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तमिलनाडु ऑटो-रिक्शा किराया संशोधन: यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी, ₹60 बेस फेयर की मांग

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तमिलनाडु ऑटो-रिक्शा किराया संशोधन: यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी, ₹60 बेस फेयर की मांग

सारांश

12 साल से अटका किराया, लाखों परिवारों की आजीविका दांव पर — तमिलनाडु की ऑटो यूनियनें विधानसभा बहस को आखिरी मौका मान रही हैं। ₹60 बेस फेयर और बाइक टैक्सी पर लगाम की मांग के साथ, आंदोलन की चेतावनी दी जा चुकी है।

मुख्य बातें

CITU से संबद्ध ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन ने तमिलनाडु सरकार से किराया संशोधन की तत्काल घोषणा की मांग की है।
प्रस्तावित किराया: शुरुआती 1.5 किमी के लिए ₹60 , उसके बाद ₹30 प्रति किमी ; नाइट टैरिफ सामान्य का डेढ़ गुना ।
तमिलनाडु में ऑटो किराया आखिरी बार अगस्त 2013 में संशोधित हुआ था — तब ₹25 बेस और ₹12 प्रति किमी था।
परिवहन आयुक्त सिगी थॉमस वैद्यन ने यूनियन प्रतिनिधियों के साथ गुरुवार को बैठक बुलाई है।
तमिलनाडु में लगभग 5 लाख परिवार ऑटो-रिक्शा क्षेत्र पर आजीविका के लिए निर्भर हैं।
यूनियन ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध या कड़े नियमों की मांग भी दोहराई।

तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालक यूनियनों ने राज्य सरकार से किराए में 12 वर्षों से लंबित संशोधन की तत्काल घोषणा करने की अपील की है। यह मांग ऐसे समय उठी है जब परिवहन मंत्री ए. विजय तमिलन पार्थिबन शुक्रवार, 29 अगस्त 2026 को विधानसभा में परिवहन विभाग की अनुदान मांगें पेश करने वाले हैं। यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि यदि बहस के दौरान संशोधित किराए की घोषणा नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी।

यूनियन की मुख्य मांगें

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) से संबद्ध ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन ने प्रस्ताव रखा है कि शुरुआती 1.5 किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया ₹60 और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹30 निर्धारित किया जाए। इसके अलावा मांगों में सामान्य किराए का डेढ़ गुना नाइट टैरिफ और ₹1 प्रति मिनट वेटिंग चार्ज भी शामिल है।

एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी एस. बालासुब्रमण्यम के अनुसार, ये प्रस्ताव 9 जुलाई को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में हुई त्रिपक्षीय बैठक में सरकार को सौंपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि संशोधित किराए का नोटिफिकेशन तत्काल जारी किया जाना चाहिए।

ड्राइवरों पर बढ़ता आर्थिक दबाव

यूनियनों का तर्क है कि मौजूदा किराया ढाँचा ऑटो-रिक्शा चलाने की वास्तविक लागत को प्रतिबिंबित नहीं करता। ईंधन की बढ़ती कीमतें, वाहन रखरखाव का खर्च, बीमा प्रीमियम और लगातार बढ़ती महंगाई ने चालकों की आमदनी पर गंभीर असर डाला है।

गौरतलब है कि तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराया आखिरी बार अगस्त 2013 में तत्कालीन अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सरकार के दौरान संशोधित हुआ था — तब शुरुआती 1.8 किलोमीटर के लिए ₹25 और हर अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹12 तय किए गए थे। यानी एक दशक से अधिक समय में कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि परिचालन लागत कई गुना बढ़ चुकी है।

ऐप-बेस्ड बाइक टैक्सी पर आपत्ति

यूनियनों ने ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाओं पर कड़े नियम लागू करने या उनके संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी दोहराई है। यूनियन का आरोप है कि ये सेवाएं ऑटो-रिक्शा चालकों के यात्री छीन रही हैं और उनकी दैनिक आय को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचा रही हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 5 लाख परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऑटो-रिक्शा क्षेत्र पर आजीविका के लिए निर्भर हैं। यूनियन ने सरकार से अपील की है कि वह वैकल्पिक यात्री सेवाओं को विनियमित कर और उचित किराया ढाँचा लागू कर इन परिवारों के हितों की रक्षा करे।

सरकारी स्तर पर हलचल

परिवहन एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त सिगी थॉमस वैद्यन ने गुरुवार को ऑटो चालक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में टैरिफ स्ट्रक्चर, मीटर-आधारित किराए को लागू करने, वेटिंग चार्ज, नाइट टैरिफ और बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब विधानसभा बजट सत्र के दौरान परिवहन क्षेत्र की माँगें केंद्र में हैं और सरकार पर सभी पक्षों की नज़रें टिकी हैं। आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा या उसका अभाव — दोनों ही राज्य के लाखों ऑटो चालकों के भविष्य को प्रभावित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत उदासीनता का प्रतीक है। इस दौरान ईंधन, बीमा और रखरखाव की लागत दोगुनी से अधिक हो चुकी है, जबकि ऐप-आधारित सेवाओं ने पारंपरिक ऑटो क्षेत्र को और दबाव में डाल दिया है। सरकार के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या वह किराया संशोधन को महज चुनावी दबाव की प्रतिक्रिया के रूप में करती है, या एक दीर्घकालिक नियामक ढाँचे के तहत — जिसमें बाइक टैक्सी विनियमन और मीटर-आधारित पारदर्शिता दोनों शामिल हों। 5 लाख परिवारों की आजीविका का सवाल विधानसभा की एक बहस से कहीं बड़ा है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराया संशोधन की मांग क्यों उठ रही है?
तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा किराया आखिरी बार अगस्त 2013 में संशोधित हुआ था और तब से 12 वर्षों में ईंधन, बीमा और रखरखाव की लागत में भारी वृद्धि हुई है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा किराया परिचालन लागत को कवर नहीं करता, जिससे चालकों की आय पर गंभीर असर पड़ रहा है।
यूनियन ने कितने किराए की मांग की है?
ऑटो-टैक्सी वर्कर्स एसोसिएशन ने शुरुआती 1.5 किलोमीटर के लिए ₹60 और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए ₹30 किराए की मांग की है। इसके अलावा सामान्य किराए का डेढ़ गुना नाइट टैरिफ और ₹1 प्रति मिनट वेटिंग चार्ज की भी मांग है।
तमिलनाडु सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
परिवहन एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त सिगी थॉमस वैद्यन ने गुरुवार को यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई है। इससे पहले 9 जुलाई को परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में एक त्रिपक्षीय बैठक भी हो चुकी है, जिसमें यूनियन ने अपने प्रस्ताव सौंपे थे।
बाइक टैक्सी से ऑटो चालकों को क्या नुकसान है?
यूनियनों का आरोप है कि ऐप-आधारित बाइक टैक्सी सेवाएं ऑटो-रिक्शा के यात्री छीन रही हैं और चालकों की दैनिक आय घटा रही हैं। यूनियन ने सरकार से इन सेवाओं पर या तो कड़े नियम लागू करने या पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा क्षेत्र से कितने परिवार जुड़े हैं?
एसोसिएशन के अनुसार, तमिलनाडु में लगभग 5 लाख परिवार प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऑटो-रिक्शा क्षेत्र पर आजीविका के लिए निर्भर हैं। यूनियन ने सरकार से इन परिवारों के हितों की रक्षा के लिए उचित किराया ढाँचा लागू करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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