पंजाब में बेमौसम बारिश ने 35 लाख हेक्टेयर में गेहूं फसल को किया प्रभावित, केंद्र से मदद की अपील
सारांश
Key Takeaways
- पंजाब में बेमौसम बारिश ने गेहूं फसलों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
- 35 लाख हेक्टेयर में बोई गई गेहूं से बंपर फसल की उम्मीद थी।
- किसान समुदाय संकट में है।
- राज्य सरकार ने विशेष 'गिरदावरी' का आदेश दिया है।
- केंद्र सरकार से तत्काल राहत की मांग की गई है।
चंडीगढ़, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने बुधवार को केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह राज्य में बेमौसम भारी बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं और अन्य रबी फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय टीम भेजे।
उन्होंने केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में बताया कि खराब मौसम ने गेहूं की फसलों पर गंभीर असर डाला है। खुडियां ने कहा कि 35 लाख हेक्टेयर में बोए गए गेहूं से उम्मीद थी कि बंपर फसल होगी, लेकिन लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को संकट में डाल दिया है।
खुडियां ने आगे कहा कि राज्य के कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार 1.30 लाख एकड़ से अधिक भूमि पर फसल का नुकसान हुआ है। बारिश के चलते यह नुकसान बढ़ता जा रहा है, और अंतिम आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह नुकसान केवल गेहूं तक सीमित नहीं है, बल्कि फाजिल्का, फिरोजपुर, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, और मानसा सहित कई जिलों में सब्जियाँ, चारा और अन्य रबी फसलें भी प्रभावित हुई हैं। फसल का नुकसान किसानों की आजीविका और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन गया है।
खुडियां ने कहा कि राज्य सरकार ने फसल के नुकसान का आकलन करने के लिए पहले ही एक विशेष 'गिरदावरी' (सर्वेक्षण) का आदेश दे दिया है। नुकसान की व्यापकता और किसानों पर आर्थिक बोझ को देखते हुए, उन्होंने केंद्र सरकार से तात्कालिक राहत और मुआवजे की मांग की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विस्तृत आकलन के लिए एक केंद्रीय टीम की तुरंत आवश्यकता है, और साथ ही आश्वासन दिया कि राज्य सरकार अपने किसानों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और केंद्रीय टीम को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।