जलगांव पुलिस ने शिवानी को मान लिया था मृत, मध्य प्रदेश में जिंदा मिलने पर हत्या मामले में बड़ा मोड़
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की जलगांव पुलिस ने 26 वर्षीया शिवानी को मृत घोषित कर उसके पिता बापूराम कालमेकर और भाई अजय कालमेकर को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था — लेकिन 28 मई 2026 को शिवानी मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जीवित पाई गई और उसने पुलिस के सामने पेश होकर अपने परिजनों की बेगुनाही की माँग की। इस घटनाक्रम ने जलगांव पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शव की पहचान डीएनए परीक्षण किए बिना ही की गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
बुरहानपुर के पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागड़ी के अनुसार, शिवानी और अरुण के लापता होने की शिकायतें उनके परिवारों ने 1 मई और 9 मई को खाकनार पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थीं। इसी दौरान जलगांव पुलिस के अधिकार क्षेत्र में एक अज्ञात युवती का बिना सिर वाला और आंशिक रूप से जला हुआ शव बरामद हुआ, जिसकी उम्र शिवानी जितनी प्रतीत होती थी।
जलगांव पुलिस ने उस शव की पहचान शिवानी के रूप में कर दी और मामले में हत्या की धाराएँ जोड़ते हुए उसके पिता व भाई को गिरफ्तार कर लिया। एसपी बागड़ी ने बताया, 'बाद में एक जाँच की गई और शिकायत में हत्या की धाराएँ जोड़ दी गईं। लड़की के पिता और भाई को गिरफ्तार कर लिया गया।'
नाटकीय मोड़: शिवानी बुरहानपुर में जीवित
मामले में उस समय बड़ा मोड़ आया जब शिवानी स्वयं बुरहानपुर पुलिस के सामने उपस्थित हुई। उसने स्पष्ट किया कि वह अरुण के साथ थी और उसके पिता व भाई इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। एसपी बागड़ी ने इस स्थिति को 'विरोधाभासी' बताते हुए कहा, 'यहाँ शिवानी अरुण के साथ जिंदा मिली, जबकि महाराष्ट्र में उसके नाम पर हत्या का मामला दर्ज था।'
पुलिस ने शिवानी की पहचान की पुष्टि बायोमेट्रिक्स के माध्यम से की, जिससे यह स्थापित हुआ कि वह वही व्यक्ति है जिसके लापता होने की शिकायत दर्ज थी।
पुलिस प्रक्रिया पर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने जलगांव पुलिस की जाँच पद्धति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि बरामद शव का डीएनए परीक्षण कराए बिना ही उसे शिवानी का शव घोषित कर दो निर्दोष व्यक्तियों को गिरफ्तार करना प्रक्रियागत चूक का स्पष्ट उदाहरण है। गौरतलब है कि भारत में अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण एक मानक प्रक्रिया मानी जाती है।
एसपी बागड़ी ने बताया, 'हमने जलगांव पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया है और लड़की को उन्हें सौंप दिया है। वे आगे की जाँच कर रहे हैं।'
आगे की राह
अब जलगांव पुलिस के समक्ष दोहरी चुनौती है — एक ओर बापूराम कालमेकर और अजय कालमेकर की रिहाई की कानूनी प्रक्रिया, और दूसरी ओर उस अज्ञात युवती की वास्तविक पहचान जिसका शव बरामद हुआ था। यह मामला न्यायिक जाँच और पुलिस जवाबदेही की माँग को और तेज कर सकता है।