डीजल महंगा होने से तमिलनाडु की सरकारी बसों पर ₹175.58 करोड़ का सालाना अतिरिक्त बोझ
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की सरकारी परिवहन निगमों पर वित्तीय संकट और गहरा हो गया है। तेल कंपनियों द्वारा हाईस्पीड डीजल की कीमत में ₹2.86 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सालाना ₹175.58 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब निगम पहले से ही हर दिन करीब ₹19 करोड़ के घाटे से जूझ रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
तमिलनाडु की आठ सरकारी परिवहन इकाइयाँ — मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MTC), स्टेट एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (SETC) और तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TNSTC) की छह शाखाएं — मिलकर प्रतिदिन लगभग 19,000 बसें संचालित करती हैं। ये बसें राज्यभर में 10,120 से अधिक रूटों पर सेवा देती हैं और रोज़ाना करीब 81 लाख किलोमीटर का सफर तय करती हैं।
आंकड़ों के अनुसार, ये बसें प्रतिदिन लगभग 16.82 लाख लीटर डीजल की खपत करती हैं। परिवहन विभाग के सचिव शुंचोंगगाम जातक चिरु ने बताया कि डीजल महंगा होने से दैनिक घाटा करीब ₹48.11 लाख और बढ़ जाएगा।
ईंधन खर्च का बोझ
अधिकारियों के अनुसार, सरकारी परिवहन निगम हर साल केवल डीजल खरीद पर लगभग ₹5,200 करोड़ खर्च करते हैं, जो कुल परिचालन व्यय का करीब 26 प्रतिशत है। रिकॉर्ड बताते हैं कि औसत दैनिक घाटा 2022-23 में ₹16.83 करोड़ था, जो 2023-24 में ₹17.7 करोड़ और 2024-25 में ₹18.9 करोड़ तक पहुँच गया। यह लगातार बढ़ती प्रवृत्ति दर्शाती है कि बिना किराया संशोधन के घाटे पर नियंत्रण कठिन होता जा रहा है।
किराया संशोधन न होने का संकट
परिवहन कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय से बस किराये में कोई संशोधन नहीं किया है। सरकारी बसों का किराया आखिरी बार जनवरी 2018 में बढ़ाया गया था, जब डीजल की कीमत करीब ₹65 प्रति लीटर थी। अब यह कीमत बढ़कर लगभग ₹95 प्रति लीटर तक पहुँच चुकी है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में साधारण बसों का किराया 58 पैसे प्रति किलोमीटर है, जबकि पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और केरल में यह 75 पैसे से ₹1 प्रति किलोमीटर के बीच है।
आम जनता पर असर
इन तमाम वित्तीय चुनौतियों के बावजूद तमिलनाडु में सार्वजनिक परिवहन की माँग लगातार बढ़ रही है। 2021-22 में जहाँ प्रतिदिन 1.55 करोड़ यात्री बसों से सफर करते थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 2.05 करोड़ हो गई है। इनमें 'विदियाल पयानम' योजना के तहत मुफ्त यात्रा करने वाली करीब 70 लाख महिला यात्री भी शामिल हैं। मई 2021 में शुरू की गई इस योजना के तहत महिलाएं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजन (पहाड़ी क्षेत्रों में) साधारण सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकते हैं।
राज्य के 1,000 से अधिक आबादी वाले करीब 98 प्रतिशत गाँव बस सेवाओं से जुड़े हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि किराया बढ़ाने का कोई भी निर्णय लाखों ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के यात्रियों को सीधे प्रभावित करेगा।
क्या होगा आगे
फिलहाल राज्य सरकार ने किराया बढ़ाने या निगमों को अतिरिक्त सब्सिडी देने के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आलोचकों का कहना है कि बिना किराया संशोधन या बजटीय सहायता के, निगमों का घाटा आने वाले वर्षों में और विकराल हो सकता है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार पर असर पड़ सकता है।