अदाणी पावर ने ₹4,194 करोड़ में जयप्रकाश पावर की 24% हिस्सेदारी और चुर्क थर्मल प्लांट का अधिग्रहण किया
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी पावर ने 21 मई 2026 को घोषणा की कि उसने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (जेपीवीएल) में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित 180 मेगावाट के चुर्क थर्मल पावर स्टेशन का अधिग्रहण करने के लिए जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के साथ कुल ₹4,194 करोड़ के दो अलग समझौते किए हैं। ये सौदे राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा अनुमोदित जेएएल की समाधान योजना का हिस्सा हैं।
दो अलग सौदों का विवरण
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, अदाणी पावर ने जेएएल की जेपीवीएल में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी को ₹2,993.6 करोड़ में खरीदने के लिए एक शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनी ने सोनभद्र स्थित 180 मेगावाट के चुर्क थर्मल पावर स्टेशन को संबंधित संपत्तियों सहित — जिसमें प्रयागराज पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड में 11.49 प्रतिशत हिस्सेदारी भी शामिल है — ₹1,200 करोड़ में अधिग्रहित करने के लिए एक व्यापार हस्तांतरण समझौते में प्रवेश किया है।
एनसीएलटी समाधान योजना की भूमिका
कंपनी ने स्पष्ट किया कि ये लेन-देन जेएएल की एनसीएलटी-अनुमोदित समाधान योजना के अंतर्गत हैं, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड समाधान आवेदक है और अदाणी पावर कार्यान्वयन संस्थाओं में से एक के रूप में कार्य कर रही है। दोनों सौदे नकद में पूरे किए जाएंगे और समाधान योजना में परिभाषित 'प्रभावी तिथि' पर संपन्न होने की उम्मीद है।
नियामक मंजूरियों का क्रम
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने अगस्त 2025 में इस लेनदेन को मंजूरी दी थी। इसके बाद एनसीएलटी की इलाहाबाद बेंच ने मार्च 2026 में समाधान योजना को अनुमोदित किया। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने मई 2026 में इस आदेश को बरकरार रखा, जिससे सौदे के लिए कानूनी मार्ग प्रशस्त हो गया।
जेपीवीएल की परिसंपत्तियाँ और रणनीतिक महत्त्व
जेपीवीएल 2,220 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली तापीय और जलविद्युत परिसंपत्तियों का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी की कोयला खनन, रेत खनन और सीमेंट पिसाई में भी हिस्सेदारी है। यह अधिग्रहण अदाणी पावर की विद्युत उत्पादन क्षमता विस्तार की रणनीति के अनुरूप है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत की बिजली माँग तेज़ी से बढ़ रही है और बड़े औद्योगिक समूह दिवालिया परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के ज़रिये अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं।
आगे की राह
सौदे की 'प्रभावी तिथि' समाधान योजना के कार्यान्वयन समयसीमा से जुड़ी है और शेष नियामक प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करती है। अदाणी पावर ने पहले ही इस समाधान प्रक्रिया में अपनी रुचि ज़ाहिर की थी और ये नए समझौते मंजूर ढाँचे के तहत परिसंपत्ति अधिग्रहण को औपचारिक रूप देते हैं।