छतरपुर में 34 दिन बाद कब्र से निकाला बुजुर्ग का शव, जमीन विवाद में जहर देकर हत्या की आशंका
सारांश
Key Takeaways
- राजदेव खंगार (65-70 वर्ष), ग्राम बदौराकला, छतरपुर की 21 मार्च 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई।
- मौत के 34 दिन बाद, 24 अप्रैल को प्रशासनिक आदेश पर शव कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया।
- भतीजे सुनील खंगार ने भानुप्रताप यादव, अभिषेक यादव और छोटू यादव पर जहर देकर हत्या का आरोप लगाया।
- मृतक के पास 4-5 एकड़ जमीन थी और कोई सगी संतान नहीं थी — जमीन विवाद मुख्य संदिग्ध कारण।
- प्रकाश बम्होरी थाना पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत और आवेदन नजरअंदाज करने का आरोप।
- बिसरा रिपोर्ट फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई, रिपोर्ट आने पर मामले की दिशा तय होगी।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम बदौराकला में 65-70 वर्षीय बुजुर्ग राजदेव खंगार की संदिग्ध मौत का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। 21 मार्च 2025 को हुई मौत के करीब 34 दिन बाद, शुक्रवार को प्रशासन के आदेश पर उनके शव को कब्र से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों का आरोप है कि बुजुर्ग को जहर देकर हत्या की गई और यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे सामने आया मामला
21 मार्च को गांव के भानुप्रताप यादव, उनके पुत्र अभिषेक यादव और छोटू यादव राजदेव खंगार को अपने साथ ले गए थे। अगले दिन वे शव लेकर लौटे और मौत की सूचना दी। इसके बाद बिना किसी मेडिकल जांच या पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया गया, जिससे संदेह की स्थिति और गहरी हो गई।
मृतक के भतीजे सुनील खंगार ने शुरुआत से ही इस मौत को संदिग्ध बताते हुए आरोप लगाया कि उनके चाचा को जहरीला पदार्थ खिलाकर मारा गया। उन्होंने 25 मार्च को एसपी, कलेक्टर और डीआईजी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे भोपाल जाकर डीजीपी से भी गुहार लगा चुके हैं।
पुलिस पर गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि जब वे प्रकाश बम्होरी थाना पहुंचे, तो थाना प्रभारी ने उनकी बात तक नहीं सुनी और उनका आवेदन फेंक दिया। परिवार का यह भी आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों से साठगांठ कर पोस्टमार्टम नहीं कराया और जल्दबाजी में शव को दफनाने दिया।
दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि मृतक की गोद ली गई बेटी ने बयान दिया है कि राजदेव खंगार ने स्वयं जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में मौत हुई। पुलिस के अनुसार, परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उस समय पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका।
जमीन विवाद की आशंका: असली कोण
एसडीओपी नवीन दुबे के अनुसार, मामला प्रथम दृष्टया जमीन विवाद से जुड़ा प्रतीत होता है। राजदेव खंगार के पास 4-5 एकड़ जमीन थी और उनकी कोई सगी संतान नहीं थी। केवल गोद ली हुई बेटी उनके साथ रहती थी, जिससे संपत्ति को लेकर विवाद की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
यह मामला उस व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करता है जिसमें ग्रामीण इलाकों में निःसंतान बुजुर्गों की संपत्ति हड़पने के लिए उनकी हत्या की जाती है। मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां जमीन विवाद में बुजुर्गों को निशाना बनाया गया। यह घटना ग्रामीण संपत्ति अधिकारों और बुजुर्ग सुरक्षा कानूनों की खामियों को भी उजागर करती है।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की स्थिति
फिलहाल प्रशासन ने शव का पोस्टमार्टम करा लिया है और बिसरा (viscera) को सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेज दिया गया है। अब सभी की नजरें फोरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद ही मौत के असली कारण का खुलासा होगा।
गौरतलब है कि यदि 34 दिन बाद निकाले गए शव की विसरा रिपोर्ट में जहर की पुष्टि होती है, तो यह मामला हत्या में बदल जाएगा और आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज होगा। पुलिस की निष्क्रियता पर भी विभागीय जांच की मांग उठ सकती है।