले में NHRC की निगरानी और जिलाधिकारी स्तर की जांच जारी रहने से आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।