डीजल महंगा होने से एमएसआरटीसी पर ₹125 करोड़ का सालाना बोझ, किराया बढ़ोतरी के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) एक बार फिर गंभीर वित्तीय दबाव में है। केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार, 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि के बाद, निगम पर अनुमानित ₹124 से ₹125 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ने की आशंका है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री एवं एमएसआरटीसी के अध्यक्ष प्रताप सरनाइक ने संकेत दिया है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो यात्री किराए में वृद्धि अपरिहार्य हो सकती है।
मूल्य वृद्धि का सीधा असर
एमएसआरटीसी अपने 251 डिपो में संचालित विशाल बस बेड़े के लिए प्रतिदिन लगभग 11 लाख लीटर डीजल की खपत करता है। ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी का अर्थ है कि निगम को प्रतिदिन लाखों रुपए का अतिरिक्त व्यय वहन करना होगा। वार्षिक आधार पर यह बोझ ₹125 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में आया है जब निगम पहले से ही लगभग ₹12,000 करोड़ के संचित घाटे से जूझ रहा है। ईंधन लागत में यह नई वृद्धि उस घाटे को और गहरा कर सकती है।
मंत्री सरनाइक का बयान
मीडिया से बातचीत में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा, 'पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर हमारी परिचालन लागत पर पड़ता है। हालांकि हमने अभी तक किराया नहीं बढ़ाया है, लेकिन भविष्य में हमें इस पर विचार करना पड़ सकता है। निगम अनिश्चित काल तक इतने बड़े नुकसान को सहन नहीं कर सकता।'
सरनाइक ने यह भी स्वीकार किया कि भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित वैश्विक ईंधन बाज़ार के कारण मौजूदा दरों पर परिचालन जारी रखना कठिन होता जा रहा है। राज्य सरकार एमएसआरटीसी को विभिन्न सब्सिडी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है, फिर भी यह बोझ उठाना चुनौतीपूर्ण है।
गैर-टिकट राजस्व बढ़ाने की योजना
किराया वृद्धि से बचने के प्रयास में एमएसआरटीसी ने वैकल्पिक राजस्व स्रोत विकसित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। निगम सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 100 से अधिक मल्टी-मोडल ईंधन स्टेशन स्थापित कर रहा है, जिनमें पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और ईवी चार्जिंग की सुविधा होगी। इनसे सालाना ₹100 करोड़ के राजस्व की उम्मीद है।
इसके अलावा, ये चार्जिंग स्टेशन अंततः निजी वाहनों के लिए भी खोले जाएंगे, जिससे अतिरिक्त आय अर्जित होगी। बसों और बस स्टैंडों पर विज्ञापनों के माध्यम से अगले पाँच वर्षों में ₹250 करोड़ से अधिक की आय अर्जित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना भी तैयार की गई है।
इलेक्ट्रिक बसों की ओर बदलाव
दीर्घकालिक समाधान के रूप में एमएसआरटीसी इलेक्ट्रिक बसों की ओर संक्रमण को तेज़ कर रहा है। डीजल पर निर्भरता कम करना निगम की रणनीति का केंद्रीय बिंदु है, क्योंकि वैश्विक तेल बाज़ार में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।
यह ऐसे समय में है जब देशभर में सार्वजनिक परिवहन निकाय ईंधन लागत के दबाव में हैं और कई राज्यों में किराया बढ़ोतरी पर बहस छिड़ी हुई है। एमएसआरटीसी के अगले कदम पर महाराष्ट्र के लाखों दैनिक यात्रियों की नज़र टिकी है।