13 जुलाई 2026
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जलगांव पुलिस ने शिवानी को मान लिया था मृत, मध्य प्रदेश में जिंदा मिलने पर हत्या मामले में बड़ा मोड़

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जलगांव पुलिस ने शिवानी को मान लिया था मृत, मध्य प्रदेश में जिंदा मिलने पर हत्या मामले में बड़ा मोड़

सारांश

जलगांव पुलिस ने बिना डीएनए जाँच के एक अज्ञात शव को शिवानी का बताकर उसके पिता-भाई को हत्या में जेल भेज दिया — और जब शिवानी खुद बुरहानपुर में जीवित सामने आई, तो पूरा मामला पलट गया। यह घटना पुलिस की पहचान प्रक्रिया की गंभीर खामी उजागर करती है।

मुख्य बातें

जलगांव पुलिस ने 26 वर्षीया शिवानी को मृत मानकर उसके पिता बापूराम कालमेकर और भाई अजय कालमेकर को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था।
शव की पहचान डीएनए परीक्षण किए बिना केवल उम्र के आधार पर की गई — जिसे प्रक्रियागत चूक माना जा रहा है।
28 मई 2026 को शिवानी बुरहानपुर, मध्य प्रदेश में अरुण के साथ जीवित पाई गई।
शिवानी ने बुरहानपुर पुलिस के सामने पेश होकर पिता व भाई की बेगुनाही की माँग की।
बुरहानपुर एसपी आशुतोष बागड़ी ने शिवानी को जलगांव पुलिस को सौंपा; आगे की जाँच जारी है।
बरामद अज्ञात शव की वास्तविक पहचान अभी भी अनुत्तरित सवाल बनी हुई है।

महाराष्ट्र की जलगांव पुलिस ने 26 वर्षीया शिवानी को मृत घोषित कर उसके पिता बापूराम कालमेकर और भाई अजय कालमेकर को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था — लेकिन 28 मई 2026 को शिवानी मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में जीवित पाई गई और उसने पुलिस के सामने पेश होकर अपने परिजनों की बेगुनाही की माँग की। इस घटनाक्रम ने जलगांव पुलिस की जाँच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि शव की पहचान डीएनए परीक्षण किए बिना ही की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

बुरहानपुर के पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागड़ी के अनुसार, शिवानी और अरुण के लापता होने की शिकायतें उनके परिवारों ने 1 मई और 9 मई को खाकनार पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थीं। इसी दौरान जलगांव पुलिस के अधिकार क्षेत्र में एक अज्ञात युवती का बिना सिर वाला और आंशिक रूप से जला हुआ शव बरामद हुआ, जिसकी उम्र शिवानी जितनी प्रतीत होती थी।

जलगांव पुलिस ने उस शव की पहचान शिवानी के रूप में कर दी और मामले में हत्या की धाराएँ जोड़ते हुए उसके पिता व भाई को गिरफ्तार कर लिया। एसपी बागड़ी ने बताया, 'बाद में एक जाँच की गई और शिकायत में हत्या की धाराएँ जोड़ दी गईं। लड़की के पिता और भाई को गिरफ्तार कर लिया गया।'

नाटकीय मोड़: शिवानी बुरहानपुर में जीवित

मामले में उस समय बड़ा मोड़ आया जब शिवानी स्वयं बुरहानपुर पुलिस के सामने उपस्थित हुई। उसने स्पष्ट किया कि वह अरुण के साथ थी और उसके पिता व भाई इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं। एसपी बागड़ी ने इस स्थिति को 'विरोधाभासी' बताते हुए कहा, 'यहाँ शिवानी अरुण के साथ जिंदा मिली, जबकि महाराष्ट्र में उसके नाम पर हत्या का मामला दर्ज था।'

पुलिस ने शिवानी की पहचान की पुष्टि बायोमेट्रिक्स के माध्यम से की, जिससे यह स्थापित हुआ कि वह वही व्यक्ति है जिसके लापता होने की शिकायत दर्ज थी।

पुलिस प्रक्रिया पर सवाल

इस पूरे प्रकरण ने जलगांव पुलिस की जाँच पद्धति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि बरामद शव का डीएनए परीक्षण कराए बिना ही उसे शिवानी का शव घोषित कर दो निर्दोष व्यक्तियों को गिरफ्तार करना प्रक्रियागत चूक का स्पष्ट उदाहरण है। गौरतलब है कि भारत में अज्ञात शवों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण एक मानक प्रक्रिया मानी जाती है।

एसपी बागड़ी ने बताया, 'हमने जलगांव पुलिस को इस बारे में सूचित कर दिया है और लड़की को उन्हें सौंप दिया है। वे आगे की जाँच कर रहे हैं।'

आगे की राह

अब जलगांव पुलिस के समक्ष दोहरी चुनौती है — एक ओर बापूराम कालमेकर और अजय कालमेकर की रिहाई की कानूनी प्रक्रिया, और दूसरी ओर उस अज्ञात युवती की वास्तविक पहचान जिसका शव बरामद हुआ था। यह मामला न्यायिक जाँच और पुलिस जवाबदेही की माँग को और तेज कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे मामले दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवानी का मामला क्या है और इसमें क्या हुआ?
जलगांव पुलिस ने एक अज्ञात शव को 26 वर्षीया शिवानी का बताकर उसके पिता और भाई को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। बाद में शिवानी स्वयं बुरहानपुर, मध्य प्रदेश में जीवित पाई गई, जिससे पूरा मामला पलट गया।
पुलिस ने शव की गलत पहचान कैसे की?
जलगांव पुलिस ने बरामद शव की पहचान केवल उम्र की समानता के आधार पर शिवानी के रूप में कर दी, जबकि डीएनए परीक्षण नहीं कराया गया। यह प्रक्रियागत चूक इस पूरे मामले की जड़ है।
शिवानी के पिता और भाई को अब क्या होगा?
शिवानी के जीवित मिलने के बाद जलगांव पुलिस आगे की जाँच कर रही है। शिवानी ने स्वयं पुलिस के सामने पेश होकर पिता बापूराम कालमेकर और भाई अजय कालमेकर की रिहाई की माँग की है।
बुरहानपुर पुलिस ने शिवानी की पहचान कैसे सुनिश्चित की?
बुरहानपुर के एसपी आशुतोष बागड़ी के अनुसार, शिवानी की पहचान बायोमेट्रिक्स के ज़रिए की गई, जिससे पुष्टि हुई कि वह वही व्यक्ति है जिसके लापता होने की शिकायत खाकनार पुलिस स्टेशन में दर्ज थी।
बरामद अज्ञात शव की असली पहचान क्या है?
यह अभी भी अनुत्तरित है। शिवानी के जीवित मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बरामद शव किसी और का था, लेकिन उस युवती की वास्तविक पहचान अभी तक सामने नहीं आई है और जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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