दिल्ली-एनसीआर में 21-23 मई को टैक्सी-ऑटो हड़ताल, 15 साल से नहीं बढ़ा किराया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई 2026 तक टैक्सी और ऑटो चालक तीन दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे। चालक शक्ति यूनियन ने यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, लगातार चढ़ती सीएनजी की कीमतों और करीब 15 वर्षों से किराए में कोई संशोधन न होने के विरोध में घोषित किया है। यह हड़ताल पूरे दिल्ली-एनसीआर में लागू होगी और इसका सीधा असर लाखों यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर, जिन्हें 'अन्ना' के नाम से भी जाना जाता है, ने 19 मई को सरकार पर टैक्सी चालकों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'करीब 15 साल पहले दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत जो किराया तय किया गया था, उसमें आज तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मजबूरी में हमें 21, 22 और 23 मई को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा है।'
राठौर ने यह भी बताया कि 2015 में सरकार ने टैक्सी स्कीम बनाई थी और अब 2026 आ गया है, लेकिन किराया वहीं का वहीं खड़ा है। उन्होंने कहा, '2015 में सरकार ने टैक्सी स्कीम बनाई थी और अब 2026 आ गया है। हर कुछ दिनों में सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन किराया वहीं का वहीं है।'
चालकों की आर्थिक तकलीफ
यूनियन नेताओं का कहना है कि मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। जब दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत किराया तय किया गया था, तब से महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन चालकों की आय में कोई बदलाव नहीं आया। यूनियन की मुख्य मांग किराए में संशोधन है ताकि चालक बढ़ती महंगाई के बीच अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
अदालत तक पहुंचा मामला
राठौर ने बताया कि यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत ने भी इस पर निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बावजूद किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह तथ्य दर्शाता है कि चालकों की शिकायतें केवल यूनियन स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्यायिक संज्ञान में भी आ चुकी हैं।
ओला-उबर चालकों का समर्थन
राठौर ने दावा किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म से जुड़े चालक भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। यदि यह समर्थन व्यापक रूप से मिलता है, तो दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।
सरकार से अपील
यूनियन ने सरकार से अपील की है कि गरीब ड्राइवरों की स्थिति को समझते हुए जल्द किराया बढ़ाया जाए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन चला सकें। यह हड़ताल तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता।