डीजल महंगा होने से तमिलनाडु की सरकारी बसों पर ₹175.58 करोड़ का सालाना अतिरिक्त बोझ

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डीजल महंगा होने से तमिलनाडु की सरकारी बसों पर ₹175.58 करोड़ का सालाना अतिरिक्त बोझ

सारांश

डीजल में ₹2.86 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने तमिलनाडु के परिवहन निगमों के पहले से गहरे घाटे को और बढ़ा दिया है। सालाना ₹175.58 करोड़ के अतिरिक्त बोझ और जनवरी 2018 के बाद से किराये में कोई बदलाव न होने के बीच, 2.05 करोड़ दैनिक यात्रियों की सेवा करने वाले निगमों का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

हाईस्पीड डीजल में ₹2.86 प्रति लीटर की बढ़ोतरी से तमिलनाडु के परिवहन निगमों पर सालाना ₹175.58 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
निगम पहले से ही प्रतिदिन ₹19 करोड़ का घाटा झेल रहे हैं; नई बढ़ोतरी से दैनिक घाटा ₹48.11 लाख और बढ़ेगा।
19,000 बसें , 10,120+ रूट , रोज़ाना 16.82 लाख लीटर डीजल खपत — डीजल कुल परिचालन खर्च का 26% ।
बस किराया आखिरी बार जनवरी 2018 में बढ़ा था; तब डीजल ₹65/लीटर था, अब ₹95/लीटर तक पहुँचा।
'विदियाल पयानम' योजना के तहत 70 लाख महिला यात्री प्रतिदिन मुफ्त सफर करती हैं; कुल दैनिक यात्री संख्या 2.05 करोड़ ।
दैनिक घाटा 2022-23 के ₹16.83 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹18.9 करोड़ हो चुका है।

तमिलनाडु की सरकारी परिवहन निगमों पर वित्तीय संकट और गहरा हो गया है। तेल कंपनियों द्वारा हाईस्पीड डीजल की कीमत में ₹2.86 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सालाना ₹175.58 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में आई है जब निगम पहले से ही हर दिन करीब ₹19 करोड़ के घाटे से जूझ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

तमिलनाडु की आठ सरकारी परिवहन इकाइयाँ — मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (MTC), स्टेट एक्सप्रेस ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (SETC) और तमिलनाडु स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (TNSTC) की छह शाखाएं — मिलकर प्रतिदिन लगभग 19,000 बसें संचालित करती हैं। ये बसें राज्यभर में 10,120 से अधिक रूटों पर सेवा देती हैं और रोज़ाना करीब 81 लाख किलोमीटर का सफर तय करती हैं।

आंकड़ों के अनुसार, ये बसें प्रतिदिन लगभग 16.82 लाख लीटर डीजल की खपत करती हैं। परिवहन विभाग के सचिव शुंचोंगगाम जातक चिरु ने बताया कि डीजल महंगा होने से दैनिक घाटा करीब ₹48.11 लाख और बढ़ जाएगा।

ईंधन खर्च का बोझ

अधिकारियों के अनुसार, सरकारी परिवहन निगम हर साल केवल डीजल खरीद पर लगभग ₹5,200 करोड़ खर्च करते हैं, जो कुल परिचालन व्यय का करीब 26 प्रतिशत है। रिकॉर्ड बताते हैं कि औसत दैनिक घाटा 2022-23 में ₹16.83 करोड़ था, जो 2023-24 में ₹17.7 करोड़ और 2024-25 में ₹18.9 करोड़ तक पहुँच गया। यह लगातार बढ़ती प्रवृत्ति दर्शाती है कि बिना किराया संशोधन के घाटे पर नियंत्रण कठिन होता जा रहा है।

किराया संशोधन न होने का संकट

परिवहन कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय से बस किराये में कोई संशोधन नहीं किया है। सरकारी बसों का किराया आखिरी बार जनवरी 2018 में बढ़ाया गया था, जब डीजल की कीमत करीब ₹65 प्रति लीटर थी। अब यह कीमत बढ़कर लगभग ₹95 प्रति लीटर तक पहुँच चुकी है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में साधारण बसों का किराया 58 पैसे प्रति किलोमीटर है, जबकि पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और केरल में यह 75 पैसे से ₹1 प्रति किलोमीटर के बीच है।

आम जनता पर असर

इन तमाम वित्तीय चुनौतियों के बावजूद तमिलनाडु में सार्वजनिक परिवहन की माँग लगातार बढ़ रही है। 2021-22 में जहाँ प्रतिदिन 1.55 करोड़ यात्री बसों से सफर करते थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर करीब 2.05 करोड़ हो गई है। इनमें 'विदियाल पयानम' योजना के तहत मुफ्त यात्रा करने वाली करीब 70 लाख महिला यात्री भी शामिल हैं। मई 2021 में शुरू की गई इस योजना के तहत महिलाएं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजन (पहाड़ी क्षेत्रों में) साधारण सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकते हैं।

राज्य के 1,000 से अधिक आबादी वाले करीब 98 प्रतिशत गाँव बस सेवाओं से जुड़े हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि किराया बढ़ाने का कोई भी निर्णय लाखों ग्रामीण और निम्न-आय वर्ग के यात्रियों को सीधे प्रभावित करेगा।

क्या होगा आगे

फिलहाल राज्य सरकार ने किराया बढ़ाने या निगमों को अतिरिक्त सब्सिडी देने के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आलोचकों का कहना है कि बिना किराया संशोधन या बजटीय सहायता के, निगमों का घाटा आने वाले वर्षों में और विकराल हो सकता है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार पर असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सात साल से किराया न बढ़ाने की राजनीतिक मजबूरी का नतीजा है। 'विदियाल पयानम' जैसी कल्याणकारी योजनाएं लोकप्रिय हैं, लेकिन इनकी लागत को सुनियोजित बजटीय प्रावधान की बजाय निगमों के घाटे पर डाल देना दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। जब तक किराया संशोधन और राज्य सब्सिडी के बीच संतुलन नहीं बनाया जाता, तब तक बढ़ता घाटा सेवा की गुणवत्ता और बेड़े के विस्तार को धीरे-धीरे खोखला करता रहेगा — और इसका सबसे ज़्यादा नुकसान उन्हीं 98% ग्रामीण इलाकों को होगा जो इन बसों पर निर्भर हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजल की कीमत बढ़ने से तमिलनाडु की बस सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा?
हाईस्पीड डीजल में ₹2.86 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के कारण तमिलनाडु के परिवहन निगमों पर सालाना ₹175.58 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। इससे दैनिक घाटा ₹48.11 लाख और बढ़ जाएगा, जो पहले से ही प्रतिदिन ₹19 करोड़ था।
तमिलनाडु में सरकारी बस किराया आखिरी बार कब बढ़ा था?
तमिलनाडु में सरकारी बस किराया आखिरी बार जनवरी 2018 में संशोधित किया गया था, जब डीजल की कीमत करीब ₹65 प्रति लीटर थी। अब डीजल लगभग ₹95 प्रति लीटर तक पहुँच चुका है, लेकिन किराये में कोई बदलाव नहीं हुआ।
'विदियाल पयानम' योजना क्या है और इसका परिवहन निगमों पर क्या असर है?
'विदियाल पयानम' तमिलनाडु सरकार की मई 2021 में शुरू की गई योजना है, जिसके तहत महिलाएं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजन (पहाड़ी क्षेत्रों में) सामान्य सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकते हैं। प्रतिदिन करीब 70 लाख महिला यात्री इस योजना का लाभ उठाती हैं, जिसकी लागत निगमों के राजस्व पर सीधा दबाव डालती है।
तमिलनाडु के परिवहन निगमों का घाटा कितना है?
आंकड़ों के अनुसार, औसत दैनिक घाटा 2022-23 में ₹16.83 करोड़ था, जो 2023-24 में ₹17.7 करोड़ और 2024-25 में ₹18.9 करोड़ हो गया। डीजल की ताज़ा बढ़ोतरी के बाद यह घाटा और बढ़ने की आशंका है।
तमिलनाडु का बस किराया पड़ोसी राज्यों की तुलना में कैसा है?
तमिलनाडु में साधारण बसों का किराया 58 पैसे प्रति किलोमीटर है, जो देश के सबसे सस्ते किरायों में से एक है। वहीं कर्नाटक और केरल में साधारण बसों का किराया 75 पैसे से ₹1 प्रति किलोमीटर और प्रीमियम सेवाओं का ₹1.20 से ₹1.68 प्रति किलोमीटर तक है।
राष्ट्र प्रेस
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