28 अक्टूबर 2026
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तमिलनाडु: 13 साल बाद ऑटो किराये में बढ़ोतरी, चालकों ने किया स्वागत; रैपिडो-ओला पर बैन की माँग

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तमिलनाडु: 13 साल बाद ऑटो किराये में बढ़ोतरी, चालकों ने किया स्वागत; रैपिडो-ओला पर बैन की माँग

सारांश

13 साल के इंतज़ार के बाद तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराये में बढ़ोतरी हुई, लेकिन चालक पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। रैपिडो-ओला की बढ़ती पकड़, 'वेट्री पयनम' की मार और परमिट का बोझ — इन तीन मोर्चों पर एक साथ जूझ रहे चालकों की असली लड़ाई अभी बाकी है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को राज्यभर में ऑटो-रिक्शा मीटर किराये में आधिकारिक बदलाव किया — अगस्त 2013 के बाद 13 वर्षों में पहली बार।
पलानी रेलवे स्टेशन आउटर ऑटो-रिक्शा एसोसिएशन के कालिदास ने बढ़ोतरी को सकारात्मक बताया, लेकिन इसे अपर्याप्त कहा।
चालकों ने रैपिडो और ओला जैसी ऐप-आधारित सेवाओं पर प्रतिबंध की माँग की है।
'वेट्री पयनम' योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा से ऑटो चालकों की आजीविका प्रभावित बताई जा रही है।
मुरुगन मंदिर क्षेत्र में मिनी-बसों के 15-20 दैनिक चक्करों से परंपरागत ऑटो व्यवसाय पर दबाव बढ़ा; आरटीओ में शिकायत दर्ज।

तमिलनाडु सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 को राज्यभर में ऑटो-रिक्शा मीटर किराये में आधिकारिक बदलाव की घोषणा की — अगस्त 2013 के बाद यह पहली बार है जब 13 वर्षों में किराया ढाँचे को संशोधित किया गया है। चालकों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही रैपिडो और ओला जैसी ऐप-आधारित सेवाओं पर पाबंदी लगाने की भी माँग उठाई है।

चालकों की प्रतिक्रिया

पलानी रेलवे स्टेशन आउटर ऑटो-रिक्शा एसोसिएशन के सदस्य कालिदास ने कहा, 'मंगलवार रात मुख्यमंत्री ने मीटर के किराये में बढ़ोतरी की घोषणा की। हालाँकि, सभी ऑटो-रिक्शा चालकों को यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं लगेगी।' उन्होंने बताया कि वाहन परमिट पर सालाना बड़ा खर्च उठाने के बाद मामूली बढ़ोतरी से गुजारा करना कठिन बना रहता है।

कालिदास ने जोड़ा, 'हमें भी अपने परिवारों का पेट पालना होता है — सरकार ने शायद इस बात को नज़रअंदाज़ कर दिया।' यह टिप्पणी उन्होंने डिंडीगुल में की।

'वेट्री पयनम' योजना का असर

कालिदास ने बताया कि 'वेट्री पयनम' (सफल यात्रा) योजना के अंतर्गत महिलाओं को मिलने वाली मुफ्त यात्रा सुविधा ने कई ऑटो-रिक्शा चालकों की आजीविका पर 'बहुत बुरा असर' डाला है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारे अपने परिवारों में भी महिलाएँ हैं और हम उनकी मदद करते हैं, लेकिन इस योजना से हमारी कमाई घट गई है।'

ऐप-आधारित सेवाओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा

चालकों के अनुसार ओला और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित ऑटो-रिक्शा सेवाओं ने परंपरागत चालकों के कारोबार को गहरा झटका दिया है। कालिदास ने कहा, 'हमारी रोज़ी-रोटी लंबे समय से मुरुगन मंदिर पर आने वाले यात्रियों पर निर्भर रही है, लेकिन अब यहाँ मिनी-बसें दिन में 15 से 20 चक्कर लगाती हैं।' उन्होंने बताया कि इस संबंध में आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) में शिकायत भी दर्ज कराई जा चुकी है।

ऑटो संघ की प्रमुख माँग

कालिदास ने ऑटो-रिक्शा चालक संघ की ओर से कहा, 'अगर रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं पर रोक लगा दी जाए, तो इससे हमारी आजीविका को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।' यह माँग ऐसे समय में आई है जब पूरे देश में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं और परंपरागत वाहन चालकों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

किराया संशोधन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा का आधिकारिक किराया ढाँचा आखिरी बार अगस्त 2013 में निर्धारित किया गया था — यानी 13 वर्षों तक चालकों को पुराने दरों पर ही काम करना पड़ा, जबकि ईंधन की कीमतें, परमिट शुल्क और जीवन-यापन की लागत सभी बढ़ती रहीं। इस लंबे अंतराल को देखते हुए चालक संगठन बढ़ोतरी को सैद्धांतिक रूप से सकारात्मक तो मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह बढ़ोतरी वास्तविक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। अब सरकार के अगले कदम — विशेष रूप से ऐप-आधारित सेवाओं पर नीतिगत रुख — पर चालक समुदाय की नज़र टिकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े संरचनात्मक संकट को नहीं सुलझाता जिसमें परंपरागत ऑटो चालक फँसे हैं — एक तरफ सरकारी कल्याण योजनाओं की अप्रत्यक्ष लागत, दूसरी तरफ वेंचर-फंडेड ऐप प्लेटफॉर्मों की मूल्य-युद्ध रणनीति। रैपिडो और ओला पर बैन की माँग भावनात्मक रूप से समझ में आती है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है — जब तक परमिट लागत, ऐप-रजिस्ट्रेशन की बाधाएँ और सामाजिक सुरक्षा जाल जैसे मूल मुद्दे नहीं सुलझाए जाते, तब तक किराया बढ़ोतरी महज़ अस्थायी राहत बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराया आखिरी बार कब बदला था?
तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा का आधिकारिक किराया ढाँचा इससे पहले अगस्त 2013 में निर्धारित किया गया था। 28 अक्टूबर 2026 को की गई घोषणा 13 वर्षों में पहला आधिकारिक संशोधन है।
ऑटो चालक रैपिडो और ओला पर बैन क्यों माँग रहे हैं?
चालकों का कहना है कि ऐप-आधारित सेवाएँ उनके पारंपरिक व्यापार को सीधा नुकसान पहुँचा रही हैं। पलानी जैसे तीर्थ-स्थलों पर निर्भर चालकों को मिनी-बसों और ऐप-कैब दोनों की प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ रही है, जिससे उनकी आमदनी में भारी गिरावट आई है।
'वेट्री पयनम' योजना ऑटो चालकों को कैसे प्रभावित करती है?
'वेट्री पयनम' (सफल यात्रा) योजना के तहत तमिलनाडु सरकार महिला यात्रियों को मुफ्त यात्रा सुविधा देती है। चालकों के अनुसार इससे उनकी प्रत्यक्ष कमाई कम हुई है, क्योंकि उन्हें इस सब्सिडी की भरपाई का पर्याप्त तंत्र नहीं मिला है।
किराया बढ़ोतरी के बावजूद चालक असंतुष्ट क्यों हैं?
चालकों का कहना है कि वाहन परमिट पर सालाना भारी खर्च, ईंधन की बढ़ती कीमतें और ऐप-सेवाओं की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह बढ़ोतरी उनकी वास्तविक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। पलानी एसोसिएशन के कालिदास ने इसे 'अच्छी शुरुआत लेकिन काफी नहीं' बताया।
तमिलनाडु ऑटो चालकों ने आरटीओ में क्या शिकायत दर्ज कराई है?
पलानी क्षेत्र के ऑटो चालकों ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में शिकायत दर्ज कराई है कि मुरुगन मंदिर के इलाके में मिनी-बसें दिन में 15 से 20 चक्कर लगाती हैं, जिससे उनके व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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