टमाटर की कीमतों में गिरावट के कारण तमिलनाडु के किसान फसल की कटाई रोकने को मजबूर

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टमाटर की कीमतों में गिरावट के कारण तमिलनाडु के किसान फसल की कटाई रोकने को मजबूर

सारांश

तमिलनाडु के किसान टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट के चलते फसल की कटाई रोकने पर मजबूर हैं। इस समस्या ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

Key Takeaways

  • टमाटर की कीमतों में गिरावट से किसान चिंतित हैं।
  • कई क्षेत्रों में कटाई रोक दी गई है।
  • बढ़ती लागत ने किसानों की स्थिति को और खराब किया है।
  • विशेषज्ञ दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश कर रहे हैं।
  • बाजार की अस्थिरता किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

चेन्नई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के कई जिलों में टमाटर उत्पादक गंभीर संकट से गुजर रहे हैं क्योंकि बाजार में कीमतों में भारी गिरावट आई है। इस स्थिति के कारण, किसान अपनी मूल खेती की लागत भी वसूल नहीं कर पा रहे हैं।

कई क्षेत्रों में किसानों ने पूरी तरह से कटाई बंद कर दी है और कम दामों के कारण पूरी तरह तैयार फसल खेतों में ही छोड़ने को मजबूर हैं।

कीमतों में इस अचानक गिरावट का मुख्य कारण विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों से होने वाली भारी आपूर्ति है, जिससे थोक बाजारों में ओवरसप्लाई हो गई है। इस कारण किसानों को फसल के चरम सीजन में भी अपेक्षित आय नहीं मिल पा रही है।

डिंडीगुल जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में टमाटर की कीमतें प्रति किलोग्राम एक अंक तक गिर गई हैं, और व्यापारियों द्वारा पिछले हफ्तों की तुलना में काफी कम दाम दिए जा रहे हैं।

जिन किसानों ने खेती में भारी निवेश किया था, वे अब संचालन लागत संभालने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, क्योंकि बाजार अतिरिक्त आपूर्ति को समाहित नहीं कर पा रहा है। बढ़ती मजदूरी लागत ने इस संकट को और बढ़ा दिया है।

किसानों का कहना है कि कटाई और परिवहन की लागत अधिक होने के कारण मौजूदा कीमतें भी खर्च को पूरा नहीं कर पा रही हैं। इसी वजह से नुकसान कम करने के लिए कटाई को रोकने का चलन बढ़ता जा रहा है।

डिंडीगुल के किसानों ने बताया कि 14 किलोग्राम के एक टमाटर बॉक्स की कीमत घटकर 100 से 150 रुपये रह गई है, जबकि कुछ हफ्ते पहले यह 400 से 600 रुपये थी। वहीं, मजदूरी लागत लगभग 400 रुपये प्रतिदिन बनी हुई है। गिरती कीमतों और बढ़ती लागत के संयोजन ने कई किसानों को तोड़ाई पूरी तरह बंद करने पर मजबूर कर दिया है।

कई किसानों ने स्थिर बाजार की उम्मीद में खेती का विस्तार किया था, लेकिन अब वे बढ़ते आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

कटाई की लागत लगभग 80 रुपये प्रति बॉक्स आंकी जा रही है, लेकिन मौजूदा बाजार मूल्य बुनियादी खर्च भी नहीं निकाल पा रहा, जिससे किसानों का नुकसान और बढ़ रहा है।

धर्मपुरी जिले में कीमतों में हल्की सुधार के संकेत मिले हैं, जहां हाल की बारिश के बाद आपूर्ति कम होने से कीमतें 13 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि बाजार अभी भी अस्थिर और अनिश्चित बना हुआ है।

तिरुचिरापल्ली जिले के मरुंगापुरी क्षेत्र में भी स्थिति ऐसी ही है, जहां किसानों ने कटाई रोक दी है। तोड़ाई और परिवहन की लागत लगभग 3,000 रुपये प्रति एकड़ होने के कारण मौजूदा कीमतों पर काम जारी रखना संभव नहीं है।

विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और न्यूनतम समर्थन तंत्र जैसे उपायों की आवश्यकता बताई है, ताकि किसानों को बार-बार होने वाली कीमत गिरावट से बचाया जा सके और उन्हें स्थिर आय सुनिश्चित हो सके।

Point of View

जिससे न केवल उनकी मेहनत का फल प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके भविष्य को भी खतरा है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

टमाटर की कीमतें क्यों गिरी हैं?
विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों से भारी मात्रा में आपूर्ति आने के कारण टमाटर की कीमतों में गिरावट आई है।
किसानों ने कटाई क्यों रोक दी?
कम कीमतों और बढ़ती लागत के चलते किसानों ने फसल की कटाई रोकने का निर्णय लिया है।
डिंडीगुल में टमाटर की कीमतें क्या हैं?
डिंडीगुल में टमाटर की कीमतें प्रति किलोग्राम एक अंक तक गिर गई हैं।
किसान अब क्या करेंगे?
किसान दीर्घकालिक समाधान की तलाश में हैं, जिसमें बेहतर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन शामिल है।
क्या कीमतों में सुधार की उम्मीद है?
धर्मपुरी जिले में हल्की सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन बाजार अभी भी अस्थिर है।
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