21 अगस्त 2026
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दिल्ली-एनसीआर में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल शुरू, ईंधन मूल्य वृद्धि से त्रस्त चालक

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दिल्ली-एनसीआर में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की 3 दिन की हड़ताल शुरू, ईंधन मूल्य वृद्धि से त्रस्त चालक

सारांश

ईंधन में दो किस्तों में ₹3.91 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली-एनसीआर के ऑटो, टैक्सी और कैब चालक सड़कों से हट गए हैं। 21 से 23 मई तक चलने वाली इस हड़ताल से लाखों यात्री प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चालकों का कहना है कि 12 घंटे काम के बाद भी ₹500 नहीं बचते।

मुख्य बातें

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और दिल्ली चालक शक्ति यूनियन ने 21 से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है।
15 मई को पेट्रोल-डीजल में ₹3/लीटर और 19 मई को पेट्रोल में 86 पैसे , डीजल में 83 पैसे की बढ़ोतरी हुई — कुल ₹3.91/लीटर ।
चालकों के अनुसार 12 घंटे काम के बाद मात्र ₹500-600 की बचत रह गई है।
सरकार ने उत्पाद शुल्क कटौती से ₹30,000 करोड़ का राजस्व नुकसान उठाया; तेल कंपनियों को ₹24,500 करोड़ की कम वसूली का बोझ।
एलपीजी कीमत स्थिर रखने पर तेल कंपनियों को ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान।

दिल्ली-एनसीआर में 21 मई 2026 से ऑटो, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और दिल्ली चालक शक्ति यूनियन ने 21 से 23 मई तक यह हड़ताल बुलाई है — ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों, पुराने किराया ढाँचे और ऐप-आधारित कंपनियों के कारण हो रहे आर्थिक नुकसान को मुख्य वजह बताते हुए।

मुख्य घटनाक्रम

यह हड़ताल ऐसे समय में शुरू हुई है जब ईंधन की कीमतें लगातार दो किस्तों में बढ़ाई जा चुकी हैं। 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम ₹3 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल में 86 पैसे और डीजल में 83 पैसे प्रति लीटर की और वृद्धि हुई।

गौरतलब है कि इन दो किस्तों को मिलाकर पेट्रोल और डीजल में कुल ₹3.91 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर ₹24,500 करोड़ की कम वसूली की भरपाई के बाद ही कीमतें बढ़ाई हैं।

आम चालकों पर असर

एक कैब चालक ने बताया कि सीएनजी और तेल की कीमतों में इतनी बढ़ोतरी हो गई है कि 12 घंटे काम करने के बाद भी मात्र ₹500-600 के आसपास ही बचत हो पाती है। उनके अनुसार, गाड़ी की किस्त, तेल और सीएनजी का खर्च निकालने के बाद पूरी रात काम करके भी ₹500 बचाना मुश्किल हो रहा है।

ऐप-आधारित कंपनियों के कमीशन ढाँचे और पुराने सरकारी किराया निर्धारण को लेकर भी चालकों में गहरा असंतोष है। यूनियन के अनुसार, किराया ढाँचे को आखिरी बार कई वर्ष पहले संशोधित किया गया था, जबकि परिचालन लागत तब से कई गुना बढ़ चुकी है।

सरकार का पक्ष

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती करके कीमतों में वृद्धि को 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखा है। इस कटौती से सरकार को राजस्व हानि के रूप में ₹30,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।

इसके अतिरिक्त, तेल कंपनियों को आयातित कच्चे तेल की लागत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाने के कारण हुए नुकसान की भरपाई के निर्देश भी दिए गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमत स्थिर रखने पर तेल कंपनियों को ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान हुआ है।

यात्रियों पर प्रभाव

तीन दिन की इस हड़ताल से दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, विशेषकर उन इलाकों में जहाँ मेट्रो कनेक्टिविटी सीमित है। ऑफिस जाने वाले कामकाजी लोगों, बुजुर्गों और अस्पताल जाने वाले मरीजों पर इसका सर्वाधिक असर पड़ने की आशंका है।

आगे क्या होगा

यूनियन के प्रतिनिधियों ने माँग की है कि सरकार किराया ढाँचे की तत्काल समीक्षा करे और ऐप-आधारित कंपनियों के कमीशन पर नियामक अंकुश लगाए। हड़ताल 23 मई तक जारी रहने की बात कही गई है, और यदि माँगें नहीं मानी गईं तो इसे आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दो किस्तों में ₹3.91 प्रति लीटर की बढ़ोतरी उन चालकों के लिए असहनीय है जिनका किराया ढाँचा वर्षों से नहीं बदला। असली सवाल यह है कि जब सरकार ₹30,000 करोड़ का राजस्व नुकसान उठाकर उपभोक्ताओं को राहत दे रही है, तो किराया संशोधन की माँग पर बातचीत क्यों नहीं हो रही। ऐप-आधारित कंपनियों का कमीशन ढाँचा इस संकट का एक और अनदेखा पहलू है — जिस पर न सरकार, न नियामक, अब तक कोई ठोस कदम उठा पाए हैं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली-एनसीआर में ऑटो-टैक्सी हड़ताल कब से कब तक है?
यह हड़ताल 21 मई से 23 मई 2026 तक तीन दिन चलेगी। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और दिल्ली चालक शक्ति यूनियन ने संयुक्त रूप से इसका आह्वान किया है।
हड़ताल की मुख्य माँगें क्या हैं?
चालकों की मुख्य माँगें हैं — किराया ढाँचे की तत्काल समीक्षा, ऐप-आधारित कंपनियों के कमीशन पर नियामक नियंत्रण और ईंधन मूल्य वृद्धि के अनुरूप किराए में संशोधन। चालकों का कहना है कि मौजूदा किराया ढाँचा पुराना है और बढ़ी हुई परिचालन लागत को नहीं दर्शाता।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें हाल में कितनी बढ़ी हैं?
15 मई को पेट्रोल और डीजल में ₹3 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹2 की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल में 86 पैसे और डीजल में 83 पैसे की और वृद्धि हुई, जिससे कुल बढ़ोतरी ₹3.91 प्रति लीटर हो गई।
सरकार ने ईंधन की कीमतों पर क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती कर कीमत वृद्धि को 4.4% तक सीमित रखा है, जिससे ₹30,000 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ। तेल कंपनियों ने ₹24,500 करोड़ की कम वसूली की भरपाई की और एलपीजी स्थिर रखने पर ₹40,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाया।
इस हड़ताल से आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
दिल्ली-एनसीआर में लाखों यात्रियों को तीन दिन तक ऑटो, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब सेवाएँ बाधित रहने की आशंका है। सीमित मेट्रो कनेक्टिविटी वाले इलाकों में कामकाजी लोगों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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