तमिलनाडु में बेमौसम ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, सरकार ने शुरू किया आकलन अभियान

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तमिलनाडु में बेमौसम ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान, सरकार ने शुरू किया आकलन अभियान

सारांश

तमिलनाडु में बेमौसम ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत आकलन अभियान शुरू किया है ताकि किसानों को उचित सहायता मिल सके।

Key Takeaways

  • 850 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
  • मुख्य प्रभावित जिले: मदुरै, सलेम, तेनकासी.
  • धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
  • सरकार ने आकलन अभियान शुरू किया है।
  • किसानों को शीघ्र सहायता देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

चेन्नई, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के अनेक जिलों में तेज हवाओं और बारिश के साथ हुई बेमौसम ओलावृष्टि ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। इस कारण राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर आकलन अभियान शुरू किया है।

अधिकारियों के अनुसार, 850 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिससे किसानों में आर्थिक हानि को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिले मदुरै, सलेम और तेनकासी हैं, जहाँ ओलावृष्टि से लगभग 810 हेक्टेयर की फसलें प्रभावित हुईं।

धान, कपास, गन्ना, तिलहन और बाजरा की खेती करने वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से कई फसलें लगभग पक गई थीं। किसानों ने इस मौसम के दौरान ओलावृष्टि के समय को लेकर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि धान के खेतों में जल्द कटाई होने वाली थी।

अचानक हुए इस प्रभाव से फसलें गिर गईं, अनाज को नुकसान हुआ और उपज की संभावना कम हो गई, जिससे बाजार मूल्य पर काफी असर पड़ सकता है।

इसी बीच, कोयंबटूर, डिंडीगुल, इरोड, कृष्णागिरी, नमक्कल, सलेम और तिरुपुर सहित विभिन्न जिलों में तेज हवाओं और रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण बागवानी की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों का अनुमान है कि लगभग 40 हेक्टेयर में फल और सब्जियों की खेती प्रभावित हुई है।

स्थिति को देखते हुए, तमिलनाडु सरकार ने राजस्व और कृषि विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त रूप से जमीनी निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। फसल की स्थिति का आकलन करने और किसानों से सीधे डेटा एकत्र करने के लिए टीमें पहले से ही गाँवों का दौरा कर चुकी हैं।

अधिकारियों ने बताया कि चल रहे सर्वेक्षण का उद्देश्य नुकसान की सटीक सीमा का पता लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित किसानों को उचित सहायता मिले। निष्कर्षों को विस्तृत जिलावार रिपोर्टों में संकलित किया जाएगा, जो सरकार को राहत उपायों और मुआवजे के पैकेजों को अंतिम रूप देने में सहायता करेंगी।

अधिकारियों ने बताया कि आकलन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि किसानों को इस अप्रत्याशित झटके से उबरने में मदद करने के लिए बिना किसी देरी के सहायता प्रदान की जा सके।

Point of View

जिसमें प्राकृतिक आपदाएँ किसानों की आजीविका को प्रभावित कर रही हैं। सरकार का त्वरित कदम स्थिति को संभालने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है।
NationPress
22/03/2026

Frequently Asked Questions

तमिलनाडु में ओलावृष्टि से कितनी कृषि भूमि प्रभावित हुई?
850 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई है।
कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं?
मदुरै, सलेम और तेनकासी जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
किसानों को सहायता कैसे मिलेगी?
सरकार ने फसल नुकसान का आकलन करने के लिए अभियान शुरू किया है ताकि उचित सहायता प्रदान की जा सके।
ओलावृष्टि के कारण किन फसलों को नुकसान हुआ है?
धान, कपास, गन्ना, तिलहन और बाजरा जैसी फसलों को नुकसान हुआ है।
सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने जमीनी निरीक्षण और नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया है।
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