तमिलनाडु ऑटो किराया संशोधन: 23 सितंबर को जन परामर्श, ₹45 न्यूनतम किराए की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु परिवहन विभाग ने 23 सितंबर 2026 को राज्यभर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से ऑटो रिक्शा किराया संशोधन पर जन परामर्श बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया है। इन बैठकों में ऑटो रिक्शा यूनियनों, उपभोक्ता संगठनों, यात्रियों और अन्य हितधारकों की राय के आधार पर सरकार संशोधित किराया संरचना को अंतिम रूप देगी। इस संशोधन से राज्य के करीब 3.46 लाख पंजीकृत ऑटो रिक्शा चालक और लाखों दैनिक यात्री सीधे प्रभावित होंगे।
मौजूदा किराया ढाँचा और पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में लागू ऑटो रिक्शा किराए 2013 में निर्धारित किए गए थे और तब से अपरिवर्तित हैं। वर्तमान संरचना के अनुसार यात्रियों से पहले 1.8 किलोमीटर के लिए ₹25 और उसके बाद प्रत्येक किलोमीटर पर ₹12 लिए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले एक दशक से अधिक में ईंधन, बीमा, पुर्जे और रखरखाव की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
गौरतलब है कि चालक संघों द्वारा किराया बढ़ाने की माँग वर्षों से उठाई जाती रही है, लेकिन सरकारी स्तर पर अब तक कोई आधिकारिक पुनरीक्षण नहीं हुआ था।
यूनियनों की माँग
ऑटो रिक्शा यूनियनों का तर्क है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण मौजूदा दरें अब व्यावहारिक नहीं रहीं। उन्होंने माँग की है कि न्यूनतम किराया ₹45 किया जाए और प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹20 का शुल्क लिया जाए।
तमिलनाडु प्रगतिशील उपभोक्ता केंद्र के अध्यक्ष सदागोपन ने भी इसी प्रस्तावित संरचना — ₹45 न्यूनतम और ₹20 प्रति अतिरिक्त किलोमीटर — का समर्थन किया। उन्होंने सरकार से परामर्श प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने और संशोधित किराए की जल्द घोषणा करने का आग्रह किया।
त्योहारी सीजन से पहले निर्णय की अपील
सदागोपन ने कहा कि जल्द फैसला लेना इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि आगामी आयुध पूजा और दीपावली त्योहारों के दौरान यात्रियों की माँग में तेज़ वृद्धि होती है। ऐसे में किराए की अनिश्चितता यात्रियों और चालकों दोनों के लिए विवाद का कारण बन सकती है।
उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और विवादों से बचने के लिए सभी ऑटो रिक्शा में डिजिटल किराया मीटर और जीपीएस (GPS) को अनिवार्य करने की भी माँग की।
परामर्श प्रक्रिया और आगे की राह
परिवहन आयुक्त कार्यालय ने जिला प्रशासनों को निर्देश दिए हैं कि वे उपभोक्ता समूहों और हितधारकों से परामर्श के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करें। जिला स्तर पर प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद ही सरकार संशोधित किराया संरचना की घोषणा करेगी।
यह प्रक्रिया चालकों की आजीविका और यात्रियों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। 23 सितंबर की बैठकों के नतीजों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।