पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार, एलपीजी आपूर्ति सामान्य; सरकार ने दूर किए भ्रम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 21 मई को स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति भी पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सीमित उपलब्धता की शिकायतें सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पेट्रोल पंपों पर सीमित आपूर्ति की वजह
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन की अचानक बढ़ी मांग के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, फसल कटाई का मौसम होने से डीजल की मांग में स्वाभाविक उछाल आया है। दूसरा, निजी ईंधन कंपनियों द्वारा अपेक्षाकृत ऊंची कीमतें वसूलने के कारण ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
तीसरा कारण संस्थागत और कमर्शियल ईंधन से उपभोक्ताओं का खुदरा पंपों की तरफ रुख करना है। कमर्शियल ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरों के अनुसार तय होती हैं, जो फिलहाल खुदरा दरों से ₹20 प्रति लीटर तक अधिक हैं।
रूसी कच्चे तेल की खरीद में इज़ाफा
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में कोई कटौती नहीं की है। इससे पहले बुधवार को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के डायरेक्टर फाइनेंस वी.आर.के. गुप्ता ने कहा था कि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कंपनी ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है।
गुप्ता के अनुसार, बीपीसीएल के कुल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी अब करीब 41 प्रतिशत हो गई है। यह वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च) में 31 प्रतिशत थी, जबकि तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में यह आंकड़ा मात्र 25 प्रतिशत था।
मध्य पूर्व संकट और आपूर्ति विविधीकरण
गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए कंपनी ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाई है और रूस इस रणनीति का केंद्र बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बनी हुई है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
आम उपभोक्ता पर असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जिन पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सीमित थी, वहाँ प्रतिबंध हटाने की प्रक्रिया जारी है। एलपीजी सिलेंडर की घरेलू आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। गौरतलब है कि यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर ईंधन की कमी की अफवाहें फैल रही थीं, जिससे कुछ इलाकों में पंपों पर भीड़ देखी गई।