19 अगस्त 2026
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दिल्ली-एनसीआर में 21-23 मई को टैक्सी-ऑटो हड़ताल, 15 साल से नहीं बढ़ा किराया

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दिल्ली-एनसीआर में 21-23 मई को टैक्सी-ऑटो हड़ताल, 15 साल से नहीं बढ़ा किराया

सारांश

15 साल से किराया न बढ़ने और सीएनजी की लगातार चढ़ती कीमतों से तंग दिल्ली-एनसीआर के टैक्सी-ऑटो चालक 21 से 23 मई तक हड़ताल पर जाएंगे। मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, फिर भी सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मुख्य बातें

दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और ऑटो चालक 21 से 23 मई 2026 तक तीन दिवसीय हड़ताल पर रहेंगे।
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने सरकार पर चालकों की समस्याएं नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
करीब 15 साल पहले तय किए गए किराए में आज तक कोई संशोधन नहीं हुआ, जबकि सीएनजी समेत महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है।
यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत के निर्देशों के बावजूद किराया नहीं बढ़ाया गया।
ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े चालकों के भी हड़ताल में शामिल होने का दावा किया गया है।

दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई 2026 तक टैक्सी और ऑटो चालक तीन दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे। चालक शक्ति यूनियन ने यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, लगातार चढ़ती सीएनजी की कीमतों और करीब 15 वर्षों से किराए में कोई संशोधन न होने के विरोध में घोषित किया है। यह हड़ताल पूरे दिल्ली-एनसीआर में लागू होगी और इसका सीधा असर लाखों यात्रियों की आवाजाही पर पड़ सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर, जिन्हें 'अन्ना' के नाम से भी जाना जाता है, ने 19 मई को सरकार पर टैक्सी चालकों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'करीब 15 साल पहले दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत जो किराया तय किया गया था, उसमें आज तक कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मजबूरी में हमें 21, 22 और 23 मई को हड़ताल का फैसला लेना पड़ा है।'

राठौर ने यह भी बताया कि 2015 में सरकार ने टैक्सी स्कीम बनाई थी और अब 2026 आ गया है, लेकिन किराया वहीं का वहीं खड़ा है। उन्होंने कहा, '2015 में सरकार ने टैक्सी स्कीम बनाई थी और अब 2026 आ गया है। हर कुछ दिनों में सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन किराया वहीं का वहीं है।'

चालकों की आर्थिक तकलीफ

यूनियन नेताओं का कहना है कि मौजूदा किराए में गाड़ी चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। जब दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत किराया तय किया गया था, तब से महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन चालकों की आय में कोई बदलाव नहीं आया। यूनियन की मुख्य मांग किराए में संशोधन है ताकि चालक बढ़ती महंगाई के बीच अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।

अदालत तक पहुंचा मामला

राठौर ने बताया कि यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत ने भी इस पर निर्देश दिए थे, लेकिन उसके बावजूद किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया। यह तथ्य दर्शाता है कि चालकों की शिकायतें केवल यूनियन स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्यायिक संज्ञान में भी आ चुकी हैं।

ओला-उबर चालकों का समर्थन

राठौर ने दावा किया कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म से जुड़े चालक भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। यदि यह समर्थन व्यापक रूप से मिलता है, तो दिल्ली-एनसीआर में सार्वजनिक परिवहन पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।

सरकार से अपील

यूनियन ने सरकार से अपील की है कि गरीब ड्राइवरों की स्थिति को समझते हुए जल्द किराया बढ़ाया जाए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन चला सकें। यह हड़ताल तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत उदासीनता का प्रमाण है — खासकर तब, जब हाई कोर्ट के निर्देश भी बेअसर साबित हुए हों। ओला-उबर जैसे ऐप प्लेटफॉर्म ने सर्ज प्राइसिंग के जरिए यात्रियों से कहीं अधिक वसूला, लेकिन परंपरागत टैक्सी-ऑटो चालक सरकारी दरों की जंजीर में जकड़े रहे। यह हड़ताल असल में उस व्यापक असमानता की अभिव्यक्ति है जो डिजिटल और गैर-डिजिटल परिवहन क्षेत्रों के बीच गहरी होती जा रही है। सरकार यदि अब भी केवल बातचीत का आश्वासन देती है, तो यह तीन दिन की हड़ताल आने वाले बड़े आंदोलन की भूमिका बन सकती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी-ऑटो हड़ताल कब से कब तक है?
यह हड़ताल 21 से 23 मई 2026 तक तीन दिनों के लिए है। चालक शक्ति यूनियन ने बढ़ती महंगाई और 15 साल से किराए में कोई बढ़ोतरी न होने के विरोध में यह आंदोलन घोषित किया है।
टैक्सी-ऑटो चालकों की मुख्य मांग क्या है?
चालकों की मुख्य मांग दिल्ली-एनसीआर सिटी टैक्सी स्कीम के तहत तय किराए में संशोधन है। उनका कहना है कि करीब 15 साल पहले जो किराया तय हुआ था वह आज भी लागू है, जबकि सीएनजी और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं।
क्या ओला-उबर चालक भी इस हड़ताल में शामिल हैं?
चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने दावा किया है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े चालक भी इस हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि इन कंपनियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
क्या यह मामला अदालत में भी गया है?
हां, राठौर के अनुसार यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और अदालत ने भी इस पर निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सरकार ने किराए में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे चालकों में गहरी निराशा है।
इस हड़ताल का आम यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
21 से 23 मई के दौरान दिल्ली-एनसीआर में टैक्सी और ऑटो सेवाएं बाधित हो सकती हैं। यदि ऐप-आधारित चालक भी हड़ताल में शामिल हुए, तो सार्वजनिक परिवहन पर काफी दबाव पड़ सकता है और यात्रियों को वैकल्पिक साधन तलाशने पड़ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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