दिल्ली-एनसीआर में 3 दिवसीय टैक्सी-ऑटो हड़ताल: ₹12.50 का पुराना किराया बना संकट, अनुज राठौर बोले — सरकार संशोधन करे
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर के ऑटो, टैक्सी, ट्रांसपोर्ट वाहन और ऐप-आधारित कैब ड्राइवर ईंधन की बढ़ती कीमतों और डेढ़ दशक पुराने किराया ढाँचे के विरोध में 21, 22 और 23 मई को तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने ड्राइवरों से अपील की है कि वे इन तीन दिनों तक अपने वाहन सड़कों पर न उतारें।
पुराना किराया ढाँचा — असल समस्या
राठौर के अनुसार, दिल्ली सरकार ने करीब 15 साल पहले दिल्ली-एनसीआर के लिए टैक्सी पॉलिसी बनाई थी, जिसमें लगभग 70 हज़ार गाड़ियों का पंजीकरण हुआ था। उस समय टैक्सी किराया ₹12.50 प्रति किलोमीटर तय किया गया था। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, लेकिन किराया संशोधित नहीं किया गया, जिससे ड्राइवरों की रोज़ी-रोटी पर गंभीर असर पड़ा है।
हाईकोर्ट के आदेश और सरकारी आश्वासन
यूनियन ने किराया संशोधन की माँग को लेकर कई बार सरकार से बातचीत का प्रयास किया और मामला उच्च न्यायालय तक पहुँचाया। यूनियन के अनुसार, अदालत ने किराया संशोधित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद परिवहन विभाग ने जल्द किराया बढ़ाने का आश्वासन दिया। बाद में अवमानना याचिका दायर किए जाने पर अदालत ने पुनः किराया बढ़ाने के निर्देश दिए।
₹20–₹25 प्रति किलोमीटर का प्रस्ताव
राठौर ने बताया कि परिवहन विभाग के डिप्टी कमिश्नर ने यूनियन को सूचित किया था कि किराया बढ़ाकर ₹20 से ₹25 प्रति किलोमीटर करने का प्रस्ताव तैयार है और फ़ाइल उपराज्यपाल के पास भेजी जा चुकी है। मंजूरी मिलते ही अधिसूचना जारी की जाएगी। साथ ही ओला-उबर जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं के किराये को भी नियंत्रित करने की बात कही गई थी।
हड़ताल की वजह और यूनियन की अपील
यूनियन का कहना है कि मौजूदा महंगाई में ड्राइवर और यात्री दोनों परेशान हैं — ड्राइवर इसलिए कि आमदनी से खर्च नहीं निकलता, और यात्री इसलिए कि ऐप-आधारित कैब सेवाएँ मनमाना किराया वसूलती हैं। राठौर ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं और ड्राइवरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे।
आगे क्या होगा
राठौर ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार बातचीत के लिए बुलाती है और माँगों पर सकारात्मक आश्वासन देती है, तो आगे के फ़ैसले पर विचार किया जाएगा। फिलहाल सरकार की ओर से कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया गया है। यह हड़ताल दिल्ली-एनसीआर की लाखों यात्रियों की दैनिक आवाजाही को प्रभावित कर सकती है।