महाराष्ट्र राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में तीन पुस्तकों का विमोचन किया, 'समरसता का तीर्थयात्री' प्रमुख

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महाराष्ट्र राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में तीन पुस्तकों का विमोचन किया, 'समरसता का तीर्थयात्री' प्रमुख

सारांश

मुंबई के महाराष्ट्र लोक भवन में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने पद्म श्री भीकू इदाते की 'समरसता का तीर्थयात्री' समेत तीन पुस्तकों का विमोचन किया। मोहन भागवत की प्रस्तावना वाली यह पुस्तक समरसता आंदोलन और विमुक्त समुदायों की सामाजिक यात्रा को दर्ज करती है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 20 मई 2025 को महाराष्ट्र लोक भवन, मुंबई में तीन पुस्तकों का विमोचन किया।
पद्म श्री भीकू इदाते की पुस्तक 'समरसता का तीर्थयात्री' मराठी कृति 'समरसतेचा वारकरी' का अंग्रेजी अनुवाद है; प्रस्तावना मोहन भागवत ने लिखी है।
अनुवाद ऋतुराज पाटकी द्वारा, मूल लेखन नीलिमा देशपांडे द्वारा।
रवींद्र प्रभुदेसाई की 'आधुनिक शेतीचे मॉडेल' और 'आपला कोकण' भी इसी समारोह में जारी हुईं।
पद्म श्री रमेश पतंगे सहित हिंदुस्तान प्रकाशन संस्था और पीतांबरी समूह के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 20 मई 2025 को मुंबई स्थित महाराष्ट्र लोक भवन में एक विशेष समारोह के दौरान तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें सबसे चर्चित रही पद्म श्री भीकू (दादा) इदाते की पुस्तक 'समरसता का तीर्थयात्री', जो मराठी कृति 'समरसतेचा वारकरी' का अंग्रेजी अनुवाद है। यह आयोजन समरसता और सामाजिक विकास के संदेश को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास माना जा रहा है।

पुस्तकों का परिचय और विशेषताएँ

'समरसता का तीर्थयात्री' मूलतः नीलिमा देशपांडे द्वारा मराठी में लिखी गई है और इसका अंग्रेजी अनुवाद ऋतुराज पाटकी ने किया है। इस पुस्तक की प्रस्तावना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लिखी है, जो इसकी वैचारिक गहराई को रेखांकित करती है।

इसी समारोह में उद्योगपति और पीतांबरी समूह के प्रबंध निदेशक डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई की दो पुस्तकें — 'आधुनिक शेतीचे मॉडेल' और 'आपला कोकण' — भी राज्यपाल के हाथों जारी की गईं। ये दोनों पुस्तकें क्रमशः आधुनिक कृषि पद्धतियों और कोंकण क्षेत्र की विशेषताओं पर केंद्रित हैं।

राज्यपाल का संबोधन

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल वर्मा ने कहा कि 'समरसता का तीर्थयात्री' पाठकों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समरसता आंदोलन को गहराई से समझने में सहायक होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के तकनीकी युग में भी पुस्तकों का महत्व अक्षुण्ण है और भौतिक रूप से पुस्तक पढ़ने का अनुभव अद्वितीय है।

राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि युवा पीढ़ी के बारे में यह धारणा निराधार है कि वह पुस्तकें नहीं पढ़ती — बल्कि पढ़ने का माध्यम बदला है, रुचि नहीं। उन्होंने अपील की कि जन्मदिन, विवाह और अन्य विशेष अवसरों पर पुस्तकें उपहार में देने की परंपरा विकसित की जाए।

भीकू इदाते का वक्तव्य

पद्म श्री भीकू इदाते ने अपने संबोधन में 'समरसता मंच' की स्थापना, उसके माध्यम से संचालित विभिन्न सामाजिक आंदोलनों, 'फुले-अंबेडकर संदेश यात्रा' और विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों की स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी दशकों लंबी सामाजिक यात्रा के अनुभव भी साझा किए। गौरतलब है कि इदाते 'भटके विमुक्त विकास परिषद' के संस्थापक अध्यक्ष और 'समरसता मंच' के दीर्घकालिक कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं।

समारोह में उपस्थित गणमान्य

इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में हिंदुस्तान प्रकाशन संस्था और साप्ताहिक 'विवेक' के मार्गदर्शक पद्म श्री रमेश पतंगे सहित साप्ताहिक 'विवेक' और पीतांबरी समूह के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन सामाजिक समरसता के व्यापक विमर्श को साहित्यिक मंच देने की एक सुनियोजित पहल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस आयोजन की व्यापक कवरेज यह सवाल भी उठाती है कि क्या इन समुदायों की ज़मीनी स्थिति में साहित्यिक उत्सवों से परे नीतिगत बदलाव भी आ रहे हैं। पुस्तक विमोचन जागरूकता का माध्यम है, परंतु विमुक्त और घुमंतू समुदायों के लिए ठोस कल्याण नीतियों की माँग अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समरसता का तीर्थयात्री' पुस्तक क्या है?
यह पद्म श्री भीकू इदाते के जीवन और सामाजिक कार्यों पर आधारित मराठी पुस्तक 'समरसतेचा वारकरी' का अंग्रेजी अनुवाद है। इसे नीलिमा देशपांडे ने लिखा है, ऋतुराज पाटकी ने अनुवाद किया है, और इसकी प्रस्तावना RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने लिखी है।
भीकू इदाते कौन हैं और उनका सामाजिक योगदान क्या है?
पद्म श्री भीकू (दादा) इदाते 'भटके विमुक्त विकास परिषद' के संस्थापक अध्यक्ष और 'समरसता मंच' के दीर्घकालिक कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने विमुक्त और घुमंतू समुदायों के उत्थान के लिए दशकों तक काम किया है और 'फुले-अंबेडकर संदेश यात्रा' जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया है।
डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई की कौन-सी पुस्तकें जारी हुईं?
पीतांबरी समूह के प्रबंध निदेशक डॉ. रवींद्र प्रभुदेसाई की दो पुस्तकें — 'आधुनिक शेतीचे मॉडेल' (आधुनिक कृषि मॉडल पर) और 'आपला कोकण' (कोंकण क्षेत्र पर) — इसी समारोह में विमोचित की गईं।
यह पुस्तक विमोचन समारोह कहाँ और कब हुआ?
यह समारोह 20 मई 2025 को मुंबई के महाराष्ट्र लोक भवन में आयोजित हुआ। इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने तीनों पुस्तकों का विमोचन किया।
समारोह में अन्य कौन-से प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे?
समारोह में हिंदुस्तान प्रकाशन संस्था और साप्ताहिक 'विवेक' के मार्गदर्शक पद्म श्री रमेश पतंगे, तथा साप्ताहिक 'विवेक' एवं पीतांबरी समूह के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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