28 अक्टूबर 2026
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मौलाना मुश्ताक मलिक: मस्जिद-मदरसे गिराने से इस्लाम खत्म नहीं होगा, BJP-RSS पर तीखा हमला

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मौलाना मुश्ताक मलिक: मस्जिद-मदरसे गिराने से इस्लाम खत्म नहीं होगा, BJP-RSS पर तीखा हमला

सारांश

हैदराबाद के तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने BJP-RSS पर सीधा हमला बोला — 2,000 से अधिक मस्जिदें-मदरसे गिराने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से न तो इस्लाम मिटेगा, न मुसलमान डरेंगे। लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने वालों को परिणाम भुगतने होंगे।

मुख्य बातें

मौलाना मुश्ताक मलिक ने 28 अक्टूबर 2026 को BJP और RSS पर मस्जिदों-मदरसों को गिराने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार अब तक कथित तौर पर 2,000 से अधिक मस्जिदें और मदरसे ध्वस्त किए जा चुके हैं।
मौलाना ने कहा — प्रधानमंत्री मोदी , गृह मंत्री शाह या RSS प्रमुख भागवत इस्लाम को समाप्त नहीं कर सकते।
लोकतंत्र को कमज़ोर करने वालों को राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे — मौलाना मलिक की चेतावनी।
BJP और RSS की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

तेलंगाना के हैदराबाद स्थित तहरीक मुस्लिम शब्बान संगठन के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने 28 अक्टूबर 2026 को देश में मस्जिदों और मदरसों पर हो रही कार्रवाइयों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से न तो इस्लाम को मिटाया जा सकता है और न ही मुसलमानों को डराया जा सकता है।

मुख्य बयान और आरोप

मौलाना मलिक ने अपने बयान में कहा, '2014 से देश में BJP और RSS की सरकार है। यह सरकार मुसलमानों की मस्जिदों, मदरसों और कब्रिस्तानों को ध्वस्त करके यह मान रही है कि इससे इस्लाम या मुसलमान खत्म हो जाएंगे। इस तरह की सोच रखने वाले लोग न तो दुनिया के इतिहास से वाकिफ हैं और न ही शायद अपने इतिहास से।'

उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कथित तौर पर 2,000 से अधिक मस्जिदों और मदरसों को गिराया जा चुका है। मुस्लिम-बहुल इलाकों और शहरों के नाम बदलने को भी उन्होंने इसी कड़ी का हिस्सा बताया।

धार्मिक संदर्भ और ऐतिहासिक दृष्टिकोण

मौलाना मलिक ने कुरान की आयत 'इन्ना दीन इंदल्लाही अल-इस्लाम' का हवाला देते हुए कहा कि जिस मजहब को अल्लाह ने पसंद किया है, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह या RSS प्रमुख मोहन भागवत या कोई अन्य शक्ति समाप्त नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि मस्जिदों और धार्मिक संरचनाओं पर तोड़फोड़ का मुद्दा देश में बीते कुछ वर्षों में बार-बार विवाद का केंद्र बना है। विभिन्न राज्यों में अवैध निर्माण हटाने के अभियानों को लेकर मुस्लिम संगठनों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति सामने आती रही है।

लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर चिंता

मौलाना मलिक ने यह भी कहा कि भारत एक संविधान और कानून आधारित देश है, जो लोकतंत्र की नींव पर खड़ा है। उनके अनुसार, 'यदि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जाएगा, तो जो लोग इसे कमज़ोर कर रहे हैं, उनकी राजनीतिक जिंदगी और पूरे तंत्र को भी इसके परिणाम भुगतने होंगे।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है वह देश के हित में नहीं है और इस तरह से न तो देश चल सकता है और न ही तरक्की कर सकता है। सत्ताधारियों को संयम और विवेक से काम लेने की उनकी अपील रही।

आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर

मौलाना मलिक के अनुसार इस तरह की कार्रवाइयाँ मुस्लिम समुदाय में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस देश में पूरी शान और सम्मान के साथ जीते रहेंगे और उन्हें किसी भी कार्रवाई से न डराया जा सकता है, न ही खत्म किया जा सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर न्यायिक और राजनीतिक बहसें तेज हैं। आलोचकों का कहना है कि कुछ मामलों में यह कार्रवाई प्रक्रियागत खामियों के साथ की जाती है।

आगे की स्थिति

मौलाना मलिक के इस बयान पर अभी BJP या RSS की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस में एक नई परत जोड़ता है, जो आने वाले दिनों में और व्यापक विमर्श का हिस्सा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक ढाँचों के ध्वस्त होने का आँकड़ा सत्यापित क्यों नहीं है और सरकार ने उस पर कोई आधिकारिक डेटा क्यों नहीं रखा। सर्वोच्च न्यायालय खुद बुलडोजर कार्रवाइयों की प्रक्रियागत वैधता पर सवाल उठा चुका है। जब संवैधानिक संस्थाएँ भी सतर्कता दिखाएँ और सत्ताधारी दल जवाबदेही से बचे, तो यह बहस केवल धार्मिक नहीं, संवैधानिक स्वास्थ्य की भी बन जाती है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना मुश्ताक मलिक कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
मौलाना मुश्ताक मलिक हैदराबाद स्थित तहरीक मुस्लिम शब्बान संगठन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने 28 अक्टूबर 2026 को BJP और RSS पर कथित तौर पर 2,000 से अधिक मस्जिदें और मदरसे गिराने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से इस्लाम या मुसलमानों को खत्म नहीं किया जा सकता।
मस्जिद और मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा क्यों अहम है?
यह मुद्दा संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया के पालन से जुड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय पहले भी अवैध बुलडोजर कार्रवाइयों पर सवाल उठा चुका है। अल्पसंख्यक संगठनों का कहना है कि कई मामलों में नोटिस दिए बिना या उचित प्रक्रिया के बिना ढाँचे गिराए गए।
मौलाना मलिक ने लोकतंत्र के बारे में क्या चेतावनी दी?
उन्होंने कहा कि भारत संविधान और कानून से चलने वाला लोकतांत्रिक देश है। जो लोग लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहे हैं, उनकी राजनीतिक जिंदगी और पूरा तंत्र भी इसके परिणाम भुगतेगा। सत्ताधारियों को विवेक और संयम से काम लेना चाहिए।
BJP और RSS ने मौलाना मलिक के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभी तक BJP और RSS की ओर से मौलाना मलिक के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह बयान राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकारों की बहस में एक नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
तहरीक मुस्लिम शब्बान संगठन क्या है?
तहरीक मुस्लिम शब्बान हैदराबाद, तेलंगाना स्थित एक मुस्लिम संगठन है जिसके अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक हैं। यह संगठन मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और धार्मिक मुद्दों पर अपना पक्ष रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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