तमिलनाडु ऑटो-रिक्शा किराया संशोधन: यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी, ₹60 बेस फेयर की मांग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालक यूनियनों ने राज्य सरकार से किराए में 12 वर्षों से लंबित संशोधन की तत्काल घोषणा करने की अपील की है। यह मांग ऐसे समय उठी है जब परिवहन मंत्री ए. विजय तमिलन पार्थिबन शुक्रवार, 29 अगस्त 2026 को विधानसभा में परिवहन विभाग की अनुदान मांगें पेश करने वाले हैं। यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि बहस के दौरान संशोधित किराए की घोषणा नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी।
यूनियन की मुख्य मांगें
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) से संबद्ध ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन ने प्रस्ताव रखा है कि शुरुआती 1.5 किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया ₹60 और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹30 निर्धारित किया जाए। इसके अलावा मांगों में सामान्य किराए का डेढ़ गुना नाइट टैरिफ और ₹1 प्रति मिनट वेटिंग चार्ज भी शामिल है।
एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी एस. बालासुब्रमण्यम के अनुसार, ये प्रस्ताव 9 जुलाई को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय बैठक में सरकार को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित किराए का नोटिफिकेशन तत्काल जारी किया जाना चाहिए।
ड्राइवरों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
यूनियनों का तर्क है कि मौजूदा किराया ढाँचा ऑटो-रिक्शा चलाने की वास्तविक लागत को प्रतिबिंबित नहीं करता। ईंधन की बढ़ती कीमतें, वाहन रखरखाव का खर्च, बीमा प्रीमियम और लगातार बढ़ती महंगाई ने चालकों की आमदनी पर गंभीर असर डाला है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराया आखिरी बार अगस्त 2013 में तत्कालीन अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सरकार के दौरान संशोधित हुआ था — तब शुरुआती 1.8 किलोमीटर के लिए ₹25 और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹12 तय किए गए थे। यानी एक दशक से अधिक समय में कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि परिचालन लागत कई गुना बढ़ चुकी है।
ऐप-बेस्ड बाइक टैक्सी पर आपत्ति
यूनियनों ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं पर कड़े नियम लागू करने या उनके संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी दोहराई है। यूनियन का आरोप है कि ये सेवाएं ऑटो-रिक्शा चालकों के यात्री छीन रही हैं और उनकी दैनिक आय को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचा रही हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 5 लाख परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऑटो-रिक्शा क्षेत्र पर आजीविका के लिए निर्भर हैं। यूनियन ने सरकार से अपील की है कि वह वैकल्पिक यात्री सेवाओं को विनियमित कर और उचित किराया ढाँचा लागू कर इन परिवारों के हितों की रक्षा करे।
सरकारी स्तर पर हलचल
परिवहन एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त सिगी थॉमस वैद्यन ने गुरुवार को ऑटो चालक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में टैरिफ स्ट्रक्चर, मीटर-आधारित किराए को लागू करने, वेटिंग चार्ज, नाइट टैरिफ और बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
यह ऐसे समय में आया है जब विधानसभा बजट सत्र के दौरान परिवहन क्षेत्र की माँगें केंद्र में हैं और सरकार पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा या उसका अभाव — दोनों ही राज्य के लाखों ऑटो चालकों के भविष्य को प्रभावित करेंगे।